
Preeclampsia in Pregnancy : गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर बीमारी प्री-एक्लेम्पसिया दुनियाभर में लाखों महिलाओं और नवजात शिशुओं की जान ले रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल करीब 5 लाख भ्रूण और लगभग 70 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण होती है। यानी कुल मिलाकर यह बीमारी लगभग 5.7 लाख मौतों की वजह बन रही है। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए साउथ अफ्रीकन मेडिकल रिसर्च काउंसिल (SAMRC) ने स्टेलनबॉश यूनिवर्सिटी में एक नई एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च यूनिट (EMU) की स्थापना की है। यह टीम प्री-एक्लेम्पसिया की रोकथाम, पहचान और इलाज पर वैश्विक स्तर पर शोध करेगी।
भारत समेत विकासशील देशों पर विशेष ध्यान
Preeclampsia Treatment & Symptoms : इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य भारत जैसे कम और मध्यम आय वाले देशों में प्री-एक्लेम्पसिया की बेहतर जांच, रोकथाम और उपचार की रणनीति तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर इलाज से बड़ी संख्या में मौतों को रोका जा सकता है।
AIIMS की डॉ. नीना मल्होत्रा ने दी अहम सलाह
Pregnancy High BP Disease : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. नीना मल्होत्रा ने प्री-एक्लेम्पसिया को गर्भावस्था की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी मां और नवजात शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसके प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है।

क्या है प्री-एक्लेम्पसिया? ( Preeclampsia in Pregnancy )
Pregnancy Silent Killer Disease : प्री-एक्लेम्पसिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के दौरान महिला का ब्लड प्रेशर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है, जिनमें किडनी, लिवर, मस्तिष्क और प्लेसेंटा शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय रहते इसका पता न चले तो यह स्ट्रोक, ऑर्गन फेलियर, समय से पहले डिलीवरी और यहां तक कि मां और बच्चे की मौत का कारण भी बन सकता है।
समय पर जांच से कम हो सकता है खतरा
Preeclampsia Treatment : डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही प्री-एक्लेम्पसिया की स्क्रीनिंग संभव है। शुरुआती पहचान होने पर गंभीर स्थिति बनने का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर इलाज मिलने से मां और बच्चे दोनों को होने वाली जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
शुरुआती जांच के जरूरी तरीके
- ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
- यूरिन में प्रोटीन की जांच
- भ्रूण के विकास की निगरानी
- गर्भवती महिला में दिखने वाले लक्षणों पर नजर

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग, सही समय पर उपचार और डॉक्टर की सलाह का पालन ही प्री-एक्लेम्पसिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
भारत में तेजी से बढ़ रहे मामले
फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI) के अनुसार, भारत में लगभग 8 से 10 प्रतिशत गर्भधारण प्री-एक्लेम्पसिया से प्रभावित होते हैं। यह आंकड़ा हर साल लाखों मामलों तक पहुंच जाता है।
डिस्क्लेमर : यह जानकारी डॉक्टर की सलाह पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है। अपनी जीवनशैली या आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
अक्सर पुछे जाने वाले प्रश्न
Q1. प्री-एक्लेम्पसिया क्या है?
उत्तर: प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जिसमें महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं।
Q2. प्री-एक्लेम्पसिया के मुख्य लक्षण क्या हैं?
उत्तर: हाई ब्लड प्रेशर, तेज सिरदर्द, हाथ-पैरों में सूजन, धुंधला दिखना, पेट दर्द और यूरिन में प्रोटीन इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं।
Q3. क्या प्री-एक्लेम्पसिया मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है?
उत्तर: हाँ, यदि समय पर इलाज न मिले तो यह मां और बच्चे दोनों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
Q4. प्री-एक्लेम्पसिया की जांच कब करानी चाहिए?
उत्तर: डॉक्टरों के अनुसार गर्भावस्था के शुरुआती चरण यानी पहले तीन महीनों से ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।
Q5. प्री-एक्लेम्पसिया से बचाव कैसे किया जा सकता है?
उत्तर: नियमित ब्लड प्रेशर जांच, संतुलित आहार, डॉक्टर की सलाह और समय-समय पर स्क्रीनिंग से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
Q6. क्या हाई ब्लड प्रेशर प्री-एक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है?
उत्तर: हाँ, गर्भावस्था में लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर प्री-एक्लेम्पसिया का प्रमुख संकेत माना जाता है।
Q7. भारत में प्री-एक्लेम्पसिया के मामले कितने हैं?
उत्तर: FOGSI की रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 8 से 10 प्रतिशत गर्भधारण इस बीमारी से प्रभावित होते हैं।
Q8. क्या प्री-एक्लेम्पसिया का इलाज संभव है?
उत्तर: समय पर पहचान और सही इलाज से इसके खतरे और जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।



