
Rajasthan Farmers Land Route Scheme : राजस्थान सरकार ने किसानों की वर्षों पुरानी और सबसे बड़ी समस्याओं में शामिल खेत तक पहुंच मार्ग के विवाद को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब जिन किसानों की कृषि भूमि तक सीधा रास्ता नहीं है या जो दूसरे किसानों के खेतों से होकर गुजरने को मजबूर हैं, उन्हें सरकार की ओर से राजकीय भूमि की संकरी पट्टी आवंटित कर रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार के इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से खेत तक पहुंच मार्ग नहीं होने के कारण किसान खेती-बाड़ी, सिंचाई और कृषि यंत्रों के उपयोग में परेशानियों का सामना कर रहे थे। कई मामलों में रास्ते को लेकर विवाद, झगड़े और मुकदमेबाजी तक की नौबत आ जाती थी। अब राज्य सरकार के इस आदेश से ऐसे विवादों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।राजस्थान के कई ग्रामीण इलाकों में ऐसे हजारों किसान हैं, जिनकी जमीन तक पहुंचने के लिए कोई सीधा सार्वजनिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। ऐसे किसान अक्सर पड़ोसी खेत मालिकों की अनुमति पर निर्भर रहते हैं या अस्थायी रास्तों का उपयोग करते हैं। कई बार रास्ता बंद होने से किसान अपनी ही जमीन तक ट्रैक्टर, खेती के उपकरण या सिंचाई संसाधन नहीं पहुंचा पाते। इससे खेती का काम प्रभावित होता है और फसल उत्पादन पर भी असर पड़ता है।
बजट घोषणा 2026-27 के तहत लिया गया फैसला
Rajasthan Government Farmers Relief : राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय बजट वर्ष 2026-27 की घोषणा के बिंदु संख्या 292 के तहत लिया है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी किसान केवल रास्ते की कमी के कारण अपनी कृषि भूमि के उपयोग से वंचित न रहे। राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कई जगहों पर राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज होने के बावजूद जमीन पर वास्तविक पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं है। कहीं राजकीय भूमि की संकरी पट्टी बीच में आ जाती है, तो कहीं अन्य भौतिक बाधाएं किसानों के लिए परेशानी बन जाती हैं। अब ऐसी परिस्थितियों में सरकार नियमानुसार राजकीय भूमि की पट्टी आवंटित कर खेत तक पहुंच मार्ग उपलब्ध कराएगी।

किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ?
CM Bhajanlal Farmer Scheme : सरकार ने इस व्यवस्था के लिए कुछ स्पष्ट नियम और शर्तें भी तय की हैं। केवल उन्हीं मामलों में यह सुविधा दी जाएगी, जहां:
- खातेदारी भूमि तक कोई सीधा सरकारी रास्ता उपलब्ध नहीं हो
- राजस्व रिकॉर्ड में रास्ता दर्ज हो, लेकिन व्यवहारिक रूप से पहुंच संभव न हो
- बीच में केवल राजकीय भूमि की संकरी पट्टी बाधा बन रही हो
- कोई वैकल्पिक व्यवहारिक मार्ग उपलब्ध न हो
इन शर्तों को पूरा करने वाले किसानों को नियमानुसार रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।
अधिकतम 20 फीट चौड़ा होगा रास्ता
Rajasthan Farmers Road Problem Solution : सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवंटित की जाने वाली राजकीय भूमि की चौड़ाई अधिकतम 20 फीट तक सीमित रहेगी। यह भूमि केवल खेत तक पहुंच मार्ग के उद्देश्य से दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे एक ओर किसानों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर राजकीय भूमि के दुरुपयोग और अतिक्रमण पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा।
खेती-बाड़ी के काम होंगे आसान
ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ता नहीं होने की वजह से किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी खेती के मौसम में होती थी। ट्रैक्टर, थ्रेशर, बीज, खाद और सिंचाई उपकरण खेत तक पहुंचाना कई बार मुश्किल हो जाता था। बरसात के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती थी। कई किसान मजबूरी में निजी खेतों से होकर गुजरते थे, जिससे विवाद पैदा होते थे। अब सरकार के इस फैसले से खेती-बाड़ी के कार्यों में आसानी आने की संभावना है।
विवाद और मुकदमेबाजी में आएगी कमी
Rajasthan Farmer News 2026 : ग्रामीण क्षेत्रों में खेत के रास्ते को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। कई गांवों में वर्षों से रास्ते के झगड़े चल रहे हैं। छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़कर पुलिस और कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू करती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रास्ते से जुड़े विवादों और तनाव में काफी कमी आ सकती है।
किसानों ने फैसले का किया स्वागत
राज्य सरकार के इस निर्णय का किसानों ने स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि यदि आदेश जमीन पर सही तरीके से लागू हुआ, तो हजारों किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। किसानों के अनुसार खेत तक सीधा रास्ता मिलने से खेती आसान होगी, समय की बचत होगी और कृषि लागत भी कम होगी। साथ ही गांवों में वर्षों से चल रहे रास्ते के झगड़ों का समाधान भी संभव हो सकेगा।
प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश
राजस्व विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों की जांच कर पात्र किसानों को नियमानुसार जल्द राहत दी जाए। सरकार चाहती है कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे और उन्हें अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।राज्य सरकार का मानना है कि यह फैसला ग्रामीण विकास और कृषि सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।



