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Weak Monsoon Forecast : भारत पर मंडरा रहा बड़ा मौसम संकट! सूखा और भीषण गर्मी का डर बढ़ा

Parmeshwar Singh Chundwat May 16, 2026 1 minute read

Weak Monsoon Forecast : देश में पहले से ही सामान्य से कम मानसून की आशंका जताई जा रही है, वहीं अब मौसम वैज्ञानिकों ने एक और बड़ी चिंता जाहिर की है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) ने संकेत दिए हैं कि इस वर्ष सुपर अल-नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, सूखे का खतरा बढ़ सकता है और कई राज्यों में भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सुपर अल-नीनो मई से जुलाई 2026 के बीच सक्रिय हो सकता है और इसका प्रभाव आने वाली सर्दियों तक बना रह सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर दिखाई देगा।

क्या है सुपर अल-नीनो और क्यों बढ़ रही चिंता?

El Niño 2026 predictions : अल-नीनो एक ऐसी मौसमी स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। जब यह तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और उसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगता है, तब उसे ‘सुपर अल-नीनो’ कहा जाता है। इस स्थिति में समुद्री हवाओं और वातावरण के दबाव में बदलाव होने लगता है। इसका सीधा असर मानसून पर पड़ता है। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून मुख्य रूप से प्रशांत महासागर और हिंद महासागर से आने वाली हवाओं पर निर्भर करता है। अल-नीनो इन हवाओं की ताकत को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार जब अल-नीनो मजबूत होता है तो भारत समेत दक्षिण एशिया में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। कई इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला जाता है और हीटवेव का खतरा बढ़ जाता है।

NOAA ने बढ़ाई संभावना, अब 82% तक पहुंचा खतरा

Monsoon update today : अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के ताजा आंकड़ों के अनुसार मई से जुलाई 2026 के दौरान सुपर अल-नीनो बनने की संभावना अब 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे पहले जारी अनुमान में यह संभावना करीब 61 प्रतिशत थी। एजेंसी ने बताया कि प्रशांत महासागर का तापमान इस समय सामान्य से लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र की यह गर्म स्थिति मानसून सीजन के दौरान भी बनी रह सकती है। NOAA ने यह भी कहा है कि सुपर अल-नीनो के दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक सक्रिय बने रहने की 96 प्रतिशत संभावना है। वहीं इसके ‘स्ट्रॉन्ग’ या ‘वेरी स्ट्रॉन्ग’ रूप लेने की संभावना लगभग 67 प्रतिशत बताई जा रही है।

भारतीय मौसम विभाग ने भी जताई चिंता

IMD monsoon 2026 : भारतीय मौसम विभाग (IMD) के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने कहा है कि यदि सुपर अल-नीनो सक्रिय होता है तो इसका असर भारतीय मानसून पर साफ दिखाई देगा। इससे देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि मानसून कमजोर पड़ने से खेती, जलस्तर और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। खासतौर पर खेती पर निर्भर क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।

किन राज्यों पर सबसे ज्यादा खतरा?

Rajasthan Heatwave News : मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई हिस्से सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं। यहां सामान्य से कम बारिश और लंबे ड्राई स्पेल की आशंका जताई गई है।

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा पर सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में अगस्त और सितंबर के दौरान बारिश काफी कम हो सकती है। इससे फसलों और जलस्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। राजस्थान में पहले से ही गर्मी का असर तेज रहता है। ऐसे में कमजोर मानसून और सूखे की स्थिति लोगों की परेशानियां बढ़ा सकती है।

मध्यप्रदेश के कई संभागों में कम बारिश का अनुमान

मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश कम हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। साथ ही बिजली उत्पादन और पेयजल संकट भी बढ़ सकता है।

इन इलाकों पर असर अपेक्षाकृत कम

हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ क्षेत्रों में सुपर अल-नीनो का असर सीमित रह सकता है। इनमें राजस्थान के कुछ हिस्से, लद्दाख, तेलंगाना और उत्तर भारत के कुछ इलाके शामिल हैं। फिर भी मौसम विभाग ने सभी राज्यों को सतर्क रहने और जल प्रबंधन की तैयारियां समय रहते शुरू करने की सलाह दी है।

अल-नीनो से दुनिया पर कैसे पड़ता है असर?

सुपर अल-नीनो केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करता है।

  • भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम हो सकती है।
  • इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सूखा और जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है।
  • प्रशांत महासागर के मध्य क्षेत्रों में भारी बारिश और चक्रवात की स्थिति बन सकती है।
  • कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
  • कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

क्यों बढ़ रही है भीषण गर्मी?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जब बारिश कम होती है और बादल नहीं बनते, तब धरती की सतह अधिक गर्म होने लगती है। इससे हीटवेव की घटनाएं बढ़ती हैं। यदि सुपर अल-नीनो सक्रिय रहा तो भारत में इस साल सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

बारिश बढ़ने के बावजूद धरती क्यों हो रही सूखी?

हाल ही में जर्नल ‘नेचर’ में प्रकाशित एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कुल बारिश की मात्रा बढ़ रही है, लेकिन धरती और इकोसिस्टम पहले से ज्यादा सूखे होते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब बारिश पूरे साल में समान रूप से नहीं होती। इसके बजाय कम समय में बहुत तेज बारिश होती है और फिर लंबे समय तक सूखा रहता है। ऐसी स्थिति में मिट्टी अचानक गिरने वाले अधिक पानी को पूरी तरह सोख नहीं पाती। पानी तेजी से बह जाता है या भाप बनकर उड़ जाता है। इससे भूजल स्तर नहीं बढ़ पाता और जमीन सूखी रह जाती है।

खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

यदि मानसून कमजोर रहा तो सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं।

इसके अलावा:

  • बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
  • जलाशयों का स्तर घट सकता है।
  • खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। राज्यों को जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन और हीटवेव से बचाव की तैयारियां पहले से करनी होंगी। वैज्ञानिकों ने लोगों से पानी बचाने, गर्मी में सावधानी बरतने और मौसम विभाग की एडवाइजरी पर ध्यान देने की अपील की है।

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Parmeshwar Singh Chundwat

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राजसमंद जिले की खमनोर पंचायत समिति क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में पारंपरिक मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत 15 जून से मेला शुरू होगा, जिसकी शुरुआत मचींद में आयोजित होने वाले दो दिवसीय मेले से होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के पहुंचने की संभावना है। मचींद में दो दिवसीय आयोजन के बाद ऐतिहासिक हल्दीघाटी में मेले का आयोजन किया जाएगा, जहां विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं 18 जून को अश्व मेले का भी आयोजन होगा, जो क्षेत्र की विशेष पहचान माना जाता है।महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले इन आयोजनों को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और महाराणा प्रताप के अनुयायियों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
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