
नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में तकनीक से बदली दर्शन व्यवस्था
Shrinathji Temple Digital Darshan: राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित Shrinathji Temple में श्रद्धालुओं की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने फेस रिकग्निशन सिस्टम और QR कोड आधारित टर्न स्टाइल गेट्स के जरिए दर्शन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बना दिया है। इसी व्यवस्था की समीक्षा के लिए मुख्य निष्पादन अधिकारी कार्यालय में दर्शन सर्वांगीण विकास समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें समिति सदस्यों ने नई डिजिटल व्यवस्था का पुनर्निरीक्षण किया।
फेस रिकग्निशन सिस्टम से अवैध वीआईपी दर्शन पर लगी रोक
Shrinathji Temple Management: मंदिर प्रशासन के इस डिजिटल नवाचार से दर्शन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समिति के अनुसार पहले कुछ लोग श्रद्धालुओं को भ्रमित कर दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करते थे। कई मामलों में मनोरथ भेंट की रसीदों का गलत इस्तेमाल कर उन्हें ऊंचे दामों में बेचने की शिकायतें भी सामने आती थीं। इन गतिविधियों से मंदिर को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा था और वास्तविक श्रद्धालुओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
QR कोड आधारित सिस्टम से दर्शन प्रक्रिया हुई सुरक्षित
Nathdwara Temple VIP Darshan: मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र कुमार पंड्या ने बताया कि फेस रिकग्निशन तकनीक लागू होने के बाद वास्तविक मनोरथी की पहचान तुरंत हो जाती है। इससे रसीदों के अवैध हस्तांतरण और ब्लैक मार्केटिंग पर प्रभावी रोक लगी है। उन्होंने कहा कि QR कोड आधारित डिजिटल व्यवस्था से श्रद्धालुओं के प्रवेश की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी हुई है।
डिजिटल व्यवस्था से मंदिर की आय में हुआ इजाफा
दर्शन सर्वांगीण विकास समिति ने माना कि आधुनिक तकनीक अपनाने से श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत हुआ है। साथ ही मंदिर की आय में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। नई व्यवस्था से दर्शन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हुई है, जिससे भक्तों को भी बेहतर अनुभव मिल रहा है।
श्रद्धालुओं को मिल रही बेहतर सुविधा
नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर की Digital Darshan System अब श्रद्धालुओं के लिए राहत का कारण बन रही है। तकनीक के इस्तेमाल से भीड़ प्रबंधन बेहतर हुआ है और दर्शन के दौरान होने वाली अव्यवस्थाओं में भी कमी आई है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि भविष्य में भी तकनीक के माध्यम से श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।



