
Navy officer espionage case : राजस्थान पुलिस की CID इंटेलिजेंस यूनिट ने देश की सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाले मामले का पर्दाफाश किया है। इस केस में नौसेना भवन, दिल्ली में डायरेक्टोरेट ऑफ डॉकयार्ड में यूडीसी (Upper Division Clerk) पद पर कार्यरत विशाल यादव को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की महिला हैंडलर को गोपनीय सूचनाएं देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के खिलाफ देशद्रोह, जासूसी और गोपनीय दस्तावेजों के लीक से संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।
‘प्रिया शर्मा’ बनकर संपर्क में आई महिला हैंडलर
Vishal Yadav spy case Pakistani handler प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी विशाल यादव को पाकिस्तानी महिला हैंडलर ने पहले फेसबुक पर “प्रिया शर्मा” के नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। प्रिया के प्रोफाइल में आकर्षक फोटो और देशभक्ति से जुड़ी पोस्ट देखकर विशाल ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच मैसेजिंग से बातचीत शुरू हुई और जल्द ही नंबर शेयर कर WhatsApp और बाद में Telegram पर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा।
महीनों तक होती रही चैट, फिर हुआ ‘डील’
Operation Sindoor leaked information सूत्रों की मानें तो महिला हैंडलर ने लंबे समय तक प्रिया शर्मा बनकर भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश की। धीरे-धीरे उसने खुद को “इंटेलिजेंस से जुड़ा देशभक्त” बताया और विशाल को भरोसे में लिया। फिर एक दिन उसने अपना असली नाम और मकसद बताया—वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी की एजेंट है और भारत से सामरिक और गोपनीय सूचनाएं चाहती है, बदले में अच्छा पैसा देने का वादा किया गया।
पहले छोटे पैसों में लीं सूचनाएं
Indian Navy clerk arrested for spying विशाल ने शुरू में छोटी-मोटी सूचनाएं दी, जिसके बदले उसे 5 से 6 हजार रुपए मिलते थे। लेकिन धीरे-धीरे जब महिला एजेंट ने कहा, “तुम्हारी खबर C ग्रेड की है, अगर A ग्रेड की सूचना दोगे तो दोगुना पेमेंट मिलेगा,” तो लालच में आकर विशाल ने “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी साझा कर दी। इसके बदले उसे 50,000 रुपए नकद ट्रांसफर किए गए।
कुल दो लाख रुपए से अधिक की कमाई
अब तक की जांच में सामने आया है कि विशाल यादव को करीब 1.5 से 2 लाख रुपए अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त हुए। इनमें से कुछ रकम बैंक खाते में आई और कुछ USDT क्रिप्टोकरेंसी के रूप में ट्रांसफर की गई। आरोपी ने इस डिजिटल करेंसी को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए इस्तेमाल किया, जिसकी जांच अब साइबर क्राइम यूनिट द्वारा की जा रही है।

देशभर की एजेंसियों ने मिलकर की पूछताछ
CID Rajasthan spy arrest CID के महानिरीक्षक विष्णुकांत गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं प्राप्त करने के लिए सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग कर रही हैं। उनकी यूनिट ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर सर्विलांस के जरिए इस पूरे मामले को ट्रैक किया।
सभी आवश्यक तथ्यों की पुष्टि होने के बाद विशाल यादव को जयपुर बुलाकर डिटेन किया गया, जहां पर रॉ (RAW), IB, मिलिट्री इंटेलिजेंस, एनआईए (NIA) जैसी टॉप एजेंसियों ने उससे गहन पूछताछ की।
विशाल के मोबाइल और लैपटॉप की फोरेंसिक जांच से कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। चैट्स, ऑडियो रिकॉर्डिंग, पेमेंट स्क्रीनशॉट, और साझा की गई फाइलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि आरोपी ने कई अहम रक्षा दस्तावेज, सेना के मूवमेंट प्लान और ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक जानकारियां लीक की थीं।
ऑनलाइन गेमिंग की लत ने बनाया आसान शिकार
विशाल यादव को ऑनलाइन गेमिंग की लत थी और वह देर रात तक डिजिटल गेम्स खेला करता था। वहीं से वह धीरे-धीरे सोशल मीडिया की फर्जी प्रोफाइल्स में उलझता चला गया। पैसों की चाह और रोमांटिक चैट्स में फंसे होने के कारण उसने देशद्रोह जैसा घिनौना कृत्य कर डाला।
CID इंटेलिजेंस टीम की समय पर कार्रवाई से एक बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा संकट टल गया। यदि यह जानकारी पाक एजेंसी को समय पर मिलती रहती, तो इससे भारत की सामरिक रणनीति पर गंभीर असर पड़ सकता था।



