
राजसमंद। Rajsamand poetry event 2026 : साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति को समर्पित साकेत साहित्य संस्थान, राजसमंद द्वारा सूचना केन्द्र परिसर में मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम साहित्यिक उत्साह, भावनात्मक अभिव्यक्तियों और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत रहा। गोष्ठी में जिले के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों एवं नवोदित रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की जिलाध्यक्ष वीणा वैष्णव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मनोहर लाल श्रीमाली उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेन्द्र प्रसाद सनाढ्य “राजन” ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिससे पूरे वातावरण में साहित्यिक गरिमा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। काव्य गोष्ठी में भाग लेने वाले कवियों एवं कवयित्रियों ने हास्य, व्यंग्य, सामाजिक जागरूकता, नारी सम्मान, शिक्षा, संस्कृति और ग्रामीण जीवन जैसे विभिन्न विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। श्रोताओं ने हर प्रस्तुति पर तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन किया। Saket Sahitya Sansthan poetry gathering

संस्थान के उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने अपनी रचना
“कमेंट लाइक बिना भी, कवि कर्म निभाना,
सर्वहित हेतु, कलम अपनी सदा चलाना…”
का पाठ कर साहित्य के वास्तविक उद्देश्य और रचनाकार की जिम्मेदारी को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया।
कवयित्री पुष्पा पालीवाल ने नारी सशक्तिकरण पर आधारित अपनी भावपूर्ण रचना “नारी होकर नहीं सहूंगी…” प्रस्तुत कर महिलाओं की आत्मसम्मान और संघर्षशीलता को स्वर दिया। वहीं डॉ. सम्पत रेगर ने “म्हारी पहचान म्हारी मेवाड़ी…” के माध्यम से मेवाड़ की संस्कृति, भाषा और गौरव का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया।
हास्य और व्यंग्य ने खूब बटोरी वाहवाही
Monthly Kavi Goshti Rajsamand : चंद्रशेखर नारलाई ने “बंदरबाट… जेबकाट, पिताजी की वसीयत…” शीर्षक रचना के जरिए वर्तमान सामाजिक विसंगतियों और पारिवारिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक अंदाज में कटाक्ष किया। राजेन्द्र प्रसाद सनाढ्य “राजन” ने “मूं वोइस बच्चो हूँ…” जैसी रचना प्रस्तुत कर बच्चों की भावनाओं और बदलते सामाजिक परिवेश को मार्मिकता से व्यक्त किया।
अन्नू राठौड़ ‘रुद्रांजली’ ने “कब होगा परिवर्तन?” शीर्षक रचना के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। विजय सिंह राव ने “तुम चंदन बन जाना” जैसी प्रेरणादायक रचना सुनाकर श्रोताओं को जीवन में सद्गुण अपनाने का संदेश दिया।
संस्थान अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने “परिवर्तन की बात बड़ी…” शीर्षक कविता के माध्यम से समाज में बढ़ती चुनौतियों और बदलाव की जरूरत को प्रभावी शब्दों में प्रस्तुत किया। लक्ष्मी नारायण पालीवाल ने “हमारा सुन्दरचा गाँव” रचना सुनाकर ग्रामीण जीवन की सरलता और आत्मीयता का सुंदर चित्रण किया।
शिक्षा और बदलते दौर पर भी उठे सवाल
Hindi poetry program Rajsamand : दिनेश श्रीमाली ने “बहुत मुश्किल से बीता 1980 का साल” कविता के माध्यम से पुराने समय के संघर्षों और जीवन मूल्यों को याद किया। वहीं कुमार दिनेश ने “तरह-तरह के ऐप तले, पढ़ाई हुई गुमनाम” रचना के जरिए आधुनिक तकनीक और मोबाइल ऐप्स के बढ़ते प्रभाव के कारण शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों पर व्यंग्य किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. मनोहर लाल श्रीमाली ने अपनी हास्य रचना “उलट पुलट हेर फेर हो गया…” प्रस्तुत कर सभी को खूब हंसाया। उनकी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को हास्य और आनंद से भर दिया। श्रोताओं ने उनकी रचना पर जमकर तालियां बजाईं।
कविता समाज का दर्पण: विजय सिंह राव
Latest News Rajsamand : संस्था के संस्थापक सदस्य विजय सिंह राव ने कहा कि कविता केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का दर्पण होती है। उन्होंने कहा कि आज की गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं में सामाजिक जागरूकता, मानवीय संवेदनाएं और सकारात्मक संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है और इस प्रकार की साहित्यिक गोष्ठियां नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
नई प्रतिभाओं को मंच देने का प्रयास
संस्थान अध्यक्ष वीणा वैष्णव ने सभी रचनाकारों और उपस्थित साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साकेत साहित्य संस्थान लगातार साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य समाज में साहित्य के प्रति रुचि जागृत करना और सकारात्मक विचारधारा को बढ़ावा देना है। उपाध्यक्ष नारायण सिंह राव ने भी कहा कि साकेत साहित्य संस्थान वर्षों से समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार साहित्यिक गतिविधियों के आयोजन की बात कही।
अनेक साहित्य प्रेमी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में दिनेश श्रीमाली, विजय सिंह राव, पुष्पा पालीवाल, कुमार दिनेश, अन्नू राठौड़ ‘रुद्रांजली’, लक्ष्मी नारायण पालीवाल, डॉ. सम्पत लाल रेगर, चंद्रशेखर नारलाई सहित संस्थान के कई सदस्य, साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। मीडिया प्रभारी अन्नू राठौड़ ‘रुद्रांजली’ ने बताया कि कार्यक्रम का संचालन सह सचिव कुमार दिनेश ने प्रभावशाली ढंग से किया। अंत में गोष्ठी प्रभारी चंद्रशेखर नारलाई एवं सह गोष्ठी प्रभारी डॉ. सम्पत रेगर ने सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।



