
राजसमंद/अजमेर। Aravalli 100 meter rule : अरावली पर्वतमाला के 100 मीटर दायरे की परिभाषा को लेकर उठे विवाद और इससे जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी रविवार को राजस्थान के दौरे पर रही। कमेटी ने अजमेर और राजसमंद का दौरा किया, जिसके बाद टीम उदयपुर पहुंची। अजमेर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान अरावली की परिभाषा, खनन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए। इस दौरान पर्यावरणप्रेमियों और खनन कारोबारियों के बीच तीखी बहस भी हुई। वहीं, जनसुनवाई के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कमेटी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
जनसुनवाई में जयपुर, दौसा, बूंदी, कोटा, अजमेर, ब्यावर सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों ने अरावली की परिभाषा, पहाड़ों की कटाई, खनन गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने पक्ष कमेटी के सामने रखने का प्रयास किया। जनसुनवाई में खनन कारोबारी भी मौजूद रहे। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि खनन गतिविधियों को पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है। उनका तर्क था कि खनन से हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है और इससे राजस्थान के साथ देश के विकास को भी गति मिलती है। खनन कारोबारियों ने पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना था कि नियमों के तहत होने वाली खनन गतिविधियों को भी अवैध बताकर विरोध करना उचित नहीं है।

पर्यावरणप्रेमियों ने उठाए अरावली के संरक्षण पर सवाल
Aravalli mining : वहीं, पर्यावरणप्रेमियों और अरावली संरक्षण से जुड़े लोगों ने खनन गतिविधियों के दूसरे पहलू को कमेटी के सामने रखा। उनका आरोप है कि अरावली क्षेत्र में अंधाधुंध खनन किया जा रहा है। कई स्थानों पर पहाड़ों को काटने के साथ अवैध निर्माण और होटल गतिविधियां संचालित होने की भी शिकायतें हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की एक श्रृंखला नहीं है, बल्कि राजस्थान के पर्यावरण और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। अरावली के लगातार नुकसान से आने वाले समय में पर्यावरण और आमजन को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर जनसुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके बाद बाहर भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
जनसुनवाई के बाद कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल
Aravalli definition : जनसुनवाई खत्म होने के बाद पर्यावरणप्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाई पावर कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। बाहर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि कमेटी पर खनन कारोबारियों का प्रभाव अधिक दिखाई दिया और उनकी बातों को ज्यादा तवज्जो मिली, जबकि पर्यावरणप्रेमियों और आम लोगों की चिंताओं को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना था कि जयपुर सहित कई जिलों से लोग अपनी बात रखने के लिए अजमेर पहुंचे थे, लेकिन सभी लोगों की बात पूरी तरह सामने नहीं आ सकी। उनका कहना था कि यदि कमेटी वास्तव में अरावली की जमीनी हकीकत जानना चाहती है तो केवल सभागार में बैठकर जनसुनवाई करने से वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी।
‘जमीन पर जाए कमेटी, तभी सामने आएगी अरावली की सच्चाई’
Aravalli mining ban : पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की कि कमेटी को उन इलाकों में खुद जाकर स्थिति देखनी चाहिए, जहां पहाड़ काटे जाने, खनन और निर्माण गतिविधियों के आरोप हैं। उनका कहना है कि अरावली की वास्तविक स्थिति कागजों और सभागारों में बैठकर नहीं समझी जा सकती। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि प्रभावित लोगों की आवाज पूरी तरह कमेटी तक नहीं पहुंच पाती और मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण नहीं किया जाता है, तो अरावली को लेकर तैयार होने वाली रिपोर्ट कितनी जमीनी होगी।
राजसमंद के बाद उदयपुर पहुंची कमेटी
कमेटी ने अजमेर के साथ राजसमंद का भी दौरा किया और इसके बाद उदयपुर पहुंची। कमेटी की ओर से अजमेर और राजसमंद में किए गए निरीक्षण की फिजिकल रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर अरावली क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
आज उदयपुर में होगी जनसुनवाई
Aravalli environmental issue : हाई पावर कमेटी सोमवार को उदयपुर के जिला परिषद सभागार में संभाग के विभिन्न जिलों के पर्यावरणप्रेमियों, आम लोगों और खनन कारोबारियों से संवाद करेगी। इसमेंराजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और सलूंबर जिलों से जुड़े लोग अपनी बात रख सकेंगे। यह संवाद दोपहर 3 बजे बाद आयोजित किया जाएगा। कमेटी इससे पहले अलवर, अजमेर और राजसमंद में किए गए निरीक्षण की फिजिकल रिपोर्ट तैयार करेगी।
कमेटी में ये सदस्य शामिल
हाई पावर कमेटी में चेयरपर्सन कंचन देवी के साथ अनिल अंशुल, डॉ. राजेन्द्रकुमार शर्मा, ब्रजमोहन सिंह राठौड़, प्रो. जगदीश कृष्णास्वामी और लक्ष्मीकांत शर्मा शामिल हैं।



