
Heat stroke in children symptoms : देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 25 मई से शुरू होने वाले नौतपा के दौरान गर्मी और अधिक तेज हो सकती है। ऐसे हालात में सबसे ज्यादा खतरा नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों पर मंडरा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। तेज धूप और गर्म वातावरण में उनका शरीर बहुत जल्दी गर्म हो जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक नवजात और 5-6 साल तक के बच्चे हीट स्ट्रोक की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे बच्चों में पसीना कम निकलता है, जिससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। परिणामस्वरूप शरीर का तापमान अचानक बढ़ने लगता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप में थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए गर्मी के मौसम में उनकी विशेष देखभाल बेहद जरूरी है।

बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
Child heat stroke warning signs : गर्मी के दिनों में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
बच्चों को ठंडी और हवादार जगह पर रखें
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को हमेशा ठंडी और हवादार जगह पर रखना चाहिए। उन्हें लंबे समय तक बंद और गर्म कमरे में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
समय-समय पर पानी और तरल पदार्थ दें
बच्चों के शरीर में पानी की कमी न होने दें। उन्हें नियमित रूप से पानी, नारियल पानी, छाछ या अन्य तरल पदार्थ पिलाते रहें।
शिशुओं को मां का दूध जरूर पिलाएं
डॉक्टरों के अनुसार छोटे बच्चों और शिशुओं को समय-समय पर मां का दूध पिलाना बेहद जरूरी है। इससे शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होती।
शरीर का तापमान चेक करते रहें
गर्मी के मौसम में बच्चों के शरीर का तापमान समय-समय पर जांचते रहना चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का पता समय रहते लगाया जा सके।

कपड़ों और साफ-सफाई का भी रखें खास ध्यान
Heatwave safety tips for babies : विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को गर्मी में हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनाने चाहिए। ज्यादा तंग या मोटे कपड़े पहनाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे परेशानी बढ़ सकती है।
इसके अलावा बच्चों को समय-समय पर ठंडे पानी से नहलाना या गीले कपड़े से शरीर साफ करना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
Summer health tips for children : डॉक्टरों के अनुसार यदि बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए—
- लगातार रोना या अत्यधिक चिड़चिड़ापन
- तेज बुखार
- उल्टी या कमजोरी
- ज्यादा नींद आना
- सांस लेने में परेशानी
- शरीर का अत्यधिक गर्म महसूस होना
विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण जल्दी समझ में नहीं आते। ऐसे में माता-पिता को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
दोपहर के समय बच्चों को बाहर ले जाने से बचें
Heat stroke symptoms in infants : डॉक्टरों की सलाह है कि बच्चों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर न ले जाएं। इस दौरान धूप और गर्म हवाएं सबसे ज्यादा तेज होती हैं, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यदि बहुत जरूरी हो तभी बच्चों को बाहर लेकर जाएं और उन्हें पूरी तरह ढककर रखें। साथ ही पानी की पर्याप्त व्यवस्था जरूर रखें।
थोड़ी सी सतर्कता बचा सकती है बच्चों की जान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। समय रहते लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज कराना बेहद जरूरी है। गर्मी के इस मौसम में माता-पिता की सतर्कता ही बच्चों को हीट स्ट्रोक जैसी खतरनाक स्थिति से सुरक्षित रख सकती है।



