
Rajsamand tribal welfare scheme : राजसमंद जिले में जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर “धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान – सबसे दूर, सबसे पहले” के तहत विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से जिले के 73 जनजातीय गांवों में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इसी अभियान को लेकर गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा ने अभियान की रूपरेखा, उद्देश्यों और गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी।जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज और पिछड़े जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी आदिवासी परिवार योजनाओं से वंचित न रहे और लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत विभिन्न विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं, ताकि हर पात्र व्यक्ति तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।
11 प्रमुख क्षेत्रों पर किया जा रहा काम
Dharati Aaba Janjati Gram Utkarsh Abhiyan : कलक्टर ने बताया कि अभियान के तहत कुल 11 प्रमुख उद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्य किया जा रहा है। इनमें कौशल विकास, रोजगार, शुद्ध पेयजल, शत-प्रतिशत विद्युत सुविधा, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। प्रशासन की कोशिश है कि जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराया जाए।

गांव-गांव नियुक्त किए गए ‘आदि कर्मयोगी’
Government schemes for tribal villages : अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक चयनित गांव में ‘आदि कर्मयोगियों’ की नियुक्ति की गई है। ये कर्मयोगी गांव स्तर पर लोगों से संपर्क स्थापित कर योजनाओं की जानकारी देने और पात्र लोगों को लाभ दिलाने का कार्य कर रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा पूरे अभियान की लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है, ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सके और किसी स्तर पर लापरवाही न रहे।
केवल औपचारिकता नहीं, सामाजिक बदलाव का अभियान
Janjati Gram Utkarsh campaign : कलक्टर हसीजा ने कहा कि यह अभियान सिर्फ सरकारी औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे जनसंपर्क, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सेवा संतृप्ति और आजीविका सशक्तिकरण से जोड़कर संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाकर वास्तविक सामाजिक परिवर्तन लाना है।
18 मई से शुरू हुआ अभियान सप्ताह
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा ने अभियान के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि 18 मई को अभियान सप्ताह की शुरुआत की गई थी। इस दौरान जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर के अधिकारियों का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित कर अभियान लॉन्च किया गया।
गांवों में चल रहे पात्रता और स्वास्थ्य शिविर
19 मई से 25 मई तक चयनित गांवों में सैचुरेशन अभियान, पौधरोपण कार्यक्रम, पात्रता शिविर और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों का चयन भी किया जा रहा है। 20 मई को अधिकारियों, आदि कर्मयोगियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों द्वारा गांवों में ट्रांजेक्ट वॉक आयोजित किए गए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया गया और लोगों को आगामी जनसुनवाई कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई।
21 से 23 मई तक जनसुनवाई कार्यक्रम
अभियान के तहत 21 मई से 23 मई तक विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें ग्रामीणों की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के साथ पात्रता संबंधी मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जा रहा है।
24 मई को तैयार होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
24 मई को अभियान के तहत डॉक्यूमेंटेशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसमें प्रूफ कार्ड, प्रोग्रेस रिपोर्ट, शिकायतों की स्थिति, निस्तारित मामलों, लंबित प्रकरणों और फॉलोअप संबंधी जानकारी को संकलित किया जाएगा।
अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
अधिकारियों ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना है। प्रशासन इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है ताकि जनजातीय क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।



