

Hindustan Zinc millet unit launch : राजपुरा दरीबा क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कंपनी की कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत सखी महिलाओं के लिए मिलेट यूनिट का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
हिन्दुस्तान जिंक द्वारा संचालित यह परियोजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। पिछले कई वर्षों से कंपनी ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स के आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं के लिए शुरू की गई इस नई मिलेट यूनिट का उद्घाटन हिन्दुस्तान जिंक के स्वतंत्र निदेशक अनूप कुमार मित्तल और डॉ. अरुणा शर्मा द्वारा किया गया। यह यूनिट आधुनिक मशीनों और तकनीक से लैस है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1250 किलोग्राम मिलेट कुकीज प्रतिमाह बताई गई है। इस यूनिट से शुरुआत में 10 सखी महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से भी कई परिवारों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है। मिलेट आधारित उत्पादों को आज के समय में स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। यूनिट में तैयार होने वाले उत्पाद फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होंगे, जो बेहतर पोषण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देंगे।
महिलाओं को मिलेगी आर्थिक मजबूती

Sakhi women employment initiative : हिन्दुस्तान जिंक का मानना है कि ग्रामीण महिलाओं को केवल सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना ज्यादा जरूरी है। इसी सोच के साथ सखी महिलाओं को रोजगार और व्यवसाय से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। इस यूनिट के माध्यम से महिलाएं न केवल नियमित आय अर्जित कर सकेंगी, बल्कि स्वयं का व्यवसायिक अनुभव भी विकसित करेंगी। कंपनी का लक्ष्य इन महिलाओं को इतना सक्षम बनाना है कि वे भविष्य में खुद अपने स्तर पर उद्यम संचालित कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की पहल ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाती है।
पांच वर्षों में दो महिला उद्योग स्थापित

Hindustan Zinc Sakhi initiative : हिन्दुस्तान जिंक की CSR परियोजनाओं के तहत पिछले पांच वर्षों में दो महिला-आधारित उद्योग स्थापित किए जा चुके हैं। इन उद्योगों में महिलाओं ने न केवल काम किया, बल्कि उद्यमी बनकर अपनी अलग पहचान भी बनाई। अगस्त 2021 में स्थापित महिला-स्वामित्व और महिला-नेतृत्व वाला सामाजिक उद्यम “सखी उत्पादन समिति” ग्रामीण राजस्थान की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया है। यह समिति हिन्दुस्तान जिंक के प्रमुख CSR कार्यक्रम “सखी पहल” के अंतर्गत संचालित की जा रही है।

25 हजार से अधिक महिलाओं को मिला मंच
Women self employment project Rajasthan : सखी उत्पादन समिति के तहत अब तक 25 हजार से अधिक महिलाओं को 2 हजार से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है।
इन समूहों के जरिए महिलाओं को:
- स्वरोजगार प्रशिक्षण
- उत्पाद निर्माण
- मार्केटिंग
- वित्तीय साक्षरता
- उद्यमिता विकास
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं को घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर दिया है।
दायची और उपाया ब्रांड बन रहे पहचान

Rural women entrepreneurship program : सखी उत्पादन समिति के तहत दो प्रमुख ब्रांड संचालित किए जा रहे हैं — “दायची” और “उपाया”।
दायची ब्रांड
दायची ब्रांड के अंतर्गत पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से तैयार किए गए खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इनमें:
- शुद्ध घी
- अचार
- कोल्ड प्रेस्ड तेल
- मसाले
- नमकीन
- मिलेट उत्पाद
शामिल हैं।
इन उत्पादों की खासियत यह है कि इनमें केमिकल का उपयोग बेहद कम या नहीं के बराबर किया जाता है। साथ ही अधिकांश सामग्री सीधे किसानों से प्राप्त की जाती है।
उपाया ब्रांड
उपाया ब्रांड के तहत पारंपरिक राजस्थानी हैंड ब्लॉक प्रिंट और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर आधुनिक डिजाइन वाले उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
इनमें:
- डिजाइनर कपड़े
- बैग
- होम डेकोर आइटम
- हस्तनिर्मित वस्त्र
शामिल हैं।
ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ये उत्पाद अब आम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
बाजार से जोड़ने पर विशेष फोकस
हिन्दुस्तान जिंक केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि महिलाओं को बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। कंपनी द्वारा स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सखी उत्पादों की बिक्री के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि महिलाओं के बनाए उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए बाजार तक सीधी पहुंच सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो रही है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बढ़ा कारोबार
Rural women entrepreneurship program : वर्ष 2023 में सखी उत्पादन समिति ने अपना ऑनलाइन मार्केटप्लेस “हार्ट्स विद फिंगर्स” लॉन्च किया था। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और किसानों को सीधे ग्राहकों से जोड़ना है। इससे हस्तनिर्मित और पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है।इसके अलावा कई उत्पाद अब बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं।
दायची उत्पादों को मिली बड़ी सफलता
दायची ब्रांड के कई उत्पादों को ऑनलाइन बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।
विशेष रूप से:
- गाय का घी “अमेजन चॉइस” बैज हासिल कर चुका है
- आम का अचार बेस्टसेलर श्रेणी में शामिल हुआ है
अब कई उत्पाद सब्सक्रिप्शन मॉडल पर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कंपनी भविष्य में सोशल कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे:
- व्हाट्सएप
- इंस्टाग्राम
- फेसबुक
के जरिए भी बिक्री बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
महिलाओं की आय में हुआ बड़ा इजाफा
सखी उत्पादन समिति के माध्यम से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्तमान में राजस्थान और उत्तराखंड में:
- 14 उत्पादन इकाइयां संचालित हो रही हैं
- इनमें 8 कपड़ा इकाइयां और 6 खाद्य इकाइयां शामिल हैं
- 200 से अधिक महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं
इसके अलावा 100 से ज्यादा बिजनेस सखी ग्रामीण बिक्री एंबेसडर के रूप में कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं गांवों और कस्बों में उत्पाद बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में:
- बिजनेस सखियों ने सामूहिक रूप से लगभग 52 लाख रुपये की आय अर्जित की
- सखी उत्पादन समिति ने करीब 2.57 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया
यह आंकड़े ग्रामीण महिला उद्यमिता की सफलता को दर्शाते हैं।
सामाजिक बदलाव की मिसाल बन रहीं महिलाएं
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि कई महिलाएं, जिन्होंने पहले कभी घर से बाहर काम नहीं किया था, अब अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
वे:
- आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं
- सामाजिक बाधाओं को तोड़ रही हैं
- अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की पहल केवल रोजगार नहीं देती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रखती है।
महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम
हिन्दुस्तान जिंक की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वरोजगार बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मिलेट यूनिट जैसी परियोजनाएं न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगी, बल्कि स्वस्थ खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देकर पोषण स्तर सुधारने में भी योगदान देंगी। ग्रामीण भारत में महिला उद्यमिता को नई पहचान दिलाने की दिशा में यह मॉडल आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।



