
Jewellery theft gang : राजसमन्द जिले की आमेट पुलिस ने सोना-चांदी की दुकानों पर ग्राहक बनकर चोरी करने वाले एक अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है। इस गिरोह की चार महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने बड़ी मेहनत और तकनीकी जांच के आधार पर इस वारदात का खुलासा किया।
Amet police catch inter-district gang आमेट थानाधिकारी ओमसिंह चुंडावत ने बताया कि घनश्याम लाल सोनी (65) ने 14 जनवरी को थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि 11 जनवरी की शाम करीब 5.30 बजे चार महिलाएं राजपूती पोशाक में उनकी दुकान पर आईं। उन्होंने गहने दिखाने की मांग की। महिलाएं अलग-अलग तरह के गहनों को बार-बार देखने लगीं और लगातार बातचीत में उलझाकर दुकानदार का ध्यान भटकाती रहीं। इस बीच, मौका पाकर उन्होंने डिस्प्ले बॉक्स से सोने और चांदी के कई गहने चोरी कर लिए। बाद में जब दुकानदार ने गहनों को वापस अपनी जगह रखने का प्रयास किया तो उसे चोरी का पता चला। दुकान से चोरी गए गहनों में दो सोने की ‘रामनवमी’, सोने के चार घटकोड़े, मंगलसूत्र में पिरोने के लिए सोने के मोती (करीब 12 से 13 ग्राम वजन), चांदी की फोलरिया की जोडि़यों का पैकेट (करीब 510 ग्राम) और चांदी की पायल की एक जोड़ी (करीब 250 ग्राम वजन) शामिल थी। चोरी से दुकानदार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद पीड़ित की रिपोर्ट पर जांच शुरू की गई। सोना-चांदी की दुकानों में लगातार हो रही चोरियों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और तुरंत विशेष टीम गठित करने के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेन्द्र पारीक और वृताधिकारी कुम्भलगढ़ ज्ञानेन्द्र सिंह राठौड़ के सुपरविजन में थाना अधिकारी ओमसिंह चुंडावत ने स्वयं नेतृत्व करते हुए जांच टीम बनाई।

150 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले
Gold and silver theft Rajsamand पुलिस ने घटनास्थल और उसके आस-पास के करीब 150 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसके साथ ही तकनीकी सहायता ली गई और आसपास के जिलों – देसूरी, पाली, रोहट, जोधपुर, बिलाड़ा, मारवाड़ जंक्शन, जोजावर, आउवा, सिरयारी, करमाल, देवगढ़ और भीम – में ऐसे गिरोहों की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पुलिस को यह भी पता चला कि नट (वावरी) गिरोह की महिलाएं इस तरह की चोरियों में पहले भी लिप्त रही हैं। जांच के दौरान देवगढ़ सर्कल क्षेत्र में जोधपुर पासिंग नंबर RJ 19 PA 4657 की एक टवेरा एम्बुलेंस संदिग्ध हालत में खड़ी मिली। गाड़ी में चार महिलाएं और एक पुरुष बैठा हुआ मिला। शक होने पर पुलिस ने सभी को थाने लाकर पूछताछ शुरू की। महिला कांस्टेबलों की मौजूदगी में आरोपियों से अलग-अलग गहन पूछताछ की गई। मनोवैज्ञानिक तरीके से की गई पूछताछ में आखिरकार पांचों ने आमेट की ज्वैलरी दुकान में चोरी की वारदात करना स्वीकार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मसूरिया नट बस्ती, जोधपुर निवासी मोसमी पत्नी स्व. राजेश (48), बायदा नट पत्नी नीलकमल(तलाकशुदा), सुनीता पत्नी स्व. शेरसिंह (50), राइसा पत्नी स्व. बडमत (42) और जोधपुर निवासी राजू उर्फ राजेश आचार्य पुत्र नारायणलाल (57) के रूप में हुई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अलग-अलग जिलों में दुकानों पर ग्राहक बनकर जाता है। महिलाएं भारी राजपूती पोशाक पहनकर दुकानदार को बातचीत में उलझा लेतीं और इसी दौरान टीम के सदस्य गहनों को पार कर लेते। वारदात के बाद यह गिरोह जल्दी से वाहन में बैठकर फरार हो जाता था। आमेट पुलिस ने चोरी में प्रयुक्त टवेरा एम्बुलेंस को भी जब्त कर लिया है। आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस अब इस गैंग से अन्य वारदातों और चोरी गए आभूषणों की बरामदगी के संबंध में पूछताछ कर रही है।
एम्बुलेंस से मिला चोरी का माल
Gold theft by women in Rajsamand : आमेट थाना पुलिस द्वारा पकड़े गए महिला अभियुक्तों से जब चोरी के सामान के बारे में पूछताछ की गई तो महिलाओं ने खुलासा किया कि चोरी का सामान वे एम्बुलेंस में ही छिपाकर रखती थीं। पुलिस ने जब जप्त एम्बुलेंस में तलाशी ली तो उसमें सोना-चांदी के जेवरात बरामद हुए।
नशे की लत और चोरी का धंधा
Police arrest women in jewellery theft गिरफ्तार महिलाओं ने बताया कि वे सभी नशे की आदी हैं। नशे और मौज-मस्ती के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से चोरी को अपना धंधा बना लिया। वे अक्सर भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे कपड़ों की दुकानें, बर्तनों की दुकानें, सोना-चांदी की दुकानें, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर जातीं और मौका मिलते ही सामने वाले का ध्यान भटका कर चोरी कर लेती थीं। शुरुआती दौर में वे जोधपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में चोरी करती रहीं। लेकिन धीरे-धीरे लोग उन्हें पहचानने लगे तो उन्होंने बाहरी जिलों में जाकर वारदात करने का निर्णय लिया।
एम्बुलेंस चालक का साथ
इस गैंग ने अपनी वारदातों को अंजाम देने के लिए जोधपुर निवासी राजु उर्फ राजेश आचार्य (57 वर्ष) पुत्र नारायण लाल की एम्बुलेंस गाड़ी किराए पर रखी हुई थी। राजु आचार्य के.के. कॉलोनी बासनी थाना कुड़ी भगतासनी, जोधपुर का निवासी है और एक निजी अस्पताल के लिए एम्बुलेंस चलाता था। गैंग की महिलाएं जब भी चोरी करने निकलतीं, राजु आचार्य को कॉल कर देतीं। वह एम्बुलेंस लेकर उन्हें उनके ठिकाने से उठाता और बाहर के जिलों में छोड़ देता। चोरी की वारदात पूरी होने पर वही एम्बुलेंस से उन्हें वापस लेकर आता। कुछ समय बाद जब ड्राइवर को उनके धंधे की जानकारी हो गई तो उसने किराए के अलावा चोरी के माल में हिस्सा भी लेना शुरू कर दिया।

वारदात का अनोखा तरीका
महिला गैंग ने पूछताछ में खुलासा किया कि एम्बुलेंस को उन्होंने चोरी के लिए इसलिए चुना क्योंकि उसमें बैठने के बाद कोई शक नहीं करता था। न पुलिस रोकती और न आम लोग। अगर किसी को जरा भी शक होता तो उनमें से एक महिला स्ट्रेचर पर मरीज बनकर लेट जाती और बाकी उसे बीमार बताकर बच निकलतीं। चोरी से पहले एम्बुलेंस को वारदात स्थल से थोड़ी दूरी पर खड़ा किया जाता। महिलाएं चोरी के दौरान मोबाइल पर ड्राइवर से लगातार संपर्क में रहतीं। जरूरत पड़ने पर वह तुरंत गाड़ी लेकर पहुंच जाता और सभी सुरक्षित निकल जाते।
चोरी के माल की खपत
गिरफ्तार महिलाओं ने यह भी बताया कि उन्होंने चोरी का सामान कभी किसी परिचित को नहीं बेचा। वे हमेशा अजनबी महिलाओं को अपना बताकर आभूषण व अन्य सामान बेचती थीं। कई बार रास्ते में एम्बुलेंस रोककर बर्तन, कपड़े या छोटा-मोटा सामान सस्ते दामों पर बेच देतीं। वे सामने वाले को यह कहतीं कि वे बीमार मरीज लेकर जा रही हैं और पैसों की कमी है, इसलिए मदद करें। कई लोग भावनाओं में आकर उनसे चोरी का सामान खरीद लेते थे। इस तरह उन्होंने पहचान छुपाकर चोरी के माल की खपत की।
कई जिलों में फैला अपराध का जाल
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन, सांवरिया सेठ और आसपास के क्षेत्र, करमाल, जोजावर, ब्यावर, पाली, आउवा, देसूरी, सिरयारी, कन्टालिया, खिंवाड़ा, मारवाड़ जंक्शन, राजसमंद के आमेट व बिलाड़ा, इसके अलावा सालासर मंदिर, नाडोल आशापुरा माताजी मंदिर और अजमेर दरगाह जैसे स्थानों पर चोरी करना स्वीकार किया। आरोपियों का कहना है कि कई बार वे इतनी नशे की हालत में रहते थे कि बाद में उन्हें याद ही नहीं रहता था कि चोरी कहां की गई। उनका तरीका था कि दुकान में पहुंचकर दुकानदार को बातों में उलझाया जाए और इसी बीच आभूषण या सामान कपड़ों में छिपाकर निकाल लिया जाए।
सोना-चांदी पर विशेष नजर
महिला गैंग ने ज्यादातर कपड़े, बर्तन और घरेलू सामान चुराए। लेकिन जब भी मौका मिलता, वे सोना-चांदी की दुकानों पर जातीं। वे हमेशा ऐसी दुकानें चुनतीं जहां सीसीटीवी कैमरे न लगे हों और भीड़ अधिक हो। ऐसे समय में दुकानदार का ध्यान भटकाकर जो भी हाथ लगता उसे अपने कपड़ों में छिपा लेतीं। आमेट में भी इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया गया। महिलाएं आभूषण देखने के बहाने दुकान में गईं, दुकानदार को बातचीत में उलझाया और मौका पाकर सोना-चांदी के जेवर कपड़ों में छिपाकर निकल गईं।
इस पुलिस टीम ने की कार्रवाई
- ओम सिंह चुंडावत – थानाधिकारी, आमेट
- विक्रम सिंह – हैड कांस्टेबल
- शम्भुप्रताप सिंह – हैड कांस्टेबल
- शिवदर्शन सिंह – हैड कांस्टेबल
- अर्जुन सिंह – कांस्टेबल
- सुनील – कांस्टेबल
- सुर्यपाल – कांस्टेबल
- बृजमोहन सिंह – कांस्टेबल
- भाग्यश्री – महिला कांस्टेबल
- चिमु – महिला कांस्टेबल
- ओमप्रकाश – कांस्टेबल
- इन्दर चोयल – कांस्टेबल
- अरविन्द – कांस्टेबल
- कोमल – महिला कांस्टेबल
- अनिता – महिला कांस्टेबल



