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1800 crore cyber scam in Rajasthan : आदिवासियों के नाम पर 1800 करोड़ की साइबर ठगी

Parmeshwar Singh Chundwat July 7, 2025 1 minute read

1800 crore cyber scam in Rajasthan : राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में एक सनसनीखेज साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें भोले-भाले आदिवासियों को सरकारी योजनाओं, मुफ्त पैन कार्ड, छात्रवृत्ति, और शिक्षा ऋण का लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए। इन खातों का उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा अवैध लेन-देन के लिए किया गया, जिससे करीब 1800 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने इस घोटाले को लेकर डीजीपी और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

यह विशाल साइबर ठगी का मामला तब सामने आया, जब डूंगरपुर जिले के बथड़ी गांव निवासी लालशंकर रोत ने 19 जून 2025 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज की। लालशंकर ने बताया कि नवंबर 2024 में उनके गांव के विक्रम मालीवाड़ और उनके तीन साथियों ने उनके घर आकर मुफ्त पैन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच दिया। इसके लिए उनसे एक बैंक खाता खोलने को कहा गया। विक्रम और उनके साथियों ने लालशंकर के नाम से एक सिम कार्ड खरीदा और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाता खुलवाया। हैरानी की बात यह थी कि खाते से संबंधित पासबुक, एटीएम कार्ड, और चेकबुक आरोपियों ने अपने पास रख ली। लालशंकर को बताया गया कि जल्द ही उनका पैन कार्ड मिल जाएगा। कुछ समय बाद, जब लालशंकर ने अपने खाते का स्टेटमेंट मांगा, तो बैंक ने खुलासा किया कि उनके खाते में 82 लाख रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है, जिसके कारण खाता फ्रीज कर दिया गया है। इस खुलासे ने लालशंकर को स्तब्ध कर दिया, क्योंकि उन्हें इस लेन-देन की कोई जानकारी नहीं थी। लालशंकर ने तुरंत विक्रम मालीवाड़, महावीर सिंह, घनश्याम कलाल, और एक बैंक कर्मचारी कौशल प्रजापत के खिलाफ साइबर थाने में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विक्रम मालीवाड़ और महावीर सिंह को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने ये खाते साइबर ठगों को मोटे कमीशन के बदले बेचे थे।

1800 करोड़ की ठगी, 500 से अधिक फर्जी खाते

Fake bank accounts in tribal areas : सांसद राजकुमार रोत ने अपने पत्र में दावा किया कि यह साइबर ठगी का घोटाला केवल डूंगरपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, और सलूंबर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में भी फैला हुआ है। उनके अनुसार, करीब 500 से अधिक गरीब आदिवासी छात्रों और उनके परिवारों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए हैं, जिनका उपयोग 1800 करोड़ रुपये की साइबर ठगी में किया गया।

रोत ने बताया कि इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, और अन्य बैंकों के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला संभव हुआ। इन कर्मचारियों ने कॉलेजों और आदिवासी गांवों में कैंप लगाकर भोले-भाले लोगों को लुभावने वादों के साथ फंसाया। उन्हें मुफ्त पैन कार्ड, छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण, और सरकारी योजनाओं का लाभ देने का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, फोटो, और हस्ताक्षर जैसे दस्तावेज एकत्र किए गए। इन दस्तावेजों का उपयोग कर खाते खोले गए, लेकिन खाताधारकों को न तो एटीएम कार्ड दिए गए और न ही पासबुक प्रदान की गई।

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कमीशन के बदले खाते बेचे

Dungarpur tribal bank fraud : डूंगरपुर साइबर थाने के थानाधिकारी गिरधारीलाल ने बताया कि इस घोटाले में शामिल लोग आदिवासी समुदाय के लोगों को निशाना बनाते थे, जो तकनीकी जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे। आरोपियों ने इन खातों की सारी जानकारी साइबर अपराधियों को बेच दी, जो इनका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, ऑनलाइन स्कैम, और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए करते थे।

साइबर ठग इन खातों में ठगी की रकम ट्रांसफर करते थे, जिसके बाद यह पैसा कई अन्य खातों में बांट दिया जाता था ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो। बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण यह प्रक्रिया और आसान हो गई। जब खाताधारकों ने एटीएम कार्ड या पासबुक की मांग की, तो बैंक कर्मचारियों ने तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर उन्हें टाल दिया। कई मामलों में, जब खाते फ्रीज हुए, तब पीड़ितों को इस घोटाले का पता चला। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 25 से 30 लोगों के नाम पर खाते खोले, जिनमें से एक खाते में ही 82 लाख रुपये की ठगी का लेन-देन हुआ। साइबर थाने की टीम अब अन्य संदिग्ध खातों की जांच कर रही है और यह अनुमान है कि इस घोटाले का दायरा और बड़ा हो सकता है।

पीड़ितों की आपबीती

Mule accounts scam सांसद राजकुमार रोत ने बताया कि इस घोटाले के शिकार ज्यादातर गरीब आदिवासी परिवारों के छात्र और उनके परिजन हैं। इन लोगों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि पुलिस प्रशासन द्वारा भी परेशान किया जा रहा है। रोत ने आरोप लगाया कि पुलिस असली अपराधियों को पकड़ने के बजाय पीड़ितों को ही तंग कर रही है, जिससे उनके साथ अन्याय हो रहा है।

पीड़ितों ने सांसद को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। कई पीड़ितों ने बताया कि उन्हें अपने खातों में हुए लेन-देन की कोई जानकारी नहीं थी, और जब वे बैंक गए, तो उन्हें पता चला कि उनके खातों से लाखों-करोड़ों रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ है।

पुलिस कार्रवाई और जांच

Rajkumar Roat : डूंगरपुर साइबर थाने ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों, विक्रम मालीवाड़ और महावीर सिंह, को गिरफ्तार किया है। थानाधिकारी गिरधारीलाल ने बताया कि पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 25-30 लोगों के दस्तावेजों का उपयोग कर खाते खोले और इन्हें साइबर ठगों को बेचा। पुलिस अब अन्य संदिग्धों की तलाश में है, जिनमें कुछ बैंक कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।

पुलिस ने अब तक 30 से अधिक फर्जी खातों की पहचान की है और इनके जरिए हुए लेन-देन की जांच कर रही है। साइबर सेल की एक विशेष टीम इस मामले की गहन जांच में जुटी है, और यह अनुमान है कि आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

उच्च स्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई

Cyber fraud complaint : सांसद राजकुमार रोत ने डीजीपी राजीव शर्मा और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह घोटाला न केवल डूंगरपुर, बल्कि दक्षिणी राजस्थान के अन्य जिलों में भी फैला हुआ है। रोत ने मांग की है कि:

  • दोषी बैंक कर्मचारियों और साइबर ठगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
  • पीड़ित आदिवासी छात्रों और उनके परिवारों को न्याय दिलाया जाए।
  • बैंकों के केवाईसी प्रोसेस की जांच हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

रोत ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन को पीड़ितों को परेशान करने के बजाय असली अपराधियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर की साइबर ठगी का हिस्सा बताया और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जांच की सिफारिश की है।

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा

यह मामला साइबर ठगी के बढ़ते खतरे को दर्शाता है, जो अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। आदिवासी क्षेत्रों जैसे ग्रामीण और कम जागरूक इलाकों को भी ठग अपना निशाना बना रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के घोटालों में म्यूल खाते (Mule Accounts) का उपयोग आम हो गया है, जिसमें भोले-भाले लोगों के खातों का दुरुपयोग किया जाता है।

भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-In) ने हाल ही में एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी से बचने के तरीके बताए थे। उन्होंने कहा था कि कोई भी जांच एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह की पूछताछ नहीं करती।

पीड़ितों के लिए राहत और सुझाव

साइबर थाने ने पीड़ितों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल या लालच देने वाले ऑफर से सावधान रहें। यदि किसी के साथ ऐसी ठगी होती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें। सांसद राजकुमार रोत ने भी पीड़ितों को भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले को संसद और राज्य सरकार के सामने उठाएंगे ताकि दोषियों को सजा मिले और पीड़ितों को न्याय मिले।

वित्तीय सलाहकारों ने सुझाव दिया है कि:

  • अपने बैंक खाते की जानकारी नियमित रूप से जांचें।
  • एटीएम कार्ड, पासबुक, और नेट बैंकिंग की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
  • केवाईसी अपडेट या लोन ऑफर के नाम पर आने वाली कॉल्स पर भरोसा न करें।
  • साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करें।
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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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