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Mavli Marwar Meter Gauge Railway Line : आजादी से पहले चली, 88 साल बाद बंद, गोरमघाट में चलेगी

Laxman Singh Rathor May 3, 2025 1 minute read

Mavli Marwar Meter Gauge Railway Line : उत्तर-पश्चिम रेलवे के अजमेर मंडल के अंतर्गत आने वाली मावली-मारवाड़ जंक्शन के बीच चलने वाली प्रदेश की एकमात्र मीटर गेज ट्रेन का संचालन आधे रास्ते तक बंद कर दिया गया। यह मीटरगेज लाइन 88 साल से इस क्षेत्र में रेल सेवा को संभाल रही थी। मीटर गेज रेल संचालन के बंद होने पर लाेगों ने भावभीनी विदाई दी थी। मावली से मारवाड़ तक का सफर भी काफी रोमांचक रहता था। रफ्तार भी काफी धीमी रहती और सामने अगर पटरी पर कोई जानवर भी आ जाता, तो ट्रेन को ब्रेक देकर रोक देते। सफर जितना लुभावना था, उतना ही जोखिमभरा भी है। खास तौर से कामलीघाट से आगे फुलाद स्टेशन तक घना जंगल है, जहां जब ट्रेन गुजरती है, तो वहां का नजारा बड़ा खूबसुरत हो जाता और यहां की हरी भरी पहाड़ियां कश्मीर का अहसास कराती है। भले ही यह ट्रेन मावली तक नहीं चलेगी, मगर मारवाड़ जंक्शन से राजसमंद जिले में कामलीघाट रेलवे स्टेशन तक इस मीटर गेज ट्रेन का संचालन होता रहेगा, जो सुखद बात है।

Meter Gauge Train : मावली- मारवाड़ मीटरगेज लाइन सिर्फ एक रेलमार्ग नहीं थी, बल्कि यह राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। 88 साल से इस ट्रेन ने इस क्षेत्र के लोगों की सेवा की और उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गई। इस ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों की कई यादें जुड़ी हुई हैं। कुछ लोगों ने इस ट्रेन में स्कूल जाते हुए अपना बचपन बिताया होगा, तो कुछ लोगों ने इसी ट्रेन से अपने सपनों को पूरा करने के लिए शहरों का रुख किया होगा। यह ट्रेन ना सिर्फ लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का साधन थी, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी माध्यम थी। यह निश्चित रूप से दुखद है कि यह ट्रेन अब नहीं चलेगी, लेकिन इसका इतिहास हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेगा। यह मीटरगेज लाइन हमें रियासतकालीन भारत की याद दिलाती है, जब रेलवे का विकास अभी अपने शुरुआती दौर में था। यह लाइन इस बात का भी प्रमाण है कि कैसे रेलवे ने भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि यह समय बदलाव का है। ब्रॉडगेज लाइनें अधिक तेज़ और कुशल हैं और वे क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने में मदद करेंगी। हमें भविष्य के लिए उत्साहित रहना चाहिए, लेकिन हमें अतीत को भी नहीं भूलना चाहिए। 1936 से चल रही यह ट्रेन दुनिया के चुनिंदा मीटर गेज ट्रैक में से एक है। इसमें खास बात यह है कि 80% रास्ता पहाड़ों के बीच से होकर गुजरता है।

88 साल का गौरवशाली इतिहास

Meter Gauge Train in Kankroli : 1936 में शुरू हुई मावली मारवाड़ मीटरगेज रेल लाइन 88 साल तक राजस्थान के अजमेर मंडल के लोगों की सेवा करती रही। यह लाइन न केवल परिवहन का साधन थी, बल्कि इस क्षेत्र के विकास और समृद्धि की गवाह भी रही। इस 102 किलोमीटर लंबी लाइन का निर्माण बीकानेर राज्य द्वारा किया गया था और यह मावली जंक्शन को मारवाड़ जंक्शन से जोड़ती थी। शुरुआती दौर में, इस लाइन पर भाप के इंजन वाली ट्रेनें चलती थीं। धीरे-धीरे, इनकी जगह डीजल इंजनों ने ले ली। इस लाइन ने क्षेत्र के व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने किसानों को अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने में मदद की और यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से जाने का साधन प्रदान किया। यह लाइन कई महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों से भी होकर गुजरती थी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिला। समय के साथ, सड़क परिवहन विकसित हुआ और मीटरगेज लाइन धीरे-धीरे अप्रासंगिक होती गई। अंततः, 27 अप्रैल 2024 को मावली-मारवाड़ मीटरगेज लाइन को बंद कर दिया गया और इसे ब्रॉडगेज लाइन में बदलने का काम शुरू कर दिया गया। उदयपुर जिले के मावली से रवाना होकर राजसमंद जिले से होकर पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन तक पहुंचती थी। इस बीच में 16 स्टेशन थे, जहां पर ट्रेन यात्रियों के लिए रूकती थी। यह सफ़र तय करती है एवं यात्रा के दौरान 16 स्टेशनों पर रुकती है।

प्रारंभ में भाप इंजन से चलती थी ट्रेन

Khamli Ghat Railway Station : यह लाइन 1936 में शुरू हुई थी और उस समय भाप के इंजन ही रेलवे के लिए सबसे आम थे। इन भाप के इंजनों को कोयले से चलाया जाता था और वे धीमे और शोरगुल वाले होते थे। धीरे-धीरे, डीजल इंजनों ने विकास किया और वे अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण भाप के इंजनों की जगह लेने लगे। 1960 के दशक तक, मावली-मारवाड़ मीटर गेज लाइन पर भी डीजल इंजनों का इस्तेमाल होने लगा था। हालांकि, कुछ विशेष ट्रेनों को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भाप के इंजनों के साथ चलाया जाता था। यह ट्रेनें यात्रियों को बीते हुए जमाने की याद दिलाती थीं और रेलवे के इतिहास के प्रति जागरूकता पैदा करने में मदद करती थीं।

कांकरोली, आमेट व कामलीघाट

Railway Station Mavli : मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाली मीटरगेज रेल का सबसे ज्यादा फायदा राजसमंद जिले को भी था। मावली, तमला मोगना, मंडियाना, बेजनाल, कांकरोली, कुंवारिया, लावासरदारगढ़, चारभुजा रोड आमेट, खरा कामेरी, दौलजी का खेड़ा, देवगढ मदरिया, कामलीघाट, गोरमघाट, फुलाद, मारवाड़ रानावास व मारवाड़ जंक्शन आदि रेलवे स्टेशन है, जहां यात्रियों को टिकट मिलते हैं। पहले ट्रेनों के चार फेरे होते थे, मगर समय के साथ घटते यात्री भार के चलते आखिर में दो ट्रेनों का एक एक चक्कर होने लगा। कोरोना के बाद लंबे समय तक ट्रेन का संचालन बंद भी रहा, मगर क्षेत्रीय लोगों की मांग पर दोबारा संचालन शुरू किया गया, मगर अब मावली से देवगढ़ यानि कामलीघाट तक ब्रॉडगेज लाइन बिछाई जा रही है। इसलिए अब मावली से कामलीघाट तक की मीटरगेज पटरी को उखाड़ा जा रहा है और ब्रॉडगेज के लिए नई पटरी बिछाई जाएगी।

खुशियां और गम का मिश्रण

People Bid Farewell to The Train : 27 अप्रैल 2024 का दिन मावली-मारवाड़ मीटरगेज लाइन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन था। इस दिन 88 साल पुरानी इस लाइन को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया और इसे ब्रॉडगेज लाइन में बदलने का काम शुरू कर दिया गया। इस बदलाव से लोगों में खुशी और गम का मिश्रण था। एक ओर लोगों को ब्रॉडगेज लाइन आने की खुशी थी। ब्रॉडगेज लाइन से ट्रेनें तेज गति से चलेंगी और यात्रा का समय कम लगेगा। वहीं दूसरी ओर, बरसों की साथी रही मीटरगेज ट्रेन के बंद होने का दुख भी था। कई वृद्ध अपने नाती-पोतों के साथ ट्रेन देखने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने ट्रेन में यात्रा करने के अपने जीवनकाल के किस्से सुनाकर सभी को रोमांचित कर दिया। कई लोगों ने मीटरगेज में आखिरी बार यात्रा करके मोबाइल में मीटरगेज की यादों को कैद किया। इस ट्रेन में आखिरी बार के सफर में देशी पर्यटकों में उत्साह था। विदेशी पर्यटक भी इस अवसर का लाभ उठाने पीछे नहीं रहे। मावली-मारवाड़ मीटरगेज लाइन भले ही अब बंद हो गई है, लेकिन यह हमेशा लोगों की यादों में रहेगी। सफर के आखिरी दिन कांकरोली, आमेट व कामलीघाट में क्षेत्रीय लोगों द्वारा ट्रेन के पायलट व अन्य कार्मिकों का माला पहनाकर विदाई दी गई।

मोदी के पहले कार्यकाल में शिलान्यास

Broad gauge line in Rajsamand : मारवाड़ जंक्शन और मावली जंक्शन को जोड़ने वाली एकमात्र मीटर गेज रेलवे लाइन के आमान परिवर्तन को गत 10 मई को मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के तीसरे बजट में रेलवे मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया था। यह नाथद्वारा से देवगढ मदारिया को मीटर गेज से ब्रोडगेज में परिवर्तन करने के लिए शिलान्यास किया था। यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जो बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा, पर्यटन को प्रोत्साहन और रोजगार के अवसरों के सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यहां थी मीटर गेज ट्रेन (अक्टूबर, 2022 तक)

  • मावली जंक्शन-मारवाड़ जंक्शन-मावली जंक्शन एमजी [राजस्थान]
  • मारवाड़ जंक्शन-खामली घाट-मारवाड़ जंक्शन एमजी [राजस्थान]
  • बहराइच-मैलानी-बहराइच एमजी [उत्तर प्रदेश]
  • बहराइच-नेपालगंज रोड-बहराइच [उत्तर प्रदेश]
  • डॉ.अम्बेडकर नगर (महू)-ओमकारेश्वर-महू एमजी [मध्य प्रदेश]
  • अमरेली-वेरावल-अमरेली एमजी [गुजरात]
  • जूनागढ़-डेलवाडा-जूनागढ़ एमजी [गुजरात]
  • वेरावल-डेलवाडा-वेरावल एमजी [गुजरात]
  • अमरेली-जूनागढ़-अमरेली एमजी [गुजरात

कामलीघाट से मारवाड़ तक चलती रहेगी मीटरगेज ट्रेन

राहत की बात यह है कि ब्रॉडगेज लाइन के लिए नई रेल लाइन बिछाने का कार्य फिलहाल मावली से कामलीघाट तक ही होगा। ऐसे में मीटरगेज लाइन कामलीघाट से मारवाड़ जंक्शन तक है, जहां पर मीटरगेज ट्रेन का संचालन सुचारू रहेगा। ऐसे में खास तौर से देवगढ़ से फुलाद रेलवे स्टेशन के बीच में ही ट्रेन का सफर खास रोमांचक रहता है। बारिश के वक्त हरि भरी पहाड़ियों के बीच ट्रेन में सफर का आनंद लोग अब भी ले सकेंगे। इसके लिए देवगढ़ के कामलीघाट तक किसी अन्य वाहनों से जाना होगा और उसके बाद अगला सफर मीटर गेज ट्रेन से किया जा सकता है। क्योंकि कामलीघाट से फुलाद स्टेशन का सफर ही खास रोमांचक रहता है।

151 किमी. लंबा है मावली- मारवाड़ का रेलमार्ग

Mavli Marwar train : मावली से मारवाड़ जंक्शन पैसेंजर ट्रेन, जो पिछले 88 साल से चल रही थी। कामली घाट से मारवाड़ जंक्शन के बीच ट्रेन का संचालन जारी रहेगा। कामली घाट से मारवाड़ जंक्शन के बीच हैरिटेज ट्रेन का संचालन भी यथावत रहेगा। मावली-मारवाड़ पैसेंजर ट्रेन 1936 में शुरू हुई थी। यह ट्रेन 151 किलोमीटर की दूरी तय करती थी और 6 घंटे 30 मिनट में मारवाड़ जंक्शन पहुंचती थी। इस ट्रेन के बंद होने से कई यात्रियों को परेशानी होगी।

मावली मारवाड़ पैसेंजर – 52076 ट्रेन सूचना

मावली मारवाड़ पैसेंजर – 52076, MVJ (मावली जंक्शन) से MJ (मारवाड़ जंक्शन) तक 27 अप्रैल 2024 तक सप्ताह में सातों दिन चलती थी। यह मावली जंक्शन से मारवाड़ जंक्शन तक चलने वाली प्रमुख ट्रेन थी। Mavli से Marwar तक पहुँचने के लिए ट्रेन ही सुलभ साधन था। इसके अलावा रोडवेज बस, प्राइवेट बसें भी चलती है।

मीटरगेज ट्रेन में शिमला की टॉय ट्रेन का अहसास

Railway General Knowledge : मारवाड़ जंक्शन से उदयपुर के मावली तक मीटर गेज ट्रेन का सफर शिमला की टॉय ट्रेन का अहसास कराती थी। हालांकि अब मावली से मारवाड़ की ट्रेन मारवाड़ से कामलीघाट तक ही सीमित हो गई है। मावली से नाथद्वारा (मंडियाना) रेलवे स्टेशन तक ब्रॉडगेज लाइन है। इसे 38 करोड़ की लागत में करीब 2014 पहले बिछाई थी। अभी इस ट्रैक पर सुबह-शाम चलने वाली ट्रेन में पांच-पांच डिब्बे हैं।

रेलवे संबंधी सामान्य जानकारी

  • भारत की सबसे सस्ती ट्रेन कौनसी : मेट्टुपालयम ऊटी पैसेंजर जिसे आमतौर पर नीलगिरी पैसेंजर के नाम से जाना जाता है। भारत में चलने वाली सबसे धीमी ट्रेन है।
  • किस देश में रेलवे नहीं है : मालदीव दक्षिण एशिया में हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह राज्य व देश है। इसकी भूमि का क्षेत्रफल बहुत छोटा है। इसलिए रेलवे नेटवर्क एक व्यवहार्य विचार नहीं है। फ़्रेंच रिवेरा में स्थित छोटे से शहर-राज्य मोनाको में रेलवे नेटवर्क नहीं है।
  • सबसे ज्यादा ट्रेन किस देश में चलती : दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क अमेरिका में है, लेकिन हाई-स्पीड ट्रेन के मामले में चीन आगे है। रेल नेटवर्क के मामले में अमेरिका के बाद चीन दूसरे, रूस तीसरे और भारत चौथे नंबर पर है। भारत में रोजाना 11,000 हजार ट्रेन चलती हैं और करोड़ों लोग रोज सफर करते हैं।
  • भारत देश में कितने ट्रेन है : भारतीय रेलवे में 12147 लोकोमोटिव, 74003 यात्री कोच व 289185 वैगन हैं। साथ ही रोजाना 8702 यात्री ट्रेनों के साथ कुल 13 हजार 523 ट्रेनें चलती हैं।
  • भारत का सबसे महंगी ट्रेन कौनसी है : महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन सबसे ज्यादा महंगी है, जिसमें लग्जरी सुविधाएं है। यह ट्रेन भारत ही नहीं, बल्कि एशिया की सबसे ज्यादा महंगी ट्रेन है।
  • सबसे सुंदर ट्रेन कौनसी है : भारतीय रेल की सबसे सुंदर व अच्छी ट्रेन महाराजा एक्सप्रेस है। इसमें वाईफाई, टीवी सहित अन्य बहुत सारी सुविधाएं हैं। इसमें चार तरह के केबिन हैं, जिन्हें अपने अनुसार बुक कर सकते है।
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Laxman Singh Rathor

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Laxman Singh Rathor को पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक का लंबा अनुभव है। 2005 में Dainik Bhakar से कॅरियर की शुरुआत कर बतौर Sub Editor कार्य किया। वर्ष 2012 से 2019 तक Rajasthan Patrika में Sub Editor, Crime Reporter और Patrika TV में Reporter के रूप में कार्य किया। डिजिटल मीडिया www.patrika.com पर भी 2 वर्ष कार्य किया। वर्ष 2020 से 2 वर्ष Zee News में राजसमंद जिला संवाददाता रहा। आज ETV Bharat और Jaivardhan News वेब पोर्टल में अपने अनुभव और ज्ञान से आमजन के दिल में बसे हैं। लक्ष्मण सिंह राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि खबरों की दुनिया में एक ब्रांड हैं। उनकी गहरी समझ, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, पाठक व दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें पत्रकारिता का चमकदार सितारा बना दिया है। jaivardhanpatrika@gmail.com

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