
Matrikundiya Dam protest मेवाड़ का हरिद्वार माने जाने वाले मातृकुंडिया बांध की पाल पर राजसमंद व चित्तौड़गढ़ जिले के सीमावर्ती गांवों के किसानों ने प्रदेश की भजनलाल सरकार को 12वें की धूप देने की रस्म निभाई। किसान पिछले 12 दिन से यहां धरने पर बैठे हैं, मगर सरकार व प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा अब तक किसानों से सकारात्मक वार्ता के लिए नहीं पहुंचा। इस कारण किसानों में आक्रोश है। परिवार में सदस्य की मौत के 12 दिन होने पर जिस तरह धूप के बाद घड़े भरने की रस्म निभाई जाती है, ठीक वैसे ही क्रियाक्रम किसानों द्वारा राज्य सरकार को मृत मानकर किया। दरअसल किसानों काे मुआवजा दिए बगैर ही बांध को भर दिया, जिसकी वजह से किसान धरने पर बैठे हैं।
किसान संघर्ष समिति अध्यक्ष कालूराम गाडरी ने बताया कि मातृकुंडिया बांध में अभी 22 फीट से ज्यादा पानी भरा हुआ है, जिसकी वजह से राजसमंद व चित्तौड़गढ़ जिले के गिलूंड, कुंडिया, जवासिया, गुरजनिया, आरणी, कोलपुरा, टीलाखेड़ा, खुमाखेड़ा आदि गांवों के खेत, रास्ते बांध के पानी में डूबे हुए हैं। इस कारण मक्का की फसलें व चारा सब डूबने के साथ सड़ गया। बारिश का सीजन खत्म होने के बाद भी बांध पूरा भरा हुआ है, जिसकी वजह से इन गांवों के रास्तों में पानी भरा है और खेत भी जलमग्न है। इसलिए किसानों की मांग है कि बांध को 15 फीट से ज्यादा पानी नहीं भरा जाए, ताकि किसानों के खेत जलमग्न नहीं हो। क्योंकि सरकार द्वारा 3 हजार बीघा खेतों को न तो सरकार ने अधिकग्रहित किया और न ही मुआवजा राशि दी है। फिर सरकार द्वारा अनैतिक तरीके से किसानों की निजी जमीन में पानी क्यों भरा जा रहा है। इसी बात को लेकर किसान पर 12 दिन से मातृकुंडिया बांध पर धरने पर बैठे हैं, जहां रेलमगरा तहसीलदार कालूसिंह राणा ने पहुंचकर किसानों से वार्ता की, मगर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं निकल पाया। उसके बाद रेलमगरा उपखंड अधिकारी ने भी किसानों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर बात की, मगर समाधान नहीं निकला। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन व जनप्रतिनिधि मौके पर आकर किसानों की बात नहीं सुनेंगे और उनकी समस्या का समाधान नहीं करेंगे, तब तक उनका धरना अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा।

धरना स्थल पर धूप की रस्म निभाई
Farmers protest at Matrikundiya Dam : किसानों की आवाज नहीं सुनने पर प्रदेश की भजनलाल सरकार को मृत मानते हुए धरने के 12वें दिन बारहवें का धूप दिया गया। साथ ही महिला किसानों ने रोते हुए घड़े भरकर खाली करने की रस्म भी निभाई गई। राज्य सरकार हाय हाय के नारे लगाए। फिर किसान एकता के जयकारे भी लगाए गए।
यह है किसानों की मांग –
- Bhajanlal Sharma government farmers protest : बिना मुआवजा दिए किसानों की 3 हजार बीघा जमीन पर पानी भरा है, जिसे खाली किया जाए –
- बांध का अधूरा निर्माण होने से दो हजार बीघा जमीन में हो रहे सीपेज को रोका जाए
- बांध में अभी 22.50 फीट पानी भरा हुआ है, जिसे 15 फीट तक रिवर्ज रखा जाए
- वर्ष 2017 में प्रशासन द्वारा किसानों का मुआवजा तय करने के लिए जिला स्तर पर गठित कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने व मुआवजा दिया जाए
- मातृकुंडिया बांध से पानी हिन्दुस्तान जिंक ले जा रहा है और फसलें किसानों की बर्बाद हो रही है, जिससे क्षेत्रीय लोगों के प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाई जाए
- मातृकुंडिया बांध से प्रभावित जवासिया, कुंडिया, गिलूंड पंचायत को हिन्दुस्तान जिंक के सीएसआर में जोड़कर विकास किया जाए

किसानों से वार्ता जारी
Rajasthan dam compensation news मातृकुंडिया बांध पर धरने पर बैठे किसानों से वार्ता लगातार की जा रही है। तहसीलदार व एसडीएम द्वारा वार्ता की गई। अब दो दिन बाद प्रतिनिधि मंडल को राजसमंद बुलाकर फिर बात करेंगे। तकनीकी दृष्टि से बांध को अभी खाली करना संभव नहीं है। फिर भी विभागीय अधिकारियों के साथ किसानों की बैठक रखेंगे, ताकि उचित समाधान निकल सके।
अरुण कुमार हसीजा, जिला कलक्टर राजसमंद
