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Rajasthan Gau Mata shelter scheme : राजस्थान की हर ग्राम पंचायत में बनेगा गौमाता आश्रय स्थल

Parmeshwar Singh Chundwat August 9, 2026 1 minute read

Rajasthan Gau Mata shelter scheme : राजस्थान में निराश्रित गोवंश के संरक्षण, चारागाह भूमि के विकास और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल’ योजना का मॉडल तैयार किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय पशुपालन एवं चारागाह वर्ष के रूप में मनाए जाने के बीच प्रस्तावित इस योजना के तहत पहले चरण में राज्य की 457 पंचायत समितियों की एक-एक ग्राम पंचायत में मॉडल गौमाता आश्रय स्थल विकसित किया जाएगा। आने वाले वर्षों में इसे प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों तक चरणबद्ध तरीके से पहुंचाने का प्रस्ताव है। योजना के तहत चयनित ग्राम पंचायत में करीब 20 से 25 हेक्टेयर भूमि पर चारागाह विकास, जल संरक्षण, सघन वृक्षारोपण, तारबंदी, गौमाता शेड, पशु खेली, पानी का स्रोत, चारा भंडारण, स्वयं सहायता समूह के लिए कक्ष और कम्पोस्ट खाद की व्यवस्था की जाएगी। एक मॉडल की अनुमानित लागत 85 लाख रुपए रखी गई है। अलग-अलग कार्यों के लिए राशि संबंधित सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।

निराश्रित गोवंश को मिलेगा व्यवस्थित आश्रय

Rajasthan Gau Mata Ashray Sthal scheme 2026 : योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई पशुपालक अनुत्पादक, अल्प उत्पादक या कृषि कार्य के लिए अनुपयुक्त पशुओं का उचित प्रबंधन नहीं कर पाते। ऐसे पशुओं को खुले में छोड़ दिया जाता है, जिससे वे खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। अनियंत्रित प्रजनन के कारण अनुपयोगी एवं अल्प उत्पादक गोवंश की संख्या में भी वृद्धि होती है। योजना के माध्यम से ऐसे गोवंश को आश्रय देने, उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने और पशुधन की उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और बायोगैस के लिए किया जाएगा, जिससे ग्रामीण स्तर पर अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा हो सकेंगे।

विधानसभा में हुई थी घोषणा

Pandit Deendayal Upadhyaya Charagah Vikas Yojana : योजना दस्तावेज के अनुसार पंचायती राज मंत्री की ओर से विधानसभा में 26 फरवरी 2026 को प्रत्येक पंचायत समिति की न्यूनतम एक ग्राम पंचायत में मॉडल ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय चारागाह विकास एवं गौमाता आश्रय स्थल’ स्थापित करने की घोषणा की गई थी। वहीं राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के तहत चारागाह भूमि के संचालन एवं विकास के लिए ग्राम स्तरीय समिति के गठन तथा नियम 165 के तहत पंचायत भूमि के सर्वेक्षण और अतिक्रमण हटाने का प्रावधान है।

पहले चरण में 457 पंचायत समितियां

Rajasthan Gaushala scheme 2026 : योजना का संचालन चरणबद्ध तरीके से प्रस्तावित है। वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण में राज्य की 457 पंचायत समितियों, जिसमें नवसृजित पंचायत समितियां भी शामिल हैं, की एक-एक ग्राम पंचायत में मॉडल आश्रय स्थल विकसित किया जाएगा। इसके बाद आगामी वर्षों में राज्य की अन्य ग्राम पंचायतों में भी मॉडल चारागाह एवं गौमाता आश्रय स्थल विकसित किए जाएंगे। परियोजना की मॉनिटरिंग पंचायती राज विभाग द्वारा संबंधित विभागों के समन्वय से की जाएगी। 319 पंचायत समितियों में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग को परियोजना क्रियान्वयन एजेंसी बनाए जाने का प्रस्ताव है, जबकि शेष 138 पंचायत समितियों में संबंधित ग्राम पंचायतें क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेंगी।

20 से 25 हेक्टेयर भूमि पर बनेगा मॉडल

Rajasthan pasture development 2026 : प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत में करीब 20 से 25 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जाएगा। भूमि ऐसी होनी चाहिए जहां बरसाती पानी का अत्यधिक भराव न हो। चयनित भूमि की तारबंदी कर उसे सुरक्षित किया जाएगा। चारागाह विकास के लिए करीब 6 हेक्टेयर भूमि में सिल्वी पाश्चर सिस्टम विकसित किया जाएगा। खाई फेंसिंग अथवा वायर फेंसिंग कर सोलर पंप के माध्यम से स्थानीय एवं बहुवर्षीय चारा प्रजातियों की घास विकसित की जाएगी। जल एवं मृदा संरक्षण के लिए SGT, CCT, कंटूर बंड और CPT जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा सकेगा। इसके अलावा करीब 6 हेक्टेयर में सघन वृक्षारोपण किया जाएगा। सोलर पंप और ड्रिप इरिगेशन के माध्यम से लगभग 4 हजार छायादार एवं फलदार पौधों को विकसित करने का प्रस्ताव है।

55×55 फीट का फार्म पॉण्ड

वर्षा जल संरक्षण के लिए करीब 55×55 फीट का फार्म पॉण्ड बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य वर्षा जल को संग्रहित कर वर्षभर गौमाता के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। योजना में मेड़बंदी, कंटूर जुताई, खाल और टांका जैसे जल संरक्षण उपायों का भी उल्लेख है। विशेष रूप से राजस्थान के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव और जल की कमी को देखते हुए जल एवं मृदा संरक्षण पर जोर दिया गया है।

150×30 फीट का गौमाता शेड

गौमाता को धूप, बारिश और सर्दी से बचाने के लिए करीब 150 फीट लंबा और 30 फीट चौड़ा टीन शेड बनाया जाएगा। शेड में अपंग, बूढ़े, अशक्त एवं बीमार गोवंश के लिए अलग व्यवस्था रखने का प्रावधान है। शेड की फर्श पक्की बनाई जाएगी और दोनों तरफ ढलान रखा जाएगा, जिससे सफाई एवं गोबर निकासी आसानी से हो सके। शेड में चारा खाने के लिए नांद की व्यवस्था होगी और पानी पीने के लिए अलग संरचना बनाई जाएगी। गोमाता के विश्राम के लिए जमीन से करीब डेढ़ फीट ऊंचा प्लेटफॉर्म बनाने का भी प्रस्ताव है।

तीन पशु खेलियों और ट्यूबवेल की व्यवस्था

गौमाता के पानी पीने के लिए 50×5 फीट की तीन पशु खेलियों का निर्माण किया जाएगा। वर्षभर पानी की उपलब्धता के लिए ट्यूबवेल अथवा बोरिंग तथा विद्युत कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी। विद्युत कनेक्शन ग्राम पंचायत के नाम से लेने का प्रस्ताव है और आवश्यकता के अनुसार बिजली बिल का भुगतान ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।

75×30 फीट का चारा भंडारण शेड

गोमाता के लिए चारा सुरक्षित रखने के लिए 75×30 फीट का चारा भंडारण शेड बनाया जाएगा। इसमें चारा काटने के लिए कुट्टी मशीन की व्यवस्था भी की जाएगी। चारे की व्यवस्था सामान्य तौर पर ग्राम पंचायत द्वारा किसानों के सहयोग से की जाएगी। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों, CSR, दानदाताओं और भामाशाहों से भी सहायता ली जा सकेगी। फसल कटाई के बाद खेतों में बचे पुआल और अन्य फसल अवशेष को एकत्र कर गोमाता के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

SHG कक्ष और वर्मी कम्पोस्ट शेड

महिला एवं स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी के लिए 30×20 फीट का SHG कक्ष एवं प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। वहीं जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन के लिए 30×75 फीट का वर्मी कम्पोस्ट शेड प्रस्तावित है। इसमें गोबर, गौमूत्र, बचा हुआ चारा और जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। गोबर से बायोगैस उत्पादन तथा गौमूत्र से अर्क एवं पंचगव्य आधारित उत्पाद बनाने की संभावनाएं भी योजना में रखी गई हैं। इन गतिविधियों से प्राप्त आय को चारा एवं आश्रय स्थल के संचालन में उपयोग किया जा सकेगा। गौमूत्र आधारित उत्पादों के लिए आयुर्वेद विभाग से सहयोग लेने का प्रस्ताव है।

85 लाख रुपए की अनुमानित लागत

मॉडल गौमाता आश्रय स्थल की कुल अनुमानित लागत 85 लाख रुपए रखी गई है। इसमें फार्म पॉण्ड के लिए 2.50 लाख, सिल्वी पाश्चर एवं चारागाह विकास के लिए 7 लाख, सघन वृक्षारोपण के लिए 14 लाख, तारबंदी के लिए 8.50 लाख, गौमाता आश्रय स्थल के लिए 15 लाख, पशु खेली के लिए 3 लाख, पानी के स्रोत एवं विद्युत कनेक्शन के लिए 7 लाख, चारा भंडारण शेड के लिए 15 लाख, SHG कक्ष के लिए 4 लाख तथा कम्पोस्ट खाद एवं जैविक खेती के लिए 9 लाख रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। इन कार्यों के लिए MJSA 2.0, PMKSY, VB-GRAM-G, SFC/अन्य योजनाओं से राशि वहन किए जाने का प्रस्ताव है।

लागत का अनुमान पंचायत समिति झोटवाड़ा, जिला जयपुर की प्रचलित BSR 2025-26 के आधार पर तैयार किया गया है। चयनित ग्राम पंचायत की भौगोलिक स्थिति के अनुसार इसमें आवश्यक संशोधन किया जा सकेगा।

GPDP में शामिल होगा प्रोजेक्ट

चयनित भूमि को ग्राम पंचायत विकास योजना GPDP में शामिल किया जाएगा। ग्रामसभा से अनुमोदन के बाद बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति तकनीकी अधिकारियों के सहयोग से गौमाता आश्रय स्थल का नक्शा और कार्ययोजना तैयार करेगी। समिति आश्रय स्थल में पशु चारा, पशुगृह साफ-सफाई, जैविक खाद उत्पादन, पशुओं की संख्या, संरक्षण, संचालन और रखरखाव में सहयोग करेगी।

तीन चरणों में होगा काम

योजना के प्रथम चरण में 20 अगस्त 2026 तक भूमि का चिन्हीकरण, उपयुक्त चारागाह भूमि का चयन और ग्रामसभा से प्रस्ताव का अनुमोदन किया जाना प्रस्तावित है।

दूसरे चरण में बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समितियों को सक्रिय किया जाएगा। चयनित भूमि को GPDP में शामिल कर ग्रामसभा से अनुमोदन लिया जाएगा और तकनीकी अधिकारियों की मदद से नक्शा व कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस चरण की गतिविधियां 31 अगस्त 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य है।

तीसरे चरण में वृक्षारोपण, CPT, वायर फेंसिंग तथा पशु शेड जैसी प्रारंभिक संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। इन गतिविधियों को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का प्रस्ताव है।

चारागाह में रोटेशनल ग्रेजिंग पर जोर

योजना में उन्नत चारागाह विकास रणनीति के तहत उपयुक्त भूमि चयन, मिट्टी सुधार, उन्नत चारा प्रजातियों जैसे सेवन, ग्वार घास और स्टाइलो की बुवाई तथा उचित सिंचाई और पोषण प्रबंधन किया जाएगा। रोटेशनल ग्रेजिंग अपनाकर ओवरग्रेजिंग से बचाव किया जाएगा। विभिन्न प्रकार की घास, दलहनी चारा फसलें जैसे बरसीम और लूसर्न तथा बहुवर्षीय प्रजातियों को मिलाकर उगाने का प्रस्ताव है, ताकि अलग-अलग मौसम में भी चारा उपलब्ध रहे।

सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी निगरानी

चारागाह विकास में स्थानीय ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। जरूरत के अनुसार मनरेगा, CSR एवं अन्य माध्यमों से सहयोग लिया जा सकेगा। योजना में GIS आधारित निगरानी, डिजिटल रिकॉर्ड, ई-पंचायत पोर्टल और KPI आधारित मूल्यांकन प्रणाली का भी प्रावधान है। इससे परियोजना की प्रगति और गतिविधियों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

हर 15 दिन में होगा पशु स्वास्थ्य परीक्षण

नजदीकी पशु चिकित्सालय के प्रभारी द्वारा हर 15 दिन में कम से कम एक बार गौमाता आश्रय स्थल का निरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान पशुओं की बीमारी, उपचार और रोग संबंधी जांच की जाएगी तथा जरूरत के अनुसार गोबर और रक्त के सैंपल लिए जा सकेंगे। ब्लॉक एवं जिला स्तर से भी चारागाह विकास और गौमाता आश्रय स्थल का नियमित निरीक्षण किया जाएगा।

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ग्राम पंचायत करेगी संचालन

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गौमाता आश्रय स्थल का संचालन एवं प्रबंधन ग्राम पंचायत को सौंपा जाएगा। बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति ग्राम पंचायत के निर्देशन में काम करेगी और समय-समय पर आश्रय स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट व सुझाव देगी। गौमाता की देखभाल, साफ-सफाई, सुरक्षा, चारा-पानी और रखरखाव के लिए स्थानीय श्रमिक की व्यवस्था की जाएगी। महात्मा गांधी नरेगा से संबंधित प्रावधानों के अनुसार पौधों के रखरखाव और अन्य कार्यों में श्रमिक नियोजन किया जा सकेगा।

योजना से किसानों को भी मिलेगी राहत

योजना लागू होने पर खुले में घूमने वाले गोवंश को आश्रय मिलने के साथ किसानों की फसलों को नुकसान से राहत मिलने की उम्मीद है। चारागाह विकास से पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध होगा। जल संरक्षण, वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण से पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, बायोगैस और पंचगव्य आधारित उत्पाद तैयार कर ग्रामीण स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकेंगे। स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी से सामुदायिक आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

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Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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