
Petrol diesel price hike today : देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों ने चार साल बाद पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में लगातार जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है। इसका सीधा असर भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर पड़ रहा है, जिन्हें हर महीने हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। बीते ढाई महीनों में क्रूड ऑयल की कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। एक समय ब्रेंट क्रूड 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि फिलहाल इसमें कुछ नरमी देखने को मिली है, लेकिन इसके बावजूद कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड में फिर तेजी आई और यह 3.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 109.3 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत भी इसी स्तर तक पहुंच गई।
तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का नुकसान
Diesel price hike today : सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ती कीमतों का भारी दबाव बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा हालात में कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, लेकिन इससे कंपनियों के घाटे में मामूली ही कमी आएगी। इंडस्ट्री से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा कीमतों के बावजूद तेल कंपनियों को अभी भी पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 11 रुपए और डीजल पर लगभग 39 रुपए का नुकसान हो रहा है।
बढ़ोतरी के बाद भी घाटे में कंपनियां
जानकारों के मुताबिक, शुक्रवार की बढ़ोतरी से पहले तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 14 रुपए और डीजल पर 42 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह घाटा कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन कंपनियां अभी भी भारी नुकसान में चल रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी की जा सकती है।

आम जनता पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ
Fuel price hike India 2026 : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है, जिसका असर खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में महंगाई और तेजी से बढ़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
सरकार ने लगाया विंडफॉल गेन टैक्स
Crude oil price impact : इस बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपए प्रति लीटर का विंडफॉल गेन टैक्स यानी अप्रत्याशित लाभ कर लगाने का फैसला किया है। वहीं डीजल पर लगने वाले निर्यात शुल्क को घटाकर 16.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके अलावा विमान ईंधन (ATF) पर लगने वाला कर भी कम करके 16 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 मई से लागू हो चुकी हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क एवं अवसंरचना उपकर शून्य रहेगा।
घरेलू बाजार में ईंधन उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश
Petrol diesel latest update : सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट और युद्ध जैसे हालात के बीच देश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार नहीं चाहती कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में संकट के कारण घरेलू बाजार में ईंधन की कमी पैदा हो। इसी वजह से निर्यात पर टैक्स लगाकर कंपनियों को घरेलू बाजार में ज्यादा सप्लाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पेट्रोल पर पहली बार लगाया गया विशेष शुल्क
पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद पहली बार पेट्रोल पर 3 रुपए प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लगाया गया है। इसके अलावा डीजल के निर्यात पर शुल्क को 23 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपए कर दिया गया है। वहीं विमान ईंधन पर टैक्स 33 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपए प्रति लीटर किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम
तेल बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में आम जनता को ईंधन के लिए और ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। वहीं महंगाई पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।



