
राजसमंद। Rajsamand census training 2026 : आगामी 1 मई से प्रारंभ होने वाली जनगणना (Census) एवं स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया के सफल संचालन को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार, राजसमंद में उपखंड एवं चार्ज अधिकारियों का रिफ्रेशर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य जनगणना कार्य को व्यवस्थित, त्रुटिरहित और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए अधिकारियों को नवीन दिशा-निर्देशों एवं तकनीकी प्रक्रियाओं से अवगत कराना रहा।
प्रशिक्षण शिविर में जिले के सभी उपखंड अधिकारी (SDM), तहसीलदार, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी तथा जनगणना कार्य से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को आगामी जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया, जिम्मेदारियों और समयबद्ध कार्य निष्पादन को लेकर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण सत्र में जनगणना निदेशालय से आए विशेषज्ञ डॉ. पुलकित शर्मा ने अधिकारियों को जनगणना की संपूर्ण प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनगणना केवल जनसंख्या की गणना भर नहीं, बल्कि यह देश और राज्य की विकास योजनाओं, संसाधन प्रबंधन, नीति निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्था की आधारशिला है।उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जनगणना के दौरान उपयोग में आने वाले विभिन्न प्रपत्र (Forms), डेटा संग्रहण की प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटल एंट्री सिस्टम और रिपोर्टिंग मैकेनिज्म को सही तरीके से समझना बेहद जरूरी है।
Self Enumeration पर विशेष फोकस
Rajsamand self enumeration training : इस बार नागरिकों को अधिक सुविधा देने के लिए Self Enumeration व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत लोग स्वयं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। प्रशिक्षण में अधिकारियों को ऑनलाइन पोर्टल, डिजिटल डेटा अपलोडिंग, लॉगिन प्रक्रिया, वेरिफिकेशन सिस्टम और तकनीकी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि Self Enumeration से समय की बचत होगी, डेटा एंट्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों की भागीदारी भी अधिक होगी।

फील्ड लेवल चुनौतियों पर हुई चर्चा
Census 2026 Rajasthan training : प्रशिक्षण के दौरान फील्ड स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डेटा संग्रहण के दौरान कई प्रकार की व्यवहारिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जैसे—सूचना की शुद्धता, रिकॉर्ड सत्यापन, तकनीकी बाधाएं और जनसहयोग की कमी। इन सभी समस्याओं से निपटने के लिए समन्वय, पर्यवेक्षण और समय पर रिपोर्टिंग को महत्वपूर्ण बताया गया।
जनजागरूकता अभियान भी चलेगा
Rajsamand collectorate census workshop : प्रशिक्षण शिविर में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जनगणना एवं स्व-गणना के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर व्यापक Awareness Campaign, प्रचार-प्रसार, सूचना सामग्री वितरण और डिजिटल माध्यमों से नागरिकों तक जानकारी पहुंचाने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को Self Enumeration की प्रक्रिया समझाएं ताकि अधिकतम नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
अधिकारियों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए समाधान
Rajasthan self census news : प्रशिक्षण कार्यक्रम को केवल औपचारिक न रखते हुए इसे संवादात्मक और व्यवहारिक बनाया गया। इस दौरान उपस्थित उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों और अधिशासी अधिकारियों ने जनगणना से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए अधिकारियों को प्रक्रियात्मक सावधानियों, रिपोर्टिंग सिस्टम, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और कार्य निष्पादन के दौरान अपनाई जाने वाली Best Practices के बारे में जानकारी दी।

विकास योजनाओं की आधारशिला है जनगणना
शिविर में वक्ताओं ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं है, बल्कि यह सरकार की भविष्य की योजनाओं, बजट निर्धारण, संसाधनों के वितरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी और अन्य विकास परियोजनाओं की नींव है। ऐसे में प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य को गंभीरता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ संपन्न कराए।
प्रशिक्षण से मिलेगी कार्य में गति
रिफ्रेशर प्रशिक्षण के माध्यम से अधिकारियों को जनगणना एवं स्व-गणना की अद्यतन प्रक्रिया से दोबारा अवगत कराया गया, जिससे आगामी कार्यवाही को और अधिक गति मिलेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि इस प्रशिक्षण के बाद जिले में 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना प्रक्रिया सुचारू, प्रभावी और व्यवस्थित रूप से संपन्न होगी।



