
Ranjeet Singh Rawat news : राजसमंद। भीम विधायक हरिसिंह रावत के पुत्र रणजीत सिंह रावत एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। ब्यावर जिले की एक महिला ने राजसमंद एसपी हेमंत कलाल को परिवाद सौंपकर रणजीत सिंह पर यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
Rajsamand BJP MLA son case : पीड़िता ने एसपी को ज्ञापन के साथ कुछ कथित साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। महिला का आरोप है कि रणजीत सिंह ने उसके जेवरात, नकदी और पति की मौत के बाद मिली बीमा राशि भी अपने कब्जे में ले ली। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी हेमंत कलाल ने भीम थाना पुलिस को पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जांच करने के निर्देश दिए हैं। महिला का कहना है कि वर्ष 2014 में उसकी मुलाकात रणजीत सिंह से हुई थी। उस समय आरोपी की पत्नी जेल में थी। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान परिवार के कुछ सदस्यों की ओर से विवाह का प्रस्ताव रखा गया। महिला के अनुसार, रणजीत सिंह ने शादी का भरोसा दिलाकर उसे अपने साथ रखा। पीड़िता का दावा है कि वर्ष 2014 से 2017 तक दोनों नंदावट स्थित मकान में लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। जब उसने विधिवत शादी करने की बात कही, तो आरोपी ने पहली पत्नी के लौटने के बाद तलाक दिलाने का आश्वासन दिया। आरोप है कि पहली पत्नी के वापस आने के बाद रणजीत सिंह ने दूरी बनानी शुरू कर दी। विरोध जताने पर उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। Harisingh Rawat son allegation

रणजीत सिंह का पक्ष
Bhim MLA son controversy : उधर, भाजपा नेता रणजीत सिंह रावत ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक द्वेषता के चलते रचा गया षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि वे इस महिला को जानते तक नहीं हैं और पुलिस जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
पहले भी विवादों में घिर चुका है नाम
woman harassment case Rajasthan : रणजीत सिंह रावत का नाम इससे पहले भी विवादों में सामने आ चुका है। इसी वर्ष 8 मार्च की रात भीम उपखंड क्षेत्र के बरतु इलाके में जेसीबी मशीन से तीन गरीब परिवारों के पक्के मकान ढहाने का मामला सामने आया था। इस मामले में 20 मार्च को नर्बदा देवी, गीता देवी और रघुवीर सिंह ने नंदावट निवासी रणजीत सिंह रावत के खिलाफ भीम थाने में केस दर्ज कराया था। घटना के बाद पीड़ित परिवार की महिलाओं ने जिला पुलिस अधीक्षक से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। साथ ही आरोप लगाया था कि विधायक का बेटा पहले से ही मकान खाली कराने और जमीन बेचने के लिए दबाव बना रहा था। इस संबंध में वर्ष 2016 में भी भीम थाने में शिकायत दी गई थी, लेकिन कथित राजनीतिक प्रभाव के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।



