
PM Modi on petrol diesel crisis : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में वैश्विक तनाव, ऊर्जा संकट, अफवाहों से बचाव, खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों, खेल, जल संरक्षण, मछुआरों और पर्यावरण जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से बात की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, जिसका असर ऊर्जा आपूर्ति पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस क्षेत्र में इस समय युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, वही इलाका दुनिया की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा केंद्र है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल को लेकर वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में इस कारण संकट जैसे हालात बन रहे हैं, लेकिन भारत इस चुनौती से मजबूती के साथ निपट रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत के मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंध, विभिन्न देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में विकसित हुई राष्ट्रीय क्षमता की वजह से देश इन परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से खास तौर पर अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं के झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से समय-समय पर जो आधिकारिक जानकारी दी जा रही है, उसी पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग माहौल बिगाड़ने और भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं, जिससे देश का नुकसान होता है। इसलिए हर नागरिक को जागरूक रहना चाहिए और केवल प्रमाणिक जानकारी के आधार पर ही कोई कदम उठाना चाहिए।
मार्च रहा वैश्विक हलचल का महीना
petrol diesel shortage : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर काफी हलचल भरा रहा। उन्होंने याद दिलाया कि दुनिया पहले ही कोरोना महामारी के लंबे दौर से निकलने की कोशिश कर रही थी और उम्मीद थी कि अब विकास और स्थिरता का नया अध्याय शुरू होगा। लेकिन इसके विपरीत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगातार युद्ध और संघर्ष की स्थितियां बनती चली गईं। इससे अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता और चिंता और अधिक बढ़ गई है।
खाड़ी देशों में भारतीयों को मिल रही मदद
global fuel crisis : प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में खाड़ी देशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के लाखों परिवारों के सदस्य विदेशों में, विशेषकर खाड़ी देशों में काम करते हैं। ऐसे कठिन समय में वहां की सरकारें भारतीयों को हर प्रकार की सहायता दे रही हैं। उन्होंने खाड़ी देशों का आभार जताते हुए कहा कि एक करोड़ से अधिक भारतीयों को वहां सहयोग मिल रहा है, जो भारत के लिए राहत और संतोष की बात है।
जम्मू-कश्मीर की रणजी जीत का जिक्र
Middle East war fuel crisis : प्रधानमंत्री मोदी ने खेल जगत की बड़ी उपलब्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले महीने के आखिर में कर्नाटक के हुबली में एक बेहद रोचक मुकाबला खेला गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि करीब सात दशक के लंबे इंतजार के बाद टीम ने अपना पहला रणजी खिताब जीता है। यह उपलब्धि न सिर्फ जम्मू-कश्मीर, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
आकिब नबी के प्रदर्शन की सराहना
प्रधानमंत्री ने युवा गेंदबाज आकिब नबी का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आकिब नबी के शानदार प्रदर्शन की पूरे देश में चर्चा हो रही है। रणजी सीजन में 60 विकेट लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां देश के युवाओं को प्रेरणा देती हैं और खेल के प्रति उत्साह बढ़ाती हैं।

टी-20 वर्ल्ड कप जीत से देश में खुशी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की टी-20 वर्ल्ड कप जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विजय ने देशभर में खुशी की लहर दौड़ा दी थी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह महीना जोश, गर्व और उत्साह से भरा रहा। उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि देश की सामूहिक ऊर्जा, आत्मविश्वास और एकता का प्रतीक भी है।
गर्मियों के बीच जल संरक्षण पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में यह समय जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से मजबूत करने का है। उन्होंने लोगों से पानी बचाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए गंभीरता से काम करने की अपील की। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को काफी जागरूक किया है। इस अभियान के तहत देशभर में करीब 50 लाख कृत्रिम जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं, जो भविष्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी।
मछुआरों को बताया आत्मनिर्भर भारत की नींव
प्रधानमंत्री ने मछुआरा समुदाय के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। वे कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मेहनतकश लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि उनका सम्मान और सुविधाएं दोनों बढ़ सकें।
वाराणसी में बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
प्रधानमंत्री ने सामाजिक भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश के वाराणसी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां हाल ही में एक घंटे के भीतर 2 लाख 51 हजार से अधिक पौधे लगाए गए और नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। उन्होंने इस प्रयास को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि जब समाज खुद आगे आता है, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव की मजबूत नींव बन जाते हैं।
एकजुट होकर संकट से निकलने का भरोसा
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास जताया कि भारत पहले भी कई संकटों से एकजुट होकर बाहर निकला है और इस बार भी देशवासी मिलकर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि संयम, जागरूकता और सही जानकारी के आधार पर देश हर कठिन परिस्थिति से उबरने की ताकत रखता है।



