
Potato Onion price : राजस्थान की सबसे बड़ी सब्जी मंडी – जयपुर की मुहाना मंडी – इन दिनों एक अजीब सी उदासी में डूबी हुई है। चारों तरफ आलू और प्याज के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं, लेकिन खरीदार न के बराबर। सप्लाई इतनी जबरदस्त हो गई है कि दाम टूटकर बिखर गए हैं। जो किसान और व्यापारी कुछ महीने पहले कोल्ड स्टोरेज से माल निकालकर मोटा मुनाफा कमाने का सपना देख रहे थे, आज वही लोग हाथ मलते नजर आ रहे हैं।
दाम कहाँ पहुँच गए?
- Onion price drop in Rajasthan पुराना आलू: ₹6 से ₹9 प्रति किलो
- नया आलू: ₹10 से ₹15 प्रति किलो
- पुराना प्याज: ₹8 से ₹12 प्रति किलो (जबकि इस सीजन में नॉर्मली ₹25-30 तक रहता था)
- नया प्याज: क्वालिटी खराब होने की वजह से और भी कम भाव
ये दाम सुनकर कोई भी किसान सिर पकड़ लेगा, क्योंकि स्टोरेज, किराया, भाड़ा और खेती की लागत मिलाकर एक किलो आलू पर कम से कम ₹12-16 तक खर्च आ चुका है। अब ₹6-8 में बिक रहा है तो नुकसान का आंकड़ा लाखों में पहुँच रहा है।

रोजाना कितना माल आ रहा है?
Muhana Mandi potato onion rates मुहाना मंडी में हर दिन:
- कुल आलू: 300-360 ट्रक
→ पुराना आलू: 100-110 गाड़ियाँ (मथुरा, आगरा, किरावली सिरसागंज, इटावा, शमशाबाद, राया, इगलास आदि से)
→ नया आलू: 10-15 गाड़ियाँ (जालंधर, अमृतसर, ऊना-हिमाचल से) – यानी 200-250 टन रोज - प्याज: 400-500 टन प्रतिदिन
→ पुराना प्याज: 300-400 टन (झालावाड़-राजस्थान और मध्य प्रदेश से)
→ नया प्याज: करीब 100 टन (अलवर क्षेत्र से)
आखिर दाम क्यों गिरे इतनी बुरी तरह?
- Potato wholesale rate Jaipur नई फसल का बंपर प्रोडक्शन – नए आलू-प्याज की डिमांड ज्यादा है, पुराना स्टॉक कोई पूछ ही नहीं रहा।
- एक्सपोर्ट ठप – बांग्लादेश को प्याज का निर्यात लगभग बंद होने से सारा माल देश के अंदर ही डंप हो रहा है।
- क्वालिटी इश्यू – बारिश की वजह से नई प्याज की क्वालिटी बेहद खराब है, जल्दी सड़ने लगती है। पुराना आलू भी अंकुरित होने की कगार पर है।
- कोल्ड स्टोरेज का दबाव – नवंबर अंत तक सारा पुराना स्टॉक बाहर निकालना जरूरी है, वरना कूलिंग बंद हो जाएगी और आलू-प्याज खराब।
किसानों-व्यापारियों की जुबानी
Onion wholesale price Rajasthan : मथुरा से आए किसान फूल सिंह 600 बोरी पुराना आलू लेकर पहुंचे। मायूस लहजे में बोले, “कोल्ड स्टोरेज में ₹3 किलो किराया, ₹1 किलो भाड़ा, खेती का खर्च अलग – कुल ₹14-15 किलो पड़ा था। आज ₹6-7 में बिक रहा है। न बेचें तो सड़ जाएगा, फेंकें तो उसका भी खर्च। क्या करें?”
आगरा के रामहरि पंडित ने हाथ जोड़ते हुए कहा, “उत्पादन में ही ₹8 किलो लगा था। ऊपर से ट्रांसपोर्ट, मंडी का किराया। 6 रुपए किलो मिल रहा है। 4-5 दिन में नहीं बिका तो ट्रक में लादकर कचरे में फेंकना पड़ेगा।”
मुहाना आलू आढ़तिया संघ के सचिव महेंद्र मूलचंदानी ने बताया, “हमने तो नई आलू की कई गाड़ियां बाहर ही रोक रखी हैं। पहले पुराना स्टॉक क्लियर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खरीदार ही नहीं हैं। अंकुरित आलू कोई नहीं लेता। मजबूरी में फेंकना पड़ेगा।”
आढ़तिया आनंद शर्मा ने आगाह किया, “अगर यही हाल रहा तो सिर्फ 2-5 दिन में हजारों टन पुराना आलू और प्याज मंडी के बाहर कचरे के ढेर में दिखेगा।”
प्याज की स्थिति और भी खराब
संघ के संरक्षक दयानंद देवनानी ने बताया, “बांग्लादेश को एक्सपोर्ट बंद होने से सारा स्टॉक यहीं पड़ा है। नई प्याज बारिश में खराब हो गई है, स्टोर भी नहीं हो पा रही। दाम ₹8-12 तक गिर गए हैं। कुछ दिन और ऐसे ही चला तो प्याज भी फेंकने की नौबत आएगी।”
