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Unique Villages of India : भारत के अजब- गज़ब गांव, कई अनसुलझे रहस्य, जानकर रह जाएंगे हैरान

Jaivardhan News June 11, 2023 2 minutes read

भारतीय संस्कृति में सर्व धर्म समुदाय वाली है और पूर्व से लेकर पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक हर एक क्षेत्र की अलग विशेषता है और अलग ही वहां का परिवेश, अलग संस्कृति, अलग रीति रिवाज है, जिसके कारण हर क्षेत्र की अपनी खूबी है। कहीं प्रकृति की अनुपम देन है, तो कहीं अत्याधुनिक तकनीक के लिए क्षेत्र विख्यात है। कहीं बारह महीने बारिश होती है, तो कहीं ज्यादातर सूखा रहता है। कहीं पहाड़ है, तो कहीं समतल जमीन है। इस तरह हर क्षेत्र में अलग अलग दृष्टिकोण से वहां की संस्कृति को जाना वह पहचाना जाता है।

इसी बीच में जयवर्द्धन न्यूज टीम द्वारा यह प्रयास किया गया है कि हमारे भारत में 9 ऐसे अनोखे गांव है, जो काफी प्रसिद्ध है, जहां पर देशभर के लोग आते हैं और वहां की संस्कृति व वहां के कामकाज से सीखे लेते हैं। अब जानते हैं भारत देश के ऐसे अनोखे व अनूठे गांव है।

इस गांव में दूध- दही मुफ्त मिलता है : Milk and curd are available free of cost in this village

strange village यहां के लोग कभी दूध या उससे बनने वाली चीजों को  बेचते नहीं हैं, बल्कि उन लोगों को मुफ्त में दे देते हैं, जिनके पास गाय या भैंसे नहीं हैं। धोकड़ा गुजरात के कच्छ जिले में में बसा ऐसा ही अनोखा गांव है। श्वेत क्रांति के लिए प्रसिद्ध ये गाँव दूध दही ऐसे ही बाँट देता है। एक दूसरे की मदद को लेकर प्रसिद्ध यह गांव आमजन को यह संदेश देता है कि एक दूसरे की हेल्प करनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद को संबल मिल सकें।

शनि शिगन्नापुर गांव में आज भी राम राज्य : Ram Rajya even today in Shani Shigannapur village

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुके में शनि शिगन्नापुर भारत का एक ऐसा गाँव है, जहाँ लोगों के घर में एक भी दरवाजा नहीं है। यहां तक कि लोगों की दुकानों में भी दरवाजे नही हैं, यहां पर कोई भी अपनी बहुमूल्य चीजों को ताले- चाबी में बंद करके नहीं रखता, फिर भी गांव में आज तक कभी कोई चोरी नही हुई। इस तरह यहां गांव आज हमारे भारत देश ही नहीं, बल्कि दुनिया को यह नैतिकता, सत्य व सदाचार का पाठ पढ़ा रहा है।

मुत्तुरु गांव जहां हर कोई बोलता है संस्कृत : Mutturu Village Where Everyone Speaks Sanskrit

Mysterious village in india कर्नाटक के शिमोगा शहर के कुछ ही दूरी पर एक गांव ऐसा बसा है, जहां ग्रामवासी केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। शिमोगा शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर मुत्तुरु अपनी विशिष्ठ पहचान को लेकर चर्चा में है। तुंग नदी के किनारे बसे इस गांव में संस्कृत प्राचीन काल से ही बोली जाती है । करीब पांच सौ परिवारों वाले इस गांव में प्रवेश करते ही “भवतः नाम किम्?” (आपका नाम क्या है?) पूछा जाता है “हैलो” के स्थान पर “हरिओम्” और “कैसे हो” के स्थान पर ” कथा अस्ति?” आदि के द्वारा ही वार्तालाप होता है । बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बात करते हैं । भाषा पर किसी धर्म और समाज का अधिकार नहीं होता इसलिए गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी संस्कृत सहजता से बोलते हैं। देश का यह अनोखा गांव है, जहां पर शुद्ध रूप से संस्कृत भाषा का प्रचलन है।

सलारपुर खालसा गांव जो हर साल कमाता है 1 अरब : salarpur khalsa village which earns 1 billion every year

Unique Villages of India उत्तरप्रदेश का एक गांव सलारपुर खालसा पूरे देश के लिए अनोखा है। यहां की एक खासियत है, जिसकी वजह से खास पहचान है। आप शायद अभी तक इस गांव की पहचान से दूर रहे हों, लेकिन देश के कोने-कोने में इस गांव ने अपने झंडे गाड़ दिए हैं। अमरोहा जनपद के जोया विकास खंड क्षेत्र का ये छोटा सा गांव है सलारपुर खालसा । 3500 की आबादी वाले इस गांव का नाम पूरे देश में छाया है और इसका कारण है टमाटर । गांव में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है और 17 साल में टमाटर आसपास के गांवों जमापुर, सूदनपुर, अंबेडकरनगर में भी छा गया है। कारोबार की बात करें, तो पांच माह में यहां 60 करोड़ का कारोबार होता है।

इस गांव में 350 से ज्यादा जुड़वा लोग : More than 350 twins in this village

केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित कोडिन्ही गांव को जुड़वां लोगों का गांव कहते हैं। इस गांव में ज्यादातर लोग जुड़वा (Twins Village) जन्मे हुए हैं और इसलिए इसे जुड़वां गांव के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वर्तमान में करीब 350 जुड़वा जोड़े रहते हैं, जिनमे नवजात शिशु से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं। विश्व स्तर पर हर 1000 बच्चों पर 4 जुड़वां पैदा होते हैं, एशिया में तो यह औसत 4 से भी कम है, लेकिन कोडिन्ही में हर 1000 बच्चों पर 45 बच्चे जुड़वां पैदा होते हैं। Unique Villages of India हालांकि यह औसत पुरे विश्व में दूसरे नंबर पर, लेकिन एशिया में पहले नंबर पर आता है। विश्व में पहला नंबर नाइज़ीरिआ के इग्बो-ओरा को प्राप्त है जहाँ यह औसत 145 है। कोडिन्ही गाँव एक मुस्लिम बहुल गाँव है जिसकी आबादी करीब 2000 है। इस गाँव में घर, स्कूल, बाज़ार हर जगह हमशक्ल नज़र आते हैं।

एक गांव जिसे कहते हैं, भगवान का बगीचा : a village called the garden of the gods

Unique Villages of India जहां एक और सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गाँवो, कस्बों और शहरों की हालत बहुत खराब है वहीं यह एक सुखद आश्चर्य की बात है कि एशिया का सबसे साफ सुथरा गाँव भी हमारे देश भारत में है। यह है मेघालय का मावल्यान्नांग गांव जिसे कि भगवान का अपना बगीचा (God’s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है । सफाई के साथ साथ यह गाँव शिक्षा में भी अवल्ल है। यहाँ की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलॉन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। साल 2014 की गणना के अनुसार, यहां 95 परिवार रहते हैं। यहां सुपारी की खेती आजीविका का मुख्य साधन है। यह गांव भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

170 साल से वीरान गांव, रात में रहता भूत प्रेतों का डेरा : Deserted village for 170 years, the camp of ghosts stays at night

हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओं को समेटे हुए हैं। ऐसी ही एक घटना है राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा गाँव की, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा है। कुलधरा गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात में इस गांव को खाली कर के चले गए थे और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा है। यह पालीवाल समाज की उत्पत्ति का स्थल भी माना जाता है। इसी जगह से पालीवाल ब्राह्मण समाज के लोग पूरे राजस्थान में अलग अलग जगह पर जाकर बसे थे। इसे श्रापित गांव के नाम भी जाना जाता है, जहां आज भी मकानों के कई खंडहर विद्यमान है, जहां अंधेरा ढलने के बाद कोई वहां नहीं जाता है। हालांकि अभी श्रापित गांव पर्यटन की दृष्टि से काफी विकसित हो गया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग इस गांव को देखने आते हैं।

More News : इस गांव में बच्चे, युवा, महिलाएं कोई नहीं पहनते कपड़े, देखिए दुनिया का यह अनोखा गांव

इस गांव में कुछ भी छुआ तो 1000 रुपए का जुर्माना : 1000 rupees fine for touching anything in this village

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्थित है मलाणा गाँव। इसे आप भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव कह सकते हैं। यहाँ के निवासी खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं। यहाँ की अपनी संसद है, जो सारे फैसले करती है। मलाणा भारत का इकलौता गांव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है। इस गांव के लिए वहां के लोगों की अपनी हुकूमत है। कुल्लू के मलाणा गांव में यदि किसी बाहरी व्यक्ति ने किसी चीज़ को छुआ तो जुर्माना देना पड़ता है। जुर्माने की राशि 1000 रुपए से 2500 रुपए तक कुछ भी हो सकती है। अपनी विचित्र परंपराओं लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गांव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इनके रुकने की व्यवस्था इस गांव में नहीं है। पर्यटक गांव के बाहर टेंट में रहते हैं। अगर इस गांव में किसी ने मकान-दुकान या यहां के किसी निवासी को छू (टच) लिया तो यहां के लोग उस व्यक्ति से एक हजार रुपए वसूलते हैं। ऐसा नहीं है कि यहां के निवासी यहां आने वाले लोगों से जबरिया वसूली करते हों। मलाणा के लोगों ने यहां हर जगह नोटिस बोर्ड लगा रखे हैं। इन नोटिस बोर्ड पर साफ- साफ चेतावनी लिखी गई है। गांव के लोग बाहरी लोगों पर हर पल निगाह रखते हैं, जरा सी लापरवाही भी यहां आने वालों पर भारी पड़ जाती है। मलाणा गांव में कुछ दुकानें भी हैं। इन पर गांव के लोग तो आसानी से सामान खरीद सकते हैं, पर बाहरी लोग दुकान में न जा सकते हैं न दुकान छू सकते हैं। बाहरी ग्राहकों को दुकान के बाहर से ही खड़े होकर सामान मांगना पड़ता है। दुकानदार पहलेसामान की कीमत बताते हैं। रुपए दुकान के बाहर रखवाने के बाद सामन भी बाहर रख देते हैं।

Unique Villages of India : जहां पेड़ों को बांधते हैं राखी, पिपलांत्री गांव : Where Rakhi is tied to trees, Piplantri village

राजस्थान के राजसमंद जिले में पिपलांत्री गांव है, जो सफेद मार्बल के लिए प्रसिद्ध है। यह गांव पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां देश की पहली निर्मल ग्राम पंचायत बनी है। यहां के पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल द्वारा बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया और पूरे गांव में चरागाह जमीन को संरक्षित किया। वर्षा जल संरक्षण के लिए बेहतर कार्य किए हैं। इस पर राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने लिए राज्य स्तरीय प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया, जहां पर प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। श्यामसुंदर पालीवाल को पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

इस गांव नहीं एक भी मच्छर : There is not a single mosquito in this village

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में एक अनोखा गांव है हिवरे बाजार, जहां पर एक भी मच्छर देखने को भी नहीं मिलता है। साथ ही गांव के लोगों ने एक अजब ऑफर भी दे रखा है कि अगर कोई भी व्यक्ति गांव में कोई मच्छर पकड़ कर बता दें, तो उसे 400 रुपए का ईनाम दिया जाएगा। बताते हैं कि यह गांव कभी सूखाग्रस्त था। वर्ष 1980 व 90 के दशक में इस गांव में अकाल पड़ा था, तब पीने के लिए पानी भी नहीं था और कई परिवार यहां से पलायन कर गए। बाद में फिर वर्ष 1990 के बाद ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने व कुएं खोदने का कार्य शुरू हुआ, तो खूब पानी आ गया और अब गांव में भरपूर पानी है, मगर बताते हैं कि जब सूखा पड़ा था, तब इस गांव में मच्छरों का खात्मा हो गया था और तब से ही इस गांव में एक भी मच्छर नहीं होने का दावा किया जाता है। साथ ही यह गांव इस बात के लिए भी प्रसिद्ध है कि इस गांव में कम पानी में अधिक फसलों का उत्पादन होता है, जिसकी वजह से भी यह गांव समृद्ध है।

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एक गांव जहां पानी की टंकी से लोगों की पहचान : Identification of people from the water tank in this village

Unique Villages of India पंजाब के जालंधर शहर के शहर में बसे उपल्ला गांव की अनोखी कहानी हैं, इस गाँव में लोगो की पहचान उनके घरो पर बनी पानी की टंकियो से होती है, आश्चर्य की बात है,पानी की टंकी से किसी के घर की पहचान भला कैसे होती है, लेकिन इस गांव में साधारण टंकियां नहीं होती है, बल्कि यहाँ पर हवाई जहाज, घोडा, ट्रैक्टर, कार, बस, और कई विभिन्न आकारों की टंकियां होती है। खास बात यह है कि इस गांव के अधिकतर लोग पैसा कमाने के लिए विदेशो में रहते है, जिसके कारण यह अपने घरों पर अजब-गजब आकाराें की टंकियां बनवाते हैं। कोई गुलाब का फूल बना कर खुशहाली का संकेत देता है. तो कोई घोडा बना कर रौब दार परिवार का सन्देश देता है।

एक ऐसा गांव जहां हर जगह मंदिर : A village where temples are everywhere

झारखंड के दुमका जिले के शिकारीपाड़ा के पास बसे छोटे से गांव मलूटी की अपनी एक अलग ही विशेषता है, भारत का यह एक ऐसा गांव हैं जहां जिस तरफ देखों मंदिर ही नजर आएंगें। बताया जाता है कि इस गांव में करीब 108 प्राचीन मंदिर थे जिनका सही रूप से संरक्षण नहीं होने के कारण वे घट कर 72 रह गए हैं व यहां का हर मंदिर छोटी-छोटी लाल सुर्ख ईंटों से बनाए गए हैं जिनकी ऊंचाई करीब 15 फीट से लेकर 60 फीट तक हैं व इन मंदिरों की दीवारों पर रामायण-महाभारत के दृश्यों का अद्भुत चित्रण किया हुआ है। अतएव अत्यधिक मंदिरों के कारण इस गांव को गुप्त काशी भी कहा जाता है। यहां का दृश्य पर्यटन के लिए अतीव मनोरम है। इसलिए यहां अत्यधिक मात्रा में घूमने के लिए पर्यटक आते है।

इस गांव के लोग नही करते अपने घरों की पुताई : The people of this village do not paint their houses

 मध्य प्रदेश के रतलाम जिले का अनोखा गांव जहां लोग अपने घरों की रंगाई पुताई नहीं करवाते, इस गांव का नाम कछालिया है। यहां पर लाखों के मकान बनाने के बाद भी उन पर रंगाई व पुताई नही कराई जाती व यदि किसी घर शादी होने पर भी वहां डेकोरेशन नही किया जाता। अतएव यह भी बताया जाता है कि इस गांव के लोग पानी भी छानकर नही पीते और साथ ही गांव का कोई भी व्यक्ति काले कपड़े नहीं पहनता है, यहां के लोग मानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति काले कपड़े पहनता है, तो उसके ऊपर मुसीबतें छा जाती है। खास बात यह है कि यहां पर कोई भी दुल्हा मंदिर के सामने से घोड़ी पर बैठकर नही जा सकता व यदि कोई नियमों को तोड़ता है तो उसके साथ कोई न कोई बुरी घटना अवश्य होती है। यहां के लोग ऐसा बाबा कालेश्वर भैरव के सम्मान में करते हैं।

Unique Villages of India : इस गांव में नही बनाते पक्के मकान : Pucca houses are not built in this village

राजस्थान के बसा देवमाली गांव की भी अनोखी पहचान है, कहा जाता आज के जिस दौर में लोग ऐशो आराम व नई तकनीकों में जीना पसंद करतें सभी आलीशान घरों में रहना चाहतें हैं। वहीं दूसरी तरफ अपवाद के रूप में देवमाली ग्राम है जहां के लोग मिट्टी के मकानों में रहना पसंद करतें हैं, तथा यह चाहते हैं कि अन्य लोग भी इन्हीं की तरह जीवनयापन करें। यह लोग देवनारायण के अनुयायी है अत: इनका मानना है कि पक्के मकान बनाने से विपदाएं आती है। तथा इस गांव में कहीं भी आपको पक्के मकान नही दिखेंगे। यह लोग बजरी व सीमेंट का कभी काम में नही लेते खास बात यह है कि यहां के लोगों ने कसम खा रखी है कि यह न तो मांस खाएंगे और नही शराब का सेवन करेंगे। यहां के लोगाें की सकारात्मक सोच व आत्मविश्वास काफी मजबूत है।

इस गांव में पाए जाते हैं सभी अंधे : All blind are found in this village

दुनिया की ऐसी कई जगह हैं जिनका रहस्य अजीबो गरीब होता है, ऐसी ही एक मैक्सिको में बसे टिल्पेक गांव की अनोखी कहानी है जहां पर रहने वाले सभी लोग अंधे हैं। बताया जाता है कि इस गांव में बच्चे पैदा होते ही उनके आखों की रोशनी चली जाती। यहां तक कि इस गांव में पाए जाने वाले जानवर भी अंधे होते हैं, व इस गांव को अंधों को गांव कहा जाता है । कहा जाता है कि इस गांव में जेपोटेक जनजाति के लोग रहते हैं, यहां के बच्चों के पैदा होते कुछ समय आंखें ठीक होती है लेकिन धीरे-धीरे उनकी रोशनी चली जाती है व इस गांव के कई लोग मानते हैं कि यहां पर एक पुराना पेड़ है जिसके श्राप के कारण इन्हें अंधा होना पड़ता हैं। लेकिन इसे अंधविश्वास माना जाता है व विषेशज्ञों का मानना है कि वहां एक जहरीली मक्खी है, जिसके काटने से लोगों में अंधापन आ जाता है। सरकार ने लोगों को इस जगह से निकालने के प्रयास किए लेकिन इनका शरीर दूसरी जलवायु के अनुकूलता नहीं रह पाया जिसके कारण आज भी इन लोगों को वहीं रहना पड़ रहा है।

इस गांव में रहते है सिर्फ बौने लोग : Only dwarf people live in this village

भूटान के सीमा से करीब तीन चार किमी. पहले एक अमार नामक गांव हैं,और वहां केवल 70 लोग रहते हैं। इस गांव की खास बात यह है कि यहां पर सिर्फ बौने लोग ही पाए जाते हैं, यहां पर किसी भी व्यक्ति की ऊंचाई साढ़े तीन फीट से अधिक नही होती है। बताया जाता है कि इस गांव को वामाना के सरदार नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की अदाकारा पवित्र राभा ने बसाया था। यहां के छोटे कद के लोगों को पवित्र राभा द्वारा कलाकार बनाया जाता था, इस गांव के लोग दिनभर खेती करते हैं व शाम को मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

इस गांव में लोग बोलेतें हैं अजीबोगरीब भाषा : People speak strange language in this village

Unique Villages of India एक गांव हिमाचल प्रदेश में है, जो बेहद रहस्यमय है। इस गांव में लोग अजीबोगरीब भाषा में बात करते हैं, जो यहां के लोगों के अलावा किसी ओर के लिए समझना बड़ा मुशिकल कार्य है। इस गांव का नाम मलाणा है जो चारों तरफ से गहरी खाइयों और बर्फीले पहाड़ों से घिरा है। बताया जाता है कि यह लगभग 1700 लोगों की आबादी वाला गांव हैं व इस गांव के लिए कोई भी सड़क तक बनी हुई नहीं है। पहाड़ी पगडंडियों से होते हुए ही यहां तक पहुंचा जा सकता है बताया जाता है कि जब सिकंदर ने हिंदुस्तान पर हमला किया था, तो उसके कुछ सैनिकों ने मलाणा गांव में ही रूके थे उसके बाद वो यहीं पर बस गए व यहां पर रहने वाले बाशिंदे सिकंदर के सैनिकों के वंशज कहलाते हैं। लेकिन इस बात का कोई ठोस प्रमाण आज तक साबित नही हुआ है। इस गांव के लोग कनाशी नाम की भाषा बोलते हैं, जो समझना बड़ा कठिन है। इस गांव की खास बात ये है कि यहां पर बोली जाने वाली भाषा दुनिया में कहीं और नहीं बोली जाती है। इस भाषा को बाहरी लोगों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इस भाषा को लेकर कई देशों में शोध हो रहे हैं।

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जयवर्द्धन न्यूज डेस्क टीम। पांच से 15 वर्ष तक पत्रकारिता के अनुभवी एक्सपर्ट शामिल है, जो प्रत्येक कंटेंट का गहन अवलोकन के बाद मौजूदा स्थिति के अनुसार बेहतर, निष्पक्ष, सारगर्भित व पठनीय कंटेंट तैयार करते हैं। Jaivardhan News Desk Team

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