
Iran closes Strait of Hormuz : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद करने की घोषणा की है। साथ ही चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है। यह वही रणनीतिक समुद्री रास्ता है, जिसके जरिए भारत समेत कई देश पश्चिम एशिया से कच्चा तेल मंगाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो भारत की रोजाना तेल सप्लाई पर कितना असर पड़ेगा और हमारे पास क्या विकल्प हैं?
भारत रोजाना कितना तेल आयात करता है?
India oil supply impact : भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। कुल आयात का आधे से ज्यादा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और उसका बड़ा भाग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
अनुमान के मुताबिक:
- भारत प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है।
- इसमें से करीब 25 लाख बैरल प्रतिदिन तेल होर्मुज मार्ग से आता है।
इसका मतलब है कि यदि यह रास्ता पूरी तरह बंद रहता है, तो भारत की रोजाना करीब 25 लाख बैरल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यह कुल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
क्या भारत के पास पर्याप्त भंडार है?
Hormuz oil crisis 2026 : ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली एजेंसी केप्लर के अनुसार, आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भी भारत के पास लगभग 40–45 दिन की जरूरत पूरी करने लायक कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है।
भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल वाणिज्यिक भंडार है, जिसमें शामिल हैं:
- रिफाइनरियों के पास रखा स्टॉक
- भूमिगत रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR)
- समुद्र में भारत की ओर आ रहे जहाजों पर लदा तेल
इससे अल्पकालिक संकट से निपटने में मदद मिल सकती है।

कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?
India crude oil imports per day : होर्मुज मार्ग में व्यवधान की खबर के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें उछल गई हैं।
- ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
- यह संकट से पहले के स्तर से लगभग 10% ज्यादा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो:
- आयात लागत बढ़ेगी
- ढुलाई खर्च में इजाफा होगा
- पेट्रोल-डीजल के दामों पर दबाव बढ़ सकता है
भारत कितना खर्च करता है तेल आयात पर?
Global oil price surge : भारत ने पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर लगभग 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल–जनवरी) में ही करीब 100.4 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। ऐसे में तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के व्यापार घाटे और महंगाई पर पड़ सकता है।
भारत के पास क्या विकल्प हैं?
अगर होर्मुज का संकट लंबा चलता है, तो भारत के पास कई विकल्प मौजूद हैं:
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग – SPR से तेल जारी कर अल्पकालिक जरूरत पूरी की जा सकती है।
- वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत – अमेरिका, रूस, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात बढ़ाया जा सकता है।
- लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स – अन्य उत्पादक देशों से दीर्घकालिक समझौते।
- ऊर्जा विविधीकरण – नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन पर जोर।
- रिफाइनरियों का स्टॉक प्रबंधन – रिफाइनरियां पहले से मौजूद वाणिज्यिक स्टॉक का बेहतर उपयोग कर सकती हैं।
क्या तुरंत संकट की आशंका है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में पेट्रोल पंप खाली होने जैसी स्थिति की संभावना कम है, क्योंकि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है और पहले से रवाना जहाज आते रहेंगे। हालांकि, यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो आयात लागत और ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।



