
राजसमंद। Saket Sahitya Sansthan Rajsamand साकेत साहित्य संस्थान एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजसमंद के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार ‘सायं 4:30 बजे शाम जिला मुख्यालय स्थित सूचना केंद्र में अप्रैल माह 2026 की मासिक काव्य गोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘आनंदमठ एवं वंदेमातरम्’ रहा, जिसने उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों में राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत किया।
कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम्’ की साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने बताया कि महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का प्रतीक है। साकेत साहित्य संस्थान द्वारा प्रतिमाह आयोजित होने वाली इस साहित्यिक संगोष्ठी में जिले के कई कवि, शिक्षक, साहित्यकार और शिक्षाविद शामिल हुए। कार्यक्रम में विद्वत परिषद के सदस्यों की भी सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला सूचना अधिकारी प्रवेश परदेशी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. नरेंद्र नारलाई ‘निर्मल’, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ अध्यक्ष सतीश आचार्य, संस्थान उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव, एडवोकेट ललित साहू तथा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा के प्रधानाचार्य राजेश गोराना मौजूद रहे।
दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ शुभारंभ
Rajsamand poetry event 2026 : कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद संस्थान के कोषाध्यक्ष राधेश्याम राणा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान संस्थान अध्यक्ष वीणा वैष्णव की अध्यक्षता में किया गया। संस्थान अध्यक्ष ने परिचर्चा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए सभी शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों को संकल्प दिलाया कि वे अपने-अपने संस्थानों में विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम्’ का महत्व समझाएंगे और उसके भावार्थ से भी परिचित कराएंगे। इसके पश्चात शिक्षक राजेश गोराना ने अपनी मधुर आवाज में संपूर्ण राष्ट्रगीत प्रस्तुत कर वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
कवियों ने प्रस्तुत की ओजपूर्ण रचनाएं
Vande Mataram seminar Rajsamand : काव्य पाठ सत्र में राष्ट्रीय कवि सतीश आचार्य ने “वंदे मातरम् जन्मभूमि की आराधना है” शीर्षक रचना प्रस्तुत की। संस्थान जिला मीडिया प्रभारी अन्नू राठौड़ ‘रुद्रांजली’ ने अपने विशिष्ट अंदाज में वंदेमातरम् का गुणगान किया। वहीं लेखराज मीणा ने “वंदे मातरम्, एक आनंद है” तथा संस्थान सहसचिव कुमार दिनेश ने “राष्ट्र की जनचेतना का गान वंदेमातरम्” शीर्षक रचना सुनाई। कोषाध्यक्ष राधेश्याम राणा ने “पंछीडा लाल” और सह गोष्ठी प्रभारी डॉ. सम्पत रेगर ने “फिर से मुस्कुराने लगा हूं” रचना प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी।

‘आनंदमठ’ और ‘वंदेमातरम्’ पर डाला प्रकाश
Anandamath discussion Rajsamand : गोष्ठी प्रभारी चंद्रशेखर नारलाई ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ और उसमें वर्णित राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम्’ के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि ‘वंदेमातरम्’ केवल गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति समर्पण, राष्ट्र गौरव और सांस्कृतिक चेतना का मंत्र है।
अनेक गणमान्य साहित्यकार रहे उपस्थित
Rajsamand literary program : इस अवसर पर वीणा वैष्णव, राजेश गोराना, डॉ. नरेंद्र निर्मल, नारायण सिंह राव, अन्नू राठौड़ ‘रुद्रांजली’, राजेंद्र सिंह चारण, राधेश्याम राणा, कुमार दिनेश, चंद्रशेखर नारलाई, डॉ. सम्पत लाल रेगर, सुजीत कुमार त्रिपाठी, घनश्याम खत्री, गीतांजली पालीवाल, राजेश पाल, लेखराज मीणा, विनोद आचार्य, छगनलाल प्रजापत, सतीश आचार्य एवं लक्ष्मी नारायण पालीवाल सहित कई प्रतिष्ठित रचनाकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने की बात कही।



