
rauf asghar : भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई को एक बार फिर साबित कर दिया है। हाल ही में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल स्ट्राइक (Missile Strike) की। इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इसमें कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ अजहर मारा गया। रऊफ अजहर 1999 में हुए कंधार प्लेन हाईजैक (IC-814 Hijack) का मास्टरमाइंड था और अमेरिका की मोस्ट वांटेड (Most Wanted) लिस्ट में भी शामिल था। इस घटना ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति (Zero Tolerance Policy) को और मजबूत किया है।
यह कार्रवाई पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब थी, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारत ने इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों पर डाली थी, जिसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी ठिकानों को तबाह किया, बल्कि रऊफ अजहर जैसे खूंखार आतंकी को भी खत्म कर दिया। आइए, इस घटना और कंधार हाईजैक की पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।
कंधार हाईजैक की भयावह कहानी
abdul rauf azhar Death : 24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814, जो नेपाल की राजधानी काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ान भर रही थी, को 5 नकाबपोश आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया। इस विमान में 176 यात्री और 15 क्रू मेंबर (Crew Members) सवार थे। यह घटना भारतीय इतिहास की सबसे लंबी और डरावनी हाईजैक घटनाओं में से एक है, जो 7 दिनों तक चली। हाईजैकर्स ने विमान को कई जगहों पर ले गए—अमृतसर, लाहौर, दुबई, और अंत में अफगानिस्तान के कंधार, जहां उस समय तालिबान (Taliban) का शासन था।
विमान ने काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Tribhuvan International Airport) से उड़ान भरी थी। जैसे ही यह भारतीय वायुसीमा में दाखिल हुआ, आतंकवादियों ने कॉकपिट (Cockpit) पर कब्जा कर लिया और पायलट को बंदूक की नोक पर विमान को काबुल ले जाने का आदेश दिया। लेकिन ईंधन की कमी के कारण विमान को पहले अमृतसर में उतारा गया। इसके बाद इसे लाहौर ले जाया गया, जहां पाकिस्तानी अधिकारियों ने बिना अनुमति के लैंडिंग की इजाजत दी और विमान में ईंधन भरा गया।
लाहौर से विमान दुबई पहुंचा, जहां 27 यात्रियों, ज्यादातर महिलाओं और बच्चों को, रिहा किया गया। लेकिन इस दौरान एक यात्री, रूपिन कात्याल, की हाईजैकर्स के साथ झड़प में हत्या कर दी गई। उसकी मृत देह को भी दुबई में उतारा गया। 25 दिसंबर को विमान कंधार पहुंचा, जहां तालिबान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई।
हाईजैकर्स ने अपनी मांगें रखीं, जिनमें 36 आतंकवादियों की रिहाई, 200 मिलियन डॉलर (Million Dollars) की फिरौती, और मारे गए आतंकी सज्जाद अफगानी के शव की मांग शामिल थी। भारत सरकार ने लंबी बातचीत के बाद यात्रियों की जान बचाने के लिए मजबूरन 3 आतंकवादियों को रिहा करने का फैसला किया। इनमें जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख, और मुश्ताक अहमद जरगर शामिल थे।
31 दिसंबर 1999 को इन आतंकवादियों को कंधार ले जाया गया, और बदले में सभी बंधकों को रिहा कर दिया गया। इसके बाद यात्रियों को विशेष विमान से भारत वापस लाया गया। इस घटना ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था (Security System) पर कई सवाल खड़े किए और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जरूरत को उजागर किया।
हाईजैक के पीछे की साजिश
Rauf Azhar Killed : कंधार हाईजैक को आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन (Harkat-ul-Mujahideen) ने अंजाम दिया था। इस साजिश के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की भूमिका की बात भी बार-बार सामने आई है। हाईजैक का मुख्य मकसद मौलाना मसूद अजहर सहित प्रमुख आतंकवादियों को भारतीय जेलों से रिहा कराना था। उस समय मसूद अजहर भारतीय जेल में बंद था, और इस हाईजैक को उसकी रिहाई के लिए एक सुनियोजित साजिश के तौर पर देखा गया।
अब्दुल रऊफ अजहर की भूमिका
blast in pakistan : अब्दुल रऊफ अजहर 1999 के कंधार हाईजैक का मास्टरमाइंड था। वह जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का छोटा भाई था। रऊफ ने अपने भाई को जेल से छुड़ाने के लिए इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। उसने काठमांडू में बैठकर हाईजैक की योजना बनाई और हाईजैकर्स के साथ को-ऑर्डिनेशन (Coordination) किया। हाईजैकर्स में उसका एक अन्य भाई, इब्राहिम अतहर, भी शामिल था। रऊफ की मुख्य भूमिका साजिश की रणनीति (Strategy) तैयार करने और हाईजैकर्स को निर्देश देने की थी।
हाईजैक के बाद रऊफ जैश-ए-मोहम्मद के कई आतंकी हमलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा। उसने भारत में कई बड़े हमलों की साजिश रची, जिसके चलते वह भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट (Most Wanted List) में शामिल हो गया। इसके अलावा, वह अमेरिका की भी वांटेड लिस्ट में था, क्योंकि उसकी गतिविधियां वैश्विक आतंकवाद (Global Terrorism) को बढ़ावा दे रही थीं।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सटीक कार्रवाई
kandahar hijack पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस ऑपरेशन का मकसद पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ठिकानों को नष्ट करना था। भारतीय सेना ने सटीक मिसाइल स्ट्राइक के जरिए इन ठिकानों को तबाह कर दिया। इस दौरान रऊफ अजहर भी मारा गया, जो एक बड़ा झटका है आतंकी संगठनों और उनके समर्थकों के लिए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत ने अत्याधुनिक तकनीक (Advanced Technology) और खुफिया जानकारी (Intelligence) का इस्तेमाल किया। सैटेलाइट इमेजरी (Satellite Imagery) और ड्रोन सर्विलांस (Drone Surveillance) की मदद से आतंकी ठिकानों की सटीक लोकेशन (Location) का पता लगाया गया। इसके बाद मिसाइल स्ट्राइक के जरिए इन ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। रऊफ अजहर की मौत ने यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ कोई ढील नहीं बरतेगा।
रऊफ अजहर की मौत का प्रभाव
ic 814 रऊफ अजहर की मौत से जैश-ए-मोहम्मद को बड़ा नुकसान हुआ है। वह संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार (Strategist) था और भारत के खिलाफ कई हमलों की साजिश रच चुका था। उसकी मौत से आतंकी संगठन की कमान कमजोर होगी, और भारत में होने वाले आतंकी हमलों की आशंका में कमी आएगी। इसके अलावा, यह ऑपरेशन भारत की सैन्य ताकत (Military Strength) और आतंकवाद के खिलाफ उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
रऊफ अजहर की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है। अमेरिका ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है, क्योंकि रऊफ उसकी मोस्ट वांटेड लिस्ट में था। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) और अन्य वैश्विक संगठनों ने भी आतंकवाद के खिलाफ भारत की इस कार्रवाई को सही ठहराया है। हालांकि, पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन को अपनी संप्रभुता (Sovereignty) का उल्लंघन करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी शिकायत करने की बात कही है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत रऊफ अजहर की मौत भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी जीत है। कंधार हाईजैक जैसी भयावह घटना को अंजाम देने वाला यह आतंकी लंबे समय से भारत के लिए खतरा बना हुआ था। उसकी मौत ने न केवल जैश-ए-मोहम्मद को कमजोर किया है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकता है। यह ऑपरेशन भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी क्षमता, और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को साफ तौर पर दर्शाता है।



