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Rajasthan tallest Hanuman statue : राजस्थान में बन गई सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा, 30 KM दूर से दिखेगा दिव्य नजारा

Parmeshwar Singh Chundwat March 26, 2026 1 minute read

राजसमंद। Rajasthan tallest Hanuman statue : आस्था, भक्ति और अद्भुत शिल्पकला का अनोखा संगम नाथद्वारा में देखने को मिलने जा रहा है। राजस्थान की सबसे ऊंची 131 फीट विशाल हनुमान प्रतिमा ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी है। यह भव्य प्रतिमा राजसमंद जिले के नाथद्वारा में दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ के सामने, करीब 500 फीट ऊंचे गिरिराज पर्वत पर स्थापित की गई है। रामनवमी के पावन अवसर पर इसका विधि-विधान के साथ लोकार्पण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्मा और श्रद्धालुओं के शामिल हुए।

इस प्रतिमा की सबसे खास बात इसकी स्वर्णिम आभा है। प्रतिमा लंबे समय तक अपनी चमक बनाए रखे, इसके लिए थाईलैंड से विशेष गोल्ड कलर मंगवाया गया। दूर से देखने पर यह प्रतिमा सोने जैसी दमकती नजर आती है। बताया जा रहा है कि यह भव्य प्रतिमा करीब 30 किलोमीटर दूर से भी स्पष्ट दिखाई देगी, जिससे नाथद्वारा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का नया केंद्र बनेगी। करीब 150 टन वजनी इस विशाल प्रतिमा के निर्माण के दौरान न केवल तकनीकी सावधानियां बरती गईं, बल्कि धार्मिक आस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया। निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए लगातार 3 वर्षों तक प्रतिदिन सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। यह तथ्य इस प्रतिमा को सिर्फ स्थापत्य की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत विशेष बनाता है।

गिरिराज पर्वत पर प्रणाम मुद्रा में विराजेंगे बजरंगबली

Nathdwara Hanuman statue : गिरिराज पर्वत पर स्थापित यह प्रतिमा दक्षिणमुखी है और इसे प्रभु श्रीनाथजी तथा विश्वास स्वरूपम प्रतिमा की ओर प्रणाम मुद्रा में तैयार किया गया है। प्रतिमा की यह मुद्रा केवल कलात्मक नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक भाव को व्यक्त करती है। इसका उद्देश्य स्वामी भक्ति को दर्शाना बताया गया है। इसी कारण बजरंगबली का मुख श्रीनाथजी और शिव प्रतिमा की दिशा में रखा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब प्रभु श्रीनाथजी ब्रज से मेवाड़ पधारे, तब अनेक देवी-देवता भी उनकी सेवा के लिए मेवाड़ आए। इसी आस्था से प्रेरित होकर हनुमानजी की प्रतिमा को नाथद्वारा के गिरिराज पर्वत पर स्थापित किया गया है। शास्त्रों में भी दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा को अत्यंत फलदायी, रक्षक और कल्याणकारी माना गया है। यही कारण है कि यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनने जा रही है।

निर्माण के दौरान चुनौतियां भी कम नहीं थीं

131 feet Hanuman statue : इस विशाल प्रतिमा का निर्माण विश्वास स्वरूपम जैसी भव्य शिव प्रतिमा बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार नरेश कुमावत ने किया है। उन्होंने बताया कि पहाड़ी के ऊपर काम करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। वहां हवा का दबाव इतना अधिक रहता था कि क्रेन को स्थिर खड़ा रखना भी लगभग असंभव हो जाता था। हर समय हादसे का खतरा बना रहता था, लेकिन टीम ने आधुनिक तकनीक, मजबूत संरचना और सूझबूझ के साथ इस कठिन कार्य को पूरा किया। प्रतिमा की ऊंचाई को लेकर भी विशेष जानकारी सामने आई है। जिस बेस पर यह प्रतिमा बनाई गई है, उसकी ऊंचाई करीब 20 फीट है, जबकि स्वयं प्रतिमा की ऊंचाई 111 फीट है। इस तरह जमीन से इसकी कुल ऊंचाई 131 फीट हो जाती है। आकार के लिहाज से यह प्रतिमा लगभग 13 मंजिला इमारत जितनी ऊंची बताई जा रही है।

देश की चौथी सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा

Shri Shriji Hanuman Ji Nathdwara : गिरिराज पर्वत पर स्थापित ‘श्री श्रीजी के हनुमानजी’ की यह प्रतिमा देश की चौथी सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमा मानी जा रही है। राजस्थान में इसकी ऊंचाई इसे विशेष पहचान देती है। नाथद्वारा में पहले ही 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ मौजूद है, जो विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा होने का दावा रखती है। ऐसे में अब हनुमानजी की यह भव्य प्रतिमा उस आध्यात्मिक आभा को और अधिक दिव्य और विराट स्वरूप देने वाली है।

2023 में हुआ था भूमि पूजन

Hanuman statue Rajsamand : प्रतिमा निर्माण की शुरुआत साल 2023 में भूमि पूजन के साथ हुई थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य आगे बढ़ा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तेज हवाओं और पर्वतीय क्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। निर्माण कार्य के दौरान वहां लगातार धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते रहे, जिससे पूरी प्रक्रिया में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।

मूर्तिकार नरेश कुमावत की अनूठी पहचान

Giriraj Parvat Hanuman statue : इस प्रतिमा के मूर्तिकार नरेश कुमावत देश-विदेश में अपनी कला के लिए जाने जाते हैं। वे अब तक 6 हजार से अधिक मूर्तियों का निर्माण कर चुके हैं। कनाडा सहित कई देशों के मंदिरों में उनकी बनाई मूर्तियां स्थापित हैं। कनाडा में ही उनकी बनाई 14 से अधिक प्रतिमाएं विभिन्न मंदिरों में विराजमान हैं। इसके अलावा वे नए संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और राम मंदिर जैसे प्रतिष्ठित स्थलों से जुड़े कार्यों में भी अपना योगदान दे चुके हैं।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

प्रतिमा निर्माण से जुड़े गिरीश रतिलाल शाह ने बताया कि यह विशाल हनुमान प्रतिमा न केवल क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी, बल्कि नाथद्वारा में धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा देगी। पहले से ही श्रीनाथजी मंदिर और विश्वास स्वरूपम प्रतिमा के कारण प्रसिद्ध नाथद्वारा अब इस नई भव्य प्रतिमा के कारण देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

सामने है 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा

विशेष बात यह भी है कि जहां यह हनुमान प्रतिमा स्थापित की गई है, उसके सामने ही 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा ‘विश्वास स्वरूपम’ स्थित है। इस प्रतिमा का लोकार्पण करीब तीन वर्ष पहले हुआ था। इसे बनने में लगभग 10 वर्षों का समय लगा था। यह शिव प्रतिमा अपने आप में अद्भुत है और इसके भीतर प्रवेश भी किया जा सकता है। अब उसी पावन धरा पर हनुमानजी की यह भव्य प्रतिमा आस्था के इस आध्यात्मिक परिदृश्य को और भी भव्य बनाने जा रही है। पर्यटन की दृष्टि से नाथद्वारा में मिराज समूह द्वारा बनाई शिव प्रतिमा भी खास है। विश्वास स्वरूपम नामक प्रतिमा विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा है। इसमें ध्यान मुद्रा में शिव, गले में नाग, जटाओं में गंगा, अर्धचंद्र, और त्रिशूल शामिल हैं। प्रतिमा के भीतर गेंदनुमा ढांचा, दर्शन दीर्घाएं (20-270 फीट), लिफ्ट, नंदी प्रतिमा और बाहरी क्षेत्र में बंजी जंपिंग, स्नो पार्क जैसी सुविधाएं हैं। साथ ही भोजनालय (फूड कोर्ट), 16 एकड़ का विशाल परिसर में लेजर फव्वारा, संगीत फव्वारा, तीन प्रकृति उद्यान, तालाब, और मिनी ट्रेन आदि शामिल है। रात में लाइट एंड साउंड सिस्टम भी पर्यटकों को खूब लुभाता है।

4 हजार श्रद्धालु रोज करते श्रीनाथजी के दर्शन

राजसमंद के नाथद्वारा शहर में श्रीनाथजी मंदिर में प्रतिदिन 4 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। देशी- विदेशी पर्यटक भी शामिल है। गुजरात, महाराष्ट्र के साथ दक्षिण भारत के लोगों में श्रीनाथजी के प्रति प्रगाढ़ आस्था है। इसी कारण नाथद्वारा शहर का लगातार विस्तार भी हो रहा है और पर्यटन की दृष्टि से रोजगार के नए द्वार भी खुल रहे हैं। साथ श्रीनाथजी दर्शन के बाद श्रद्धालु गिरीरात पर्वत की परिक्रमा, गौशाला का भी श्रद्धालु भ्रमण करते हैं।

भव्य प्रतिमा के मुख्य किरदार

गिरीश भाई शाह, जो महाष्ट्र में एसएमबी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के सीईओ है और श्रीनाथजी में उनकी प्रगाढ़ आस्था है। इसी के चलते हनुमानजी की प्रतिमा निर्माण का बीड़ा उठाया। इस प्रतिमा के शिल्पकार नरेश कुमावत है, जिन्होंने ही नाथद्वारा में दुनिया के सबसे ऊंची शिव प्रतिमा विश्वास स्वरूपम का निर्माण करवाया था। स्ट्रक्चरल डिजाइन शरद गुप्ता ने किया, जबकि तकनीकी सलाहकार प्रोफेसर दिनकर पासला व वास्तुकार व प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन हैड शिरीष सनाढ्य थे। पुरोहित परेश पंड्या और इंजीनियर एक्जीक्यूशन टीम के प्रमुख राजदीपसिंह वासल हैं।

परियोजना की मुख्य निर्माण टीम

  1. गिरीश भाई शाह (सीईओ, एस. एम. बी. कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) – निर्माण कर्ता
  2. नरेश कुमावत (मातूराम आर्ट्स सेंटर) शिल्पकार
  3. शरद गुप्ता स्ट्रक्चरल डिजाइनर
  4. प्रोफेसर दिनकर पासला (IIT भुवनेश्वर) तकनीकी सलाहकार
  5. शिरीष सनाढ्य – प्रमुख वास्तुकार एवं प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन हेड
  6. राजदीप सिंह वासल (निप्रा इंजीनियरिंग) इंजीनियर एग्जीक्यूशन टीम
  7. परेश पड्‌या पुरोहित एवं सलाहकार
Statue of Belief Nathdwara : राजस्थान में विराजमान विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा — 20 किमी दूर से होते हैं दर्शन

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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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