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Unique Holi tradition : इन गांवों में 150 साल से नहीं खेली होली, रंग डालना मानते हैं श्राप | Holi Festival 2026

Laxman Singh Rathor March 5, 2026 1 minute read

Unique Holi tradition : भारत में होली को Festival of Colors कहा जाता है। यह त्योहार खुशियों, रंगों और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। हर साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लोग गुलाल और रंगों के साथ इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं। Holi 2026 date in India के अनुसार इस बार रंगों वाली होली 4 मार्च को मनाई जा रही है, जबकि Holika Dahan 2026 2 मार्च को हुआ। 3 मार्च को पड़े lunar eclipse effect on Holi 2026 के कारण इस बार होलिका दहन और धुलेंडी के बीच दो दिन का अंतर देखने को मिला, लेकिन देश में कुछ ऐसे गांव भी हैं जहां सदियों से होली नहीं मनाई जाती। यहां के लोग मानते हैं कि अगर उन्होंने रंगों की होली खेली तो गांव पर विपत्ति आ सकती है। यही वजह है कि इन जगहों पर places where Holi not celebrated in India आज भी लोगों के लिए रहस्य और जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं।

Holi Festival 2026 : होली पर्व को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग परम्पराएं और मान्यताएं बनी हुई है। इसी के तहत कुछ गांव ऐसे है, जहां होली का पर्व अलग अलग तरीके से मनाया जाता है, लेकिन आज कुछ ऐसे गांव आपको बताने जा रहे हैं, जहां होली खेलना तो दूर की बात, रंग लगाना ही श्राप मानते हैं। इसी वजह से 150 से 200 साल हो गए, लेकिन चुनिंदा गांवों में लोग होली नहीं खेलते हैं और इसके पीछे भी अजीब मान्यता और परम्परा बनी हुई है, जिसे ग्रामवासी आज भी मानते हैं।

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में 150 साल से नहीं खेली गई होली

Villages Where Holi Is Banned : उत्तराखंड के Rudraprayag district villages Kurjhan and Kwili में पिछले करीब 150 वर्षों से Holi festival celebration नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि उनकी आराध्य देवी Tripura Sundari को शोर-शराबा और रंगों का हुड़दंग पसंद नहीं है। इस कारण ग्रामीण देवी के सम्मान में होली के दिन पूर्ण शांति बनाए रखते हैं। गांव के लोग मानते हैं कि अगर यहां रंगों से होली खेली गई तो देवी नाराज हो सकती हैं और गांव में अनिष्ट हो सकता है।

रुद्रप्रयाग धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। यहां Alaknanda Mandakini river confluence Rudraprayag स्थित है और पास ही प्रसिद्ध Koteshwar Mahadev cave temple Rudraprayag भी है। आस्था और परंपरा के कारण यहां आज भी होली का उत्सव नहीं मनाया जाता।

झारखंड का दुर्गापुर गांव: राजा के श्राप की कहानी

Holi Festival Interesting Facts : झारखंड के Bokaro district Kasmar block Durgapur village में भी होली नहीं खेली जाती। करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में पिछले 100 साल से अधिक समय से Holi celebration banned tradition के रूप में देखा जाता है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार करीब एक सदी पहले यहां के राजा के पुत्र की मृत्यु होली के दिन हो गई थी। इसके कुछ समय बाद स्वयं राजा का निधन भी उसी दिन हुआ।

Holi Festival Interesting Facts : मृत्यु से पहले राजा ने गांव वालों को आदेश दिया कि भविष्य में कोई भी होली नहीं मनाएगा। ग्रामीणों का विश्वास है कि अगर किसी ने इस परंपरा को तोड़ा तो गांव में bad luck, disease or sudden death जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इसी डर और आस्था के कारण गांव में आज भी होली का उत्सव नहीं मनाया जाता।

गुजरात के रामसन गांव में 200 साल से नहीं मनाई जाती होली

गुजरात के Banaskantha district Ramsan village Gujarat में भी लगभग 200 वर्षों से Holi festival celebration नहीं होता। इस गांव का प्राचीन नाम Rameshwar बताया जाता है और मान्यता है कि वनवास के दौरान Lord Ram visited this place during exile। लोककथाओं के अनुसार प्राचीन समय में एक अत्याचारी राजा के अत्याचारों से दुखी होकर संतों ने गांव को श्राप दे दिया था। तभी से गांव में बड़े उत्सव, खासकर होली, नहीं मनाई जाती।

स्थानीय लोग इस परंपरा को religious belief and village tradition से जोड़कर देखते हैं और आज भी इसे निभा रहे हैं।

तमिलनाडु में अलग संस्कृति

दक्षिण भारत के कई हिस्सों, खासकर Holi celebration in Tamil Nadu India, उत्तर भारत की तरह नहीं होते। जिस दिन उत्तर भारत में होली मनाई जाती है, उसी समय यहां Masi Magam festival Tamil Nadu मनाया जाता है।

इस दिन पितरों की आत्माओं के पृथ्वी पर आने की मान्यता है। लोग नदियों और समुद्र में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी कारण यहां color festival Holi in South India सीमित रूप में देखने को मिलता है।

भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनोखा उदाहरण

होली को आमतौर पर festival of colors and happiness कहा जाता है। लेकिन भारत की सांस्कृतिक विविधता इतनी व्यापक है कि हर क्षेत्र की अपनी अलग मान्यताएं और परंपराएं हैं। जहां पूरे देश में लोग रंगों में सराबोर होते हैं, वहीं इन गांवों में श्रद्धा, आस्था और परंपरा को ज्यादा महत्व दिया जाता है।

यही वजह है कि unique Holi traditions in India, villages where Holi not celebrated, strange Holi traditions India जैसे विषय हर साल इंटरनेट और Google Discover trending stories में चर्चा का विषय बन जाते हैं। भारत की यही विविधता और परंपराएं इसे दुनिया के सबसे अद्भुत सांस्कृतिक देशों में शामिल करती हैं।

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About the Author

Laxman Singh Rathor

Administrator

Laxman Singh Rathor को पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक का लंबा अनुभव है। 2005 में Dainik Bhakar से कॅरियर की शुरुआत कर बतौर Sub Editor कार्य किया। वर्ष 2012 से 2019 तक Rajasthan Patrika में Sub Editor, Crime Reporter और Patrika TV में Reporter के रूप में कार्य किया। डिजिटल मीडिया www.patrika.com पर भी 2 वर्ष कार्य किया। वर्ष 2020 से 2 वर्ष Zee News में राजसमंद जिला संवाददाता रहा। आज ETV Bharat और Jaivardhan News वेब पोर्टल में अपने अनुभव और ज्ञान से आमजन के दिल में बसे हैं। लक्ष्मण सिंह राठौड़ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि खबरों की दुनिया में एक ब्रांड हैं। उनकी गहरी समझ, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग, पाठक व दर्शकों से जुड़ने की क्षमता ने उन्हें पत्रकारिता का चमकदार सितारा बना दिया है। jaivardhanpatrika@gmail.com

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#rajsamandराजसमंद शहर के लक्ष्मी कॉलोनी में दशामाता पर्व को लेकर आस्था, श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना रहा। सजी-धजी महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में दशामाता पूजन स्थल पर पहुंचीं और मंगल गीतों, भजन-कीर्तन तथा आरती के साथ माता की आराधना की। इस दौरान महिलाओं ने दशामाता से जुड़ी अनोखी कहानियां, चमत्कार और लोकमान्यताओं का भी वर्णन किया, जिसे सुनने के लिए आसपास की महिलाओं में खास उत्साह नजर आया। महिलाओं ने बताया कि दशामाता का पूजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुख-समृद्धि, घर की दशा सुधारने और ग्रह शांति की कामना से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि विधि-विधान से दशामाता की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां कम होती हैं और परिवार में शांति, समृद्धि तथा खुशहाली आती है। यही कारण है कि इस पर्व के दौरान महिलाएं लगातार दस दिनों तक पूरे श्रद्धाभाव से पूजन करती हैं। पूजन के दौरान महिलाओं ने माता को भोग अर्पित किया, दीप प्रज्वलित किए और पूरे विधि-विधान से आरती उतारी। इसके बाद भजन-कीर्तन का दौर चला, जिसमें श्रद्धालु महिलाएं पूरी भक्ति में लीन नजर आईं। वातावरण इतना भावुक और आध्यात्मिक था कि हर ओर केवल आस्था की गूंज सुनाई दी। महिलाओं ने अपने साथ-साथ अपने परिवार की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्ध जीवन की कामना की। दशामाता पर्व को लेकर लक्ष्मी कॉलोनी में हर दिन विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। महिलाएं समूह में एकत्रित होकर लोक परंपरा को जीवित रखते हुए नई पीढ़ी को भी इस पूजा के महत्व से अवगत करा रही हैं। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावना को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती दी है।
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राजसमंद के गुंजोल में हिन्दू क्रांति सेना का होली स्नेह मिलन, फूलों से खेली होली #hindukranti  #jaivardhannews
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अखिल भारत हिन्दू क्रांति सेना की ओर से गुंजोल स्थित नाइट एंगल्स रिसोर्ट में शनिवार को होली स्नेह मिलन एवं संगठनात्मक कार्यशाला हुई। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद सोनी थे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेश पालीवाल, राष्ट्रीय महासचिव पवन माकन, रामदेव दीक्षित शास्त्री, हरीहर महाराज (कोटा), प्रदेश अध्यक्ष सौरभसिंह पृथ्वीपुरा, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हेमंत जोशी, प्रदेश प्रभारी मनीष पालीवाल आदि मंचासीन रहे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद सोनी ने कहा कि सेना का उद्देश्य सनातन संस्कृति की रक्षा, समाज में जागरूकता और राष्ट्रहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाना है। सर्वसम्मति से महिला मोर्चा भंग करने का निर्णय लिया गया। महिला मोर्चा का पुनर्गठन किया जाएगा और शीघ्र ही नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी।
इस अवसर पर उदयपुर संभाग उपाध्यक्ष राजेंद्र टांक, उदयपुर संभाग प्रभारी नरेश कुमार भाट, प्रदेश मंत्री सोनल पारीक, प्रदेश प्रवक्ता गोविंद अलवर), सवाई माधोपुर जिलाध्यक्ष सुधांशु रवि कुमार, उदयपुर जिलाध्यक्ष नाहरसिंह चूंडावत, सलूम्बर जिलाध्यक्ष जितेन्द्र जोशी, राजसमंद जिलाध्यक्ष पवन टांक, जिला प्रभारी प्रहलाद सिंह राठौड़, मुकेश कुमार भाट, विष्णु बागाना, डूंगर देवड़ा, ललित कुमावत, श्याम गुर्जर, वीरेंद्र सिंह, हरी वल्लभ, करणसिंह, तरुण, हीरालाल, सुरेश देवड़ा, देवीलाल कुमावत, पवन राणा, सुमनलता व्यास, कल्पना शर्मा, विमला सेन, शोभा राजपुरोहित, अंजना सालवी आदि मौजूद थे।
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राजसमंद में बागोटा में खूब उड़ी अबीर-गुलाल, ढोल पर युवाओं ने किया गेर नृत्य  #rajsamandnews #folk  #jaivardhannews
#rajsamandराजसमंद के पास बागोटा गांव में पंचमी के अवसर पर फुलडोल महोत्सव एवं होली स्नेह मिलन का आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यक्रम में गांव के युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। दोपहर करीब 12 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण मुख्य चौराहे पर एकत्रित हुए, जहां पहले होली स्नेह मिलन हुआ और फिर ढोल की थाप पर पारंपरिक गैर नृत्य शुरू हुआ। तेज धूप को देखते हुए युवाओं ने चौराहे पर टेंट की व्यवस्था की, जिसके नीचे जमकर गैर नृत्य किया गया। ढोल की गूंजती थाप और “चारभुजा नाथ” के जयकारों के बीच युवाओं ने गोल घेरा बनाकर पारंपरिक अंदाज में गैर नृत्य प्रस्तुत किया। पूरे माहौल में रंग, उमंग और भाईचारे की झलक दिखाई दी तथा ग्रामीणों ने हर्षोल्लास के साथ फुलडोल महोत्सव मनाया।बागोटा गेर नृत्य
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