
Bagheri Naka Water Level : राजसमंद। कमजोर मानसून ने जिले की प्रमुख क्षेत्रीय पेयजल योजनाओं में शामिल बाघेरी नाका परियोजना के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। इस मानसून में परियोजना के मुख्य जलस्रोत बाघेरी नाका बांध में पर्याप्त पानी की आवक नहीं हो सकी। इससे आने वाले दिनों में पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बाघेरी नाका बांध की कुल 32.80 फीट भराव क्षमता है, जबकि वर्तमान में इसमें महज 16.20 फीट पानी उपलब्ध है। लगातार जारी पेयजल आपूर्ति को देखते हुए मौजूदा जल भंडार से करीब 40 से 45 दिन तक ही सप्लाई चलने का अनुमान है। ऐसे में समय रहते वैकल्पिक जलस्रोत तैयार नहीं किए गए तो अक्टूबर के बाद 264 गांवों और ढाणियों में पेयजल संकट गहरा सकता है। आपदा राहत एवं बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार 27 सितंबर तक जिले में सिर्फ 404 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जिले में 10 साल की औसत बारिश 786 मिमी है। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक औसत से 382 मिमी कम बारिश हुई है। पिछले साल जिले में 948 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस तुलना में इस बार बारिश करीब 57.38 प्रतिशत कम रही है। पिछले 24 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2002 में 301 मिमी और 2009 में 421 मिमी बारिश हुई थी। इस साल 404 मिमी बारिश के साथ यह 24 वर्षों में तीसरा सबसे कमजोर मानसून माना जा रहा है।
25 प्रमुख बांधों में से 20 खाली
Rajsamand Water Crisis : कम बारिश का असर जिले के जलाशयों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिले के 25 प्रमुख बांधों में से 20 पूरी तरह खाली हैं। वहीं प्रमुख जलस्रोतों में भी सीमित पानी बचा है। राजसमंद झील की कुल क्षमता 30 फीट है, जबकि इसमें फिलहाल 19.20 फीट पानी है। इसी तरह नंदसमंद बांध की 32 फीट क्षमता के मुकाबले 14.20 फीट और चिकलवास में 64 फीट की क्षमता के मुकाबले 52.30 फीट पानी उपलब्ध है।
264 गांवों की पेयजल व्यवस्था बाघेरी पर निर्भर
Rajsamand Water Shortage : बाघेरी नाका बांध खमनोर क्षेत्र का प्रमुख जलाशय होने के साथ ही क्षेत्रीय पेयजल योजना का मुख्य आधार है। सामान्य मानसून के दौरान इस परियोजना से करीब 264 गांवों और ढाणियों में पेयजल आपूर्ति की जाती है। हालांकि, चिकलवास में फिलहाल पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के कारण करीब 81 गांवों में पेयजल आपूर्ति जारी रहने की संभावना है। दूसरी ओर, जिन क्षेत्रों में जलस्रोतों की स्थिति कमजोर होगी, वहां जरूरत के अनुसार टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार ने मांगा इमरजेंसी एक्शन प्लान
Bagheri Naka Dam Water Crisis : बाघेरी नाका बांध में तेजी से घट रहे जलस्तर को देखते हुए जलदाय विभाग और राज्य सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर और जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता से सोमवार तक इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा गया है। जिला प्रशासन की ओर से 30 सितंबर तक तात्कालिक कार्ययोजना को अंतिम रूप देने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पानी खत्म होने से पहले वैकल्पिक स्रोत तलाशने पर जोर
Rajsamand Drinking Water Crisis : विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाघेरी नाका बांध का पानी पूरी तरह खत्म होने से पहले वैकल्पिक जलस्रोत तैयार करने की है। इसके लिए स्थानीय जलस्रोतों और मौजूदा पेयजल व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बाघेरी नाका परियोजना के एक्सईएन किशन खोईवाल के अनुसार, पेयजल के लिए बांध में पानी सीमित मात्रा में बचा है। विभाग सोमवार तक आवश्यक प्लान तैयार करेगा और स्थानीय स्रोतों को ध्यान में रखते हुए आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह बाघेरी नाका परियोजना और इससे जुड़े 264 गांवों के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था तैयार नहीं हुई तो अक्टूबर के बाद कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।



