
राजसमंद। TET Update 2026 : शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति अब काफी हद तक समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले और केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से पूर्ण छूट नहीं मिलेगी। अब सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए नौकरी में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों को राहत प्रदान करते हुए टीईटी पास करने की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। साथ ही राजस्थान सहित देश के सभी राज्यों को प्रत्येक छह माह में टीईटी आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि शिक्षकों को परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें। टीईटी को लेकर स्थिति उस समय और स्पष्ट हुई जब लोकसभा में सांसद लालजी वर्मा ने इस विषय को उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता के कारण कई प्रशासनिक और सेवा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में क्या केंद्र सरकार उन्हें टीईटी से पूर्ण छूट देने के लिए कोई राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार कर रही है? इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि टीईटी केवल नई शिक्षक भर्ती के लिए ही आवश्यक नहीं है, बल्कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों की पदोन्नति के लिए भी अनिवार्य योग्यता है। बिना टीईटी उत्तीर्ण किए किसी शिक्षक को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा सकता।
आरटीई कानून और एनसीटीई की अधिसूचना का हवाला
Teacher Eligibility Test New Rules शिक्षा मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act-2009) की धारा 23 के तहत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना जारी कर कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की थी। इस अधिसूचना के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया गया था। इसलिए टीईटी को पूरी तरह समाप्त करने या किसी वर्ग को स्थायी छूट देने का प्रावधान वर्तमान नियमों में उपलब्ध नहीं है।

शिक्षकों के लिए क्या हैं नए नियम?
Supreme Court TET Decision : नए दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। हालांकि उन्हें कुछ विशेष राहत दी गई है।
- वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट नहीं मिलेगी।
- पदोन्नति प्राप्त करने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।
- टीईटी पास करने की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गई है।
- सभी राज्यों को प्रत्येक छह माह में टीईटी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे सेवानिवृत्ति तक नौकरी में बने रह सकेंगे।
- हालांकि ऐसे शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।
- केंद्र सरकार ने फिलहाल टीईटी से पूर्ण छूट देने की कोई नीति विचाराधीन नहीं होने की बात स्पष्ट की है।
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को दी राहत, लेकिन छूट नहीं
Rajasthan TET Latest Update : शिक्षा मंत्रालय ने संसद को यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 को दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए टीईटी न्यूनतम और अनिवार्य योग्यता का हिस्सा है। कोर्ट ने यह माना कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए उन्हें टीईटी पास करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने परीक्षा उत्तीर्ण करने की अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यह राहत केवल समय-सीमा बढ़ाने तक सीमित है। शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट नहीं दी जा सकती।
नौकरी और प्रमोशन दोनों के लिए बढ़ी टीईटी की अहमियत
Teacher Job Eligibility Update : विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के बाद टीईटी की महत्ता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। अब यह केवल शिक्षक भर्ती की पात्रता परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि सेवा में कार्यरत शिक्षकों के करियर विकास और पदोन्नति से भी सीधे जुड़ गई है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर शिक्षक टीईटी उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो उन्हें पदोन्नति से वंचित होना पड़ सकता है। वहीं भविष्य में सेवा संबंधी अन्य लाभों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
राजस्थान के शिक्षकों पर भी पड़ेगा सीधा असर
सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के इस स्पष्ट रुख का असर राजस्थान सहित देशभर के लाखों शिक्षकों पर पड़ेगा। विशेष रूप से वे शिक्षक जो वर्ष 2011 से पहले नियुक्त हुए थे और अब तक टीईटी से छूट की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें भी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। राजस्थान में भी शिक्षा विभाग को अब नियमित अंतराल पर टीईटी आयोजित करने की दिशा में कदम उठाने होंगे, ताकि पात्र शिक्षक समय-सीमा के भीतर परीक्षा पास कर सकें और अपने सेवा अधिकारों का लाभ प्राप्त कर सकें।
शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टीईटी की अनिवार्यता का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता और दक्षता को सुनिश्चित करना है। बदलते शैक्षणिक परिवेश में शिक्षकों के ज्ञान और शिक्षण कौशल का मूल्यांकन आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार और शिक्षण मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



