
Udaipur Religious Conversion Case : उदयपुर जिले के ऋषभदेव क्षेत्र के कई आदिवासी बहुल गांवों में लोगों को बीमारी से राहत, आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाओं का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप सामने आए हैं। कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर क्षेत्र में लंबे समय से बाहरी राज्यों से जुड़े मिशनरी समूहों की गतिविधियां संचालित होने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ स्थानीय लोगों की मदद से आर्थिक रूप से कमजोर और मूलभूत सुविधाओं से वंचित परिवारों को निशाना बनाया जा रहा था। गांवों में बाहर से आए पादरी लोगों को बीमारियों से छुटकारा दिलाने का दावा करते हुए प्रार्थना सभाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद उन्हें नियमित रूप से रविवार को होने वाली प्रार्थना सभाओं से जोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।
Rishabhdeo Religious Conversion Case : स्थानीय लोगों का दावा है कि कानूवाड़ा बिलखाई और कागदर क्षेत्र में कई आदिवासी परिवार इस प्रभाव में आकर अपना धर्म बदल चुके हैं। आरोप है कि लोगों के रिश्तेदारों से संपर्क कर उनके पारंपरिक देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भ्रम फैलाया जाता था, ताकि धीरे-धीरे उनका झुकाव दूसरे धर्म की ओर हो सके। कानूवाड़ा बिलखाई गांव में वही स्थान बताया जा रहा है, जहां प्रार्थना सभा के लिए आसपास के करीब 20 गांवों के लोगों को बुलाया गया था। हिंदू संगठन से जुड़े पन्नालाल मीणा का कहना है कि खेरवाड़ा क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों में पिछले लगभग 10 वर्षों से लोगों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर धर्म परिवर्तन करवाने का प्रयास किया जा रहा है और यह गतिविधि अभी भी जारी है। गौरतलब है कि 6 जून को धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़े मामले में ऋषभदेव थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 पादरियों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया था।
पहले धार्मिक साहित्य और दवाइयां बांटी जाती थीं, फिर जोड़ा जाता था
Udaipur Conversion Case : ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआत में लोगों को धार्मिक पुस्तकें और दवाइयां वितरित की जाती थीं। इसके बाद कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों के माध्यम से उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था। आरोप है कि मिशनरी समूहों ने गांव-गांव में अपने स्थानीय संपर्क भी बना रखे थे। लोगों का कहना है कि पहले गरीब परिवारों को अपने साथ जोड़ा जाता था और बाद में कुछ आर्थिक मदद देकर उन्हें चर्च या प्रार्थना सभाओं में नियमित रूप से आने के लिए कहा जाता था। कई लोगों ने दावा किया कि सभा में नहीं पहुंचने पर दबाव भी बनाया जाता था। नानालाल की सूचना के बाद कानूवाड़ा बिलखाई गांव में पुलिस ने कार्रवाई की थी, जिसके बाद उनके परिवार का सम्मान भी किया गया।
लोगों को आर्थिक लाभ और मदद का भरोसा दिया जाता था
Religious Conversion Case in Udaipur : दो दिन तक प्रार्थना सभा में शामिल रहे मनीष मीणा ने बताया कि वहां 200 से अधिक लोग मौजूद थे। उनके अनुसार, सभाओं में लोगों को बीमारियों से मुक्ति और जीवन में आर्थिक उन्नति का भरोसा दिया जाता था। उन्होंने बताया कि लोगों से कहा जाता था कि यदि वे उनके धर्म से जुड़ेंगे तो खेती, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों में मदद उपलब्ध कराई जाएगी। कई लोग उनकी बातों पर विश्वास कर रहे थे और उनके बताए अनुसार चलने लगे थे।

महिलाओं ने भी जताई चिंता
कानूवाड़ा बिलखाई की निवासी गंगा कलासुआ ने बताया कि ऐसे लोग लंबे समय से गांव में सक्रिय हैं और महिलाओं को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। वहीं कमला बाई ने कहा कि गांव के प्रभावशाली लोगों के डर से कई परिवार खुलकर कुछ नहीं बोल पाते। उनका कहना है कि उनका परिवार अपने पारंपरिक धर्म और देवी-देवताओं में आस्था रखता है और वे धर्म परिवर्तन नहीं करना चाहते।
प्रार्थना से बीमारी ठीक होने के दावे पर उठे सवाल
Tribal Conversion Case : गांव के पूर्व उपसरपंच कांतिलाल ने बताया कि कई लोगों को यह कहकर जोड़ा जाता था कि उनकी बीमारियां केवल प्रार्थना के माध्यम से ठीक हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को हैंडपंप, कुएं और ट्यूबवेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का लालच भी दिया जाता था। कांतिलाल का कहना है कि प्रार्थना करने से किसी की बीमारी या समस्या में कोई विशेष बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपने धर्म और परंपराओं के साथ रहना चाहते हैं तथा गांवों में दूसरे धर्म का नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने धमकी मिलने का आरोप लगाया
मामले की शिकायत करने वाले नानालाल कलासुआ ने बताया कि उनके घर के पास प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। उनके अनुसार, सभा में मौजूद लोगों ने धर्म परिवर्तन करने पर बीमारियां दूर होने और आर्थिक लाभ मिलने की बातें कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को आकर्षित करने के लिए खेतों में कुएं और ट्यूबवेल खुदवाने जैसे प्रस्ताव भी दिए गए। नानालाल का कहना है कि जब उन्होंने कार्यक्रम का विरोध किया तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

गरीब और भोले लोग शिकायत नहीं करते0
पन्नालाल मीणा ने कहा कि क्षेत्र में धर्म परिवर्तन का मुद्दा नया नहीं है। उनका कहना है कि कई गरीब और भोले-भाले लोग डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं करवाते। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों को सहयोग और सुरक्षा मिलनी चाहिए ताकि वे बिना भय के अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा सकें।
सांसद ने कहा- सुनियोजित प्रयास की आशंका
उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि बड़ी संख्या में परिवारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अवैध गतिविधि हो रही है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना जरूरी है। सांसद ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी में बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की बातें सामने आई हैं और पूरे मामले की गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने इसे एक सुनियोजित और अंतरराज्यीय स्तर पर संचालित प्रयास होने की आशंका भी जताई।
3 पादरी सहित 11 आरोपी गिरफ्तार
ऋषभदेव डीएसपी Rajiv Rahar ने बताया कि जांच के दौरान धर्म परिवर्तन के लिए कथित रूप से प्रलोभन और दबाव डालने के संकेत मिले हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच की जा रही है। मामले में 3 पादरियों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और सभी से पूछताछ जारी है। थानाधिकारी Hemant Ahari ने बताया कि बाबूलाल के नेतृत्व में प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी, जिसमें आसपास के 20 से अधिक गांवों के लोगों को बुलाया गया था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, जहां 200 से अधिक लोग मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, वहां लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।



