
Navratri Festival Rajsamand : राजसमन्द जिला मुख्यालय के समीप पिपलांत्री कला गांव में स्थित प्रसिद्ध चामुण्डा माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों का समापन गुरुवार को भव्य ज्वारा विसर्जन शोभायात्रा के साथ हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने मंदिर परिसर को मेले जैसी रौनक से भर दिया। आसपास के गांवों और ढाणियों से आए भक्तों ने मां चामुण्डा के प्रति अपनी अटूट आस्था का प्रदर्शन किया, जिससे समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक चामुण्डा माता मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। परंपरागत रूप से मां की सेवा, विशेष पूजा-अर्चना, और आकर्षक श्रृंगार के साथ-साथ प्रतिदिन माता की आरती का आयोजन हुआ। रात्रि के समय मंदिर प्रांगण में भक्ति भाव से ओतप्रोत डांडिया और गरबा नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्थानीय युवाओं और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन आयोजनों ने मंदिर परिसर को उत्सवी माहौल से जीवंत बना दिया। नवरात्रि के अंतिम चरण में रात्रि जागरण का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति भजनों की मधुर स्वरलहरियों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्थानीय कलाकारों ने मां भवानी को समर्पित भजनों की शानदार प्रस्तुतियां दीं, जो तड़के तक जारी रहीं। इस दौरान मां चामुण्डा के सरोवर झूलने की अनूठी परंपरा का भी निर्वहन किया गया। इस परंपरा के तहत पुजारी और भक्त समीपवर्ती कुएं पर जाकर गंगा मैया को न्योता देने की विधि पूर्ण करते हैं, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ज्वारा विसर्जन शोभायात्रा: भक्ति का भव्य प्रदर्शन
Piplantri Chamunda Mata Temple Navratri 2025 जय चामुण्डा माता मंदिर कमेटी के अध्यक्ष शम्भू सिंह आरणा ने बताया कि नवरात्रि महोत्सव के समापन के दिन गुरुवार को सुबह से ही पिपलांत्री कला सहित आसपास के गांवों और ढाणियों से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। मंदिर प्रांगण में सर्व समाज के भक्तों का जमावड़ा देखते ही बनता था। मंदिर क्षेत्र में मेले जैसा उत्साहपूर्ण माहौल बन गया, जहां भक्तों की भीड़ और उत्सव की तैयारियां देखने लायक थीं।
माता की महाआरती के बाद, पुजारी शांतिलाल सुथार, कालूसिंह सेंदरों की भागल, प्रकाश श्रीमाली, भंवरसिंह कड़ेचा, रामसिंह आरणा, किशनसिंह, धूलसिंह आरणा, भरत सेन बेड़ा रहट, उदयलाल सालवी, प्रकाश सालवी, किशनसिंह आरणा, प्रेम श्रीमाली, कमलेश श्रीमाली, धनसिंह मेणाव, कन्हैया लाल श्रीमाली, देवीसिंह आरणा, नाथूसिंह आरणा, राजूसिंह, सज्जनसिंह बेड़ारहट, उदयसिंह कड़ेचा, उदयसिंह मेणाव, किशनसिंह मेणाव, जगदीश प्रजापत, खुमाणसिंह, महेन्द्रसिंह तलाई, रूपसिंह, धर्मेन्द्रसिंह, यशवंत सिंह आरणा, और पुजारी मनोज सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में ज्वारा विसर्जन की शोभायात्रा भव्य रूप से शुरू हुई।
शोभायात्रा की रौनक: ढोल-नगाड़ों और भजनों की गूंज
Dandiya Garba Navratri Rajsamand शोभायात्रा ढोल-नगाड़ों की थाप और गगनभेदी जयकारों के साथ निकली। शोभायात्रा में आगे-आगे कन्याएं अपने सिर पर पवित्र कलश लिए चल रही थीं, जबकि पुजारी ज्वारा को धारण किए हुए थे। डीजे पर मां चामुण्डा को समर्पित भजनों जैसे “थाने हेला पे हेलो देऊं म्हारी मां…”, “माता म्हारी सरवर झूलण जाय…”, और “जग जननी जगदम्बा मात भवानी…” की मधुर धुनें गूंज रही थीं। इन भजनों ने शोभायात्रा के उत्साह को और बढ़ा दिया। मार्ग में भक्त नृत्य करते हुए और माता के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे, जिससे समूचा परिवेश भक्ति और आनंद से सराबोर हो गया।

समापन: महाप्रसाद और आशीर्वाद का दौर
ज्वारा विसर्जन के बाद सभी श्रद्धालु पुनः मंदिर लौटे, जहां मां चामुण्डा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया। मंदिर में माता की अंतिम आरती हुई, जिसके बाद महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस प्रसाद में क्षेत्रभर से आए हजारों भक्तों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में हरीश श्रीमाली, मोहन लाल श्रीमाली, कुंदन मल मेहता, कन्हैया लाल मेहता, जगदीश प्रजापत, मोहन लाल मेहता, ओमप्रकाश मेहता, मोहन लाल सालवी, केशुलाल सालवी, रोशन लाल सालवी, चतरसिंह, तख्तसिंह बेड़ारहट, सुरेशसिंह, खुमाणसिंह सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित थे।
मंदिर कमेटी का आभार
मंदिर कमेटी अध्यक्ष शम्भू सिंह आरणा ने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी क्षेत्रवासियों, भक्तों, और सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को भी मजबूत करता है।



