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Shrinathji Jyeshtha Abhishek Snan : श्रीनाथजी का ज्येष्ठाभिषेक स्नान, लाखों आम का दिव्य भोग, अनोखे दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालु

Laxman Singh Rathor June 11, 2025 1 minute read

Shrinathji Jyeshtha Abhishek Snan : राजस्थान में राजसमंद जिले का नाथद्वारा शहर एक बार फिर श्रीनाथजी की अलौकिक भक्ति और भव्य आयोजन से गूंज उठा। पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर इस बार स्नान यात्रा के पावन अवसर पर श्रीजी प्रभु का महा ज्येष्ठाभिषेक स्नान अत्यंत श्रद्धा व भक्ति भाव से संपन्न हुआ। स्नान दर्शन सालभर में सिर्फ 2 बार ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और ज्येष्ठ नक्षत्र में ही होते हैं और मान्यता है कि नसीब वाले श्रद्धालु ही यह अनोखे दर्शन कर पाते हैं। इसके चलते देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु नाथद्वारा पहुंचे, जिससे शहर की होटल, धर्मशालाएं भी हाउसफुल हो गई। साथ ही स्नान दर्शन बाद श्री कृष्ण के बाल स्वरूप के भाव से ऋतुफल के रूप में सवा लाख आम का भोग धराने की वर्षों पुरानी परंपरा है, लेकिन वैष्णवों की अपार श्रद्धा व भक्ति के चलते सवा लाख की जगह ढाई लाख से ज्यादा आम का दिव्य भोग श्रीनाथजी को धराया गया। ऐसे में श्रद्धालु कृष्ण प्रेम में सराबोर दिखे और नाथद्वारा शहर का माहौल भी ब्रज सा बन गया।

तिलकायत परिवार ने कराया श्रीजी को दिव्य स्नान

Nathdwara Shrinathji mango bhog : ज्येष्ठ नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में तिलकायत राकेश महाराज एवं उनके पुत्र विशाल बावा ने पारंपरिक विधि से श्रीनाथजी को अद्भुत जल स्नान कराया। इस महा स्नान के लिए केसर, चंदन, गुलाब जल, सुगंधित पुष्प बरास, तुलसी पत्र आदि से अधिवासित जल का उपयोग किया। शंख से जल छिड़काव के माध्यम से स्नान की विधि पूर्ण की गई, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस से भर उठा। स्नान के दौरान वेदपाठी ब्राह्मणों ने वेदों में वर्णित पुरुष सूक्त का उच्चारण कर दिव्यता को और अधिक तीव्र कर दिया। इसके बाद श्रीनाथजी को अलौकिक और अनुपम शृंगार धराया गया। दिव्य आभूषण और पारंपरिक वेशभूषा से सजकर श्रीजी ने भक्तों को अपने साक्षात दर्शन का दुर्लभ सुख प्रदान किया। यह सारी परम्परा का निर्वहन अर्द्ध रात के बाद मंदिर में शुरू हो गई और उसके बाद बुधवार तड़के करीब चार बजे दर्शन खुल गए। इस तरह मंदिर रातभर जागरण का माहौल बना रहा। तिलकायत परिवार के साथ मंदिर से जुड़े तमाम सेवादार व कार्मिक भी रतजगे में शामिल हुए। साथ ही स्थानीय और बाहर आए श्रद्धालु भी स्नान दर्शन को लेकर उत्सुक दिखाई दिए।

सवा लाख की जगह ढाई लाख से ज्यादा आम का भोग

Shrinathji temple Jyeshtha Snan darshan : ज्येष्ठाभिषेक के बाद श्रीनाथजी को सवा लाख आम का भोग की परम्परा रही है, मगर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के चलते श्रद्धालु ऑटो, टेम्पो, ट्रेक्टर व ट्रक भर भरकर आम लेकर श्रीनाथजी मंदिर पहुंचे। यह भोग सिर्फ फलाहार नहीं, बल्कि समस्त पुष्टिमार्गीय परंपरा का प्रतीक बन गया। गोस्वामी परिवार के विशाल बावा ने बताया कि श्रीनाथजी को निकुंज नायक एवं पुष्टि सृष्टि के राजाधिराज के रूप में राज्याभिषेक के भाव से यह स्नान कराया जाता है। साथ ही बृजराज कुमार की भावना से ठंडे जल से स्नान कराना भी पुष्टिमार्गीय परंपरा का एक अद्भुत भाग है। साथ ही इस उत्सव में एक और सख्य भाव है। जिस प्रकार बृज की गोपियां जल क्रीड़ा करते हुए अपने सखा श्रीकृष्ण को जल से स्नान कराती थीं, उसी भाव से श्रीनाथजी को जल छिड़क कर स्नान कराया जाता है। शंख से किया गया यह छिड़काव केवल जल की बूंदें नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पुष्टि सृष्टि के लिए शीतलता और आनंद का स्रोत बन जाता है। श्रीनाथजी को आम का भोग धराने के बाद श्रद्धालुओं में आम वितरित किए गए। मंदिर के प्रत्येक द्वार पर आम का प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद को प्रेमपूर्वक ग्रहण किया और इसे भगवान का विशेष कृपा प्रसाद माना। हर गली-नुक्कड़, हर दुकान तक आम का रसीला प्रसाद पहुंचा और श्रीनाथजी के दश्रन किए।

यह भव्य मनोरथ न केवल एक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि भक्तों के हृदय में श्रीनाथजी के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का भाव चरितार्थ हो गया। ज्येष्ठाभिषेक स्नान और आम का दिव्य भोग इस बात का प्रतीक है कि श्रीनाथजी सिर्फ हमारे आराध्य नहीं, बल्कि हमारे सखा, नायक और जीवन के आधार भी है।

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108 सोने कलश भरकर लाए जल

Shrinathji temple mango festival 2025 : श्रीनाथजी मंदिर में ज्येष्ठाभिषेक के लिए मंगलवार को ही तिलकायत राकेश महाराज, उनके पुत्र विशाल बावा सहित परिवार के सभी सदस्य भीतरली बावड़ी पर पानी लेने गए। 108 सोने के कलश भरकर पानी लाए और उसके बाद श्रीनाथजी का जलाभिषेक कराया गया। इस तरह केसर- कस्तूरी मिश्रित जल से ज्येष्ठाभिषेक कराया गया। ग्वाल भोग के बाद श्रीनाथजी मंदिर के दक्षिणी भाग में मोतीमहल के नीचे बनी भीतरली बावड़ी से जल लाए। जल में केसर, कस्तूरी, बरास, और गुलाबजल मिलाकर सिद्ध करते हुए अभिषेक के लिए जल को पवित्र किया गया। यह सब देखि वैष्णवजन के मन में प्रभु के प्रति भक्ति और गहरी हो गई।

खेवा पद्धति से कराए दर्शन

Shrinathji temple darshan Nathdwara श्रीनाथजी मंदिर में ज्येष्ठाभिषेक मनोरथ के तहत देशभर से हजारों श्रद्धालुओं के आने पर नाथद्वारा शहर जाम हो गया और मंदिर में खेवा पद्धति से दर्शन चालू किए गए। नाथद्वारा शहर में मंदिर मार्ग, चौपाटी, माणक चौक, नया बाजार में सड़क किनारे लगे स्टालों व दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। श्रीनाथजी मंदिर मंडल की करीब 50 धर्मशालाएं व काॅटेज, नगर की 100 निजी होटलों के 2 हजार कमरे फुल रहे।

ज्येष्ठाभिषेक स्नान की ऐतिहासिक परंपरा

– पुष्टिमार्ग संप्रदाय की प्रधान पीठ के श्रीनाथजी की सेवा बाल भाव से की गई। श्रीनाथजी ने 7 साल दो माह की उम्र में गोवर्धन पर्वत उठाया था, उसी बाल स्वरूप की श्रीनाथजी की सेवा परम्परा है।

500 साल पुरानी है श्रीनाथजी के ज्येष्ठाभिषेक स्नान की परम्परा

7 वर्ष के बालक के स्नान भाव से श्रीनाथजी के विग्रह को कराते हैं स्नान

1 वर्ष में सिर्फ 2 बार ही होते हैं श्रीनाथजी के स्नान दर्शन

1 लाख 25 हजार आम का भोग श्रीनाथजी को धराने की परम्परा

108 सोने के कलश गोस्वामी परिवार के सदस्य एक पहले ही ले आते हैं पानी

20 से ज्यादा पंडित अखंड मंत्रोच्चार से जल को करते हैं सिद्ध

2.5 लाख से ज्यादा आम एक सप्ताह में पहुंचे मंदिर

1 सप्ताह से तिलकायत राकेश महाराज व विशाल बावा, सेवक तैयारियों में जुटे

ज्येष्ठाभिषेक स्नान के पीछे 2 भाव

पहला भाव : नन्दबाबा अपने पुत्र श्रीकृष्ण को बाल उम्र में ही राजाधिराज की उपाधि देने के लिए ज्येष्ठ नक्षत्र में स्नान कराते हैं। उस बाल स्वरुप की उम्र 7 वर्ष होती है और तरह के बालक के रूप में श्रीनाथजी स्वरुप को स्नान कराया जाता है। फिर ऋतु फल को लेकर सवा लाख आम का भोग धराने की परम्परा है, जिसे आज भी निभाया जा रहा है। श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को आम का भोग लगाने के लिए आज देशभर से अज्ञात लोग ट्रक भरकर आम भेजते हैं, जिससे सवा लाख की बजाय इस बार ढाई लाख से ज्यादा आम पहुंच गए, जिन्हें भोग धराने के बाद आम श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

दूसरा भाव : श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को यमुना नदी में सखियां स्नान करती है। उसी भाव से श्रीनाथजी के बाल स्वरूप को ज्येष्ठाभिषेक के तहत जेष्ठ नक्षत्र में तिलकायत राकेश महाराज व उनके पुत्र विशाल बावा सहित गोस्वामी परिवार द्वारा स्नान कराने की परम्परा निभाई जा रही है। कहते हैं कि श्रीनाथजी के स्नान दर्शन तो नसीब वाले श्रद्धालु ही कर पाते हैं और इसीलिए वैष्णव इसी दर्शन को लेकर एक दिन पहले नाथद्वारा पहुंच जाते हैं, जिससे ज्यादातर होटल व धर्मशालाएं फुल हो जाती है।

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About the Author

Laxman Singh Rathor

Administrator

Laxman Singh Rathor को पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक का लंबा अनुभव है। 2005 में Dainik Bhakar से कॅरियर की शुरुआत कर बतौर Sub Editor कार्य किया। वर्ष 2012 से 2019 तक Rajasthan Patrika में Sub Editor, Crime Reporter और Patrika TV में Reporter के रूप में कार्य किया। डिजिटल मीडिया www.patrika.com पर भी 2 वर्ष कार्य किया। वर्ष 2020 से 2 वर्ष Zee News में राजसमंद जिला संवाददाता रहा। आज ETV Bharat और Jaivardhan News वेब पोर्टल में अपने अनुभव और ज्ञान से आमजन के दिल में बसे हैं। लक्ष्मण सिंह राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि खबरों की दुनिया में एक ब्रांड हैं। उनकी गहरी समझ, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, पाठक व दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें पत्रकारिता का चमकदार सितारा बना दिया है। jaivardhanpatrika@gmail.com

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