
Rajsamand Nagar Parishad : राजसमंद नगर परिषद में 11 साल पुराने पेयजल टैंकर आपूर्ति भुगतान मामले में शुक्रवार को कोर्ट के आदेश पर चल संपत्ति सीज करने की कार्रवाई की नौबत आ गई। वर्ष 2011 में पेयजल संकट के दौरान टैंकरों से कराई गई जलापूर्ति का 9 लाख 48 हजार 855 रुपए का भुगतान अटक गया था। ब्याज सहित यह राशि अब करीब 12 लाख 36 हजार रुपए हो गई है। भुगतान के लिए ठेकेदार को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
राजसमंद अपर जिला न्यायाधीश सुनील कुमार ओझा (आरजेएस) की अदालत ने ठेकेदार बद्रीलाल भोई के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नगर परिषद राजसमंद को मूल बकाया राशि 9 लाख 48 हजार 855 रुपए अदा करने के आदेश दिए। साथ ही 29 अगस्त 2022 से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 59 हजार 313 रुपए कोर्ट फीस देने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश की पालना में शुक्रवार सुबह करीब 12 बजे जिला एवं सेशन न्यायालय के सेल अमीन राधेश्याम गाडरी, प्रोसेस सर्वर हेमशंकर गमेती और अधिवक्ता गोपाल आचार्य सहित अन्य कर्मचारी नगर परिषद पहुंचे। टीम नगर परिषद आयुक्त विजेश मंत्री के पास पहुंची और चल संपत्ति सीज करने की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी की। कोर्ट कर्मचारी आयुक्त की सरकारी कार सीज करना चाहते थे, लेकिन आयुक्त अपनी कार लेकर नगर परिषद से निकल गए। इसके बाद सेल अमीन और कोर्ट कर्मचारी भुगतान का आश्वासन मिलने पर आयुक्त चैंबर में बैठे रहे। आयुक्त शाम करीब 4 बजे नगर परिषद लौटे। इसके बाद उन्होंने सरकारी कार को कहीं छिपा कर रख दिया। आयुक्त ने सेल अमीन को लिखित प्रार्थना पत्र देकर भुगतान के लिए पांच दिन का समय मांगा। अब नगर परिषद को 12 अगस्त तक करीब 12.36 लाख रुपए का भुगतान करना होगा। यदि भुगतान नहीं किया गया तो 13 अगस्त को फिर से चल संपत्ति सीज करने की कार्रवाई की जाएगी।
2011 के टैंकर भुगतान विवाद में ठेकेदार के पक्ष में फैसला
Rajsamand court order मामला वर्ष 2011 का है। पेयजल संकट के दौरान नगर परिषद ने 29 मार्च 2011 को टैंकर जलापूर्ति की निविदा जारी की थी। राजनगर निवासी ठेकेदार बद्रीलाल पुत्र दौलतराम भोई माली को 26 अप्रैल से 25 अगस्त 2011 तक 255 रुपए प्रति टैंकर की दर से जलापूर्ति का कार्य दिया गया। उसने 3,721 टैंकरों से पानी पहुंचाया, लेकिन नगर परिषद ने केवल 1,685 टैंकरों का 4.29 लाख रुपए भुगतान किया और 9.48 लाख रुपए रोक दिए। ठेकेदार ने कई बार भुगतान मांगा। 23 जून 2014 को नगर परिषद की साधारण सभा में भुगतान का प्रस्ताव भी पारित हुआ, लेकिन राशि नहीं मिली। बाद में 13 अगस्त 2022 को नगर परिषद ने मामला समयबाधित बताते हुए भुगतान से इनकार कर दिया। इसके बाद ठेकेदार ने प्रकरण दायर किया, नगर परिषद राजसमंद और राजस्थान सरकार को प्रतिवादी बनाया। ठेकेदार की ओर से अधिवक्ता गोपाल आचार्य और नगर परिषद की ओर से अधिवक्ता कैलाश बोल्या ने पैरवी की। अदालत ने नगर परिषद की समयबाधित होने की दलील खारिज करते हुए कहा कि कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने एमबी में कार्य सत्यापित कर बिल प्रमाणित किया था तथा साधारण सभा भी भुगतान के पक्ष में निर्णय ले चुकी थी। इसलिए वाद समयबाधित नहीं माना गया।

18 मार्च को फैसला, 90 दिन में भुगतान करने के आदेश दिए थे
पीड़ित बद्रीलाल भोई के पक्ष में 18 मार्च 2026 को न्यायालय ने नगर परिषद को 90 दिन के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए थे। लेकिन तय समय सीमा पूरी होने के बाद भी नगर परिषद ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद पीड़ित ने न्यायालय में भुगतान नहीं मिलने की अपील प्रस्तुत की। इस पर न्यायालय ने 29 जुलाई को नगर परिषद से वसूली की कार्रवाई के आदेश जारी किए। वसूली प्रक्रिया के तहत नगर परिषद की चल संपत्ति सीज करने की कार्रवाई की जानी थी। इसी दौरान नगर परिषद ने भी डाक के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील दायर की।
काफी पुराना मामला था। मेरे संज्ञान में कुछ समय पहले ही आया था। इस आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील कर रखी है। कोर्ट ने सीज करने के आदेश दिए ‘भुगतान के लिए पांच दिन का समय मांगा है। कोर्ट के आदेशों की पालना की जाएगी।
– विजेश मंत्री, आयुक्त, नगर परिषद राजसमंद



