
लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
Charbhuja Jaljhulni mela : गुलाल- अबीर का गुब्बार, फूलों की बौछार के बीच थाली- मादल की धुन पर थिरकते श्रद्धालुओं में चारभुजानाथ के दर्शन की उत्सुकता बरबस ही झलक रही थी। धर्मनगरी की सरहदें श्रद्धा के रंग में रंगी भक्तों की टोलियों के जयकारों से गूंज उठी। मंदिर से ज्यों ही ठाकुरजी का बेवाण शाही लवाजमे के साथ निकला, तो गुलाल अबीर की घनघोर वर्षा से सराबोर श्रद्धालुओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट, जयकारों व फूल बरसाकर अगवानी की। ठाकुरजी के शाही दर्शनों के लिए लोग घंटो पहले ही छत, दीवारों पर बैठ व खड़े हो गए। परिचित, रिश्तेदारों के मकानों के गोखड़े, खिड़कियों में भी लोगों ने कई घंटों पहले जगह बना दी, जो बेसब्री से ठाकुरजी के बेवाण का इंतजार कर रहे थे। मकान, खिडक़ी से श्रद्धालु पहले गुलाल- अबीर की बौछार कर रहे थे, जो ठाकुरजी का बेवाण आते ही फूल बरसाने शुरू हो गए। मंदिर से दूध तलाई तक गुलाल अबीर से रंगी राह पर भक्ति के रंग में रंगे श्रद्धालु जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे थे। ठाकुरजी का बेवाण ज्यों ज्यों दूधतलाई की ओर आगे बढऩे लगा, त्यों त्यों मकानों, छत से उतरे लोग भी ठाकुरजी के शाही लवाजमे में शोभायात्रा के रूप में शामिल हो गए। हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की…, जय छौगाला छैल की…, प्रभु आपकी जय हो… सरीखे जयकारों के बीच बेवाण विभिन्न मार्गों से होकर दूध तलाई पहुंचा। छतरी पर अल्पविश्राम के बाद ठाकुरजी का स्नान मनोरथ हुआ। गुलाल अबीर से खेलने की अनूठी परंपरा के चलते मेले में शामिल हर शख्स रंग से सराबोर हो गया और कस्बे की हर गली एवं चौक तक रंगीन हो गया। नालियों का पानी भी रंगमय हो गया।

charbhuja jal jhulni gyaras : कुछ ऐसा ही नजारा था राजसमंद जिले में गढ़बोर कस्बे में जलझूलनी एकादशी पर चारभुजानाथ के शाही शोभायात्रा का। शाही बेवाण में ठाकुरजी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखा। बेवाण के आगे पुजारी हाथों में छड़ी, गोटा, मयूरपंख, भाला, तलवार, बंदूक सहित सोने चांदी के आयुध लिए चल रहे थे। मेवाड़ी पगड़ी, गले में स्वर्णहार, धोती कुर्ता पहने पुजारी थाली- मादल, नगाड़े पर थिरकते हुए आगे बढ़ रहे थे। पीछे सोने की पालकी में ठाकुरजी बिराजे हुए थे, जो पुजारियों के सुरक्षा घेरे में थी। ज्यों ही बेवाण नक्कार खाना चौक पहुंचा, तो चारों ओर से रंगबिरंगी गुलाल-अबीर एवं फूलों की बौछार हुई और बेवाण को छुने के लिए भक्तों में होड़ मच गई। इस दौरान उड़ रही गुलाल-अबीर की परवाह किए बगैर हजारों आंखें येनकेन ठाकुरजी के दर्शन को लालायित दिखी। बेवाण होली चौक से रामी तलाई स्थित छतरी पर पहुंची, जहां हरजस का गान किया गया। कुछ देर रूककर बेवाण दूध तलाई पहुंचा, जहां पानी में खड़े भक्तों ने पानी की बौछार कर बेवाण में बिराजित ठाकुरजी नहलाने की रस्म निभाई। फिर ठाकुरजी छतरी में गए, जहां पंचामृत से पूजन हुआ व दही का भोग लगाया। इस दौरान बैंड, थाली, मृदंग, नृसिंगा बजाते कलाकार एवं भक्तिमय हरजस के साथ श्रद्धालु भक्ति की मस्ती में नाच रहे थे।

स्नान के बाद ठाकुरजी की परिक्रमा
charbhuja mandir : दूध तलाई में ठाकुरजी की छवि को स्नान की रस्म के बाद सेवक ने सिर पर बिराजित कर परिक्रमा के लिए आगे बढ़े। ज्यों ही ठाकुरजी का विग्रह पाल पर पहुंचा, तो तलाई में खड़े भक्तों ने फव्वारेनुमा पानी की बौछार कर ठाकुरजी के साथ पुजारियों को भी स्नान कराया। ठाकुरजी के दक्षिण स्थित छतरी पर पहुंचने पर झीलवाड़ा ठिकाना की ओर से अमल का भोग धराया गया। फिर मुख्य छतरी पर पहुंचने पर ठाकुरजी का विशेष शृंगार कर हरजस गान किया। यहां से ठाकुरजी को चांदी के बेवाण में बिराजित कर पुजारीगण लवाजमे के साथ वापस रवाना हुए, जो शाम करीब पांच बजे तक मंदिर पहुंचे।

मनुहार से श्रद्धालुओं को बांटा प्रसाद
Charbhuja Mandir : मंदिर से दूध तलाई तक विभिन्न सामाजिक संगठनों, नवयुवक मण्डलों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रसाद की विशेष स्टालें लगाई गई। पेयजल, लस्सी, सेब, साबुदाणा खिचड़ी, आइसक्रीम, चिप्स, ड्राइफू्रट, मिश्री आदि का प्रसाद वितरित किया गया।

तडक़े से ही दर्शनों का इंतजार
charbhuja temple gadbor : मंदिर में सुबह चार बजे से ही छोगाला छैल के दर्शनों के लिए श्रद्धालु कतारबद्ध हो गए। मंदिर से बस स्टैंड तक भक्तगण कतार में खड़े रहे। मंगला दर्शन खुलने पर मंदिर में दर्शनार्थियों का हुजूम उमड़ पड़ा। उसके बाद सुबह 11.30 बजे तक अनवरत दर्शन होते रहे, मगर कतार और लंबी होती गई। ठीक 11.35 बजे दर्शन बंद होने पर सभी लोग मंदिर चौक में पहुंच गए, जहां बेवाण से ठाकुरजी के दर्शन किए।
द्वारकाधीश मंदिर में गुलाल से सराबोर श्रद्धालु

जलझूलनी एकादशी शहर के साथ जिलेभर में चहुअओर लोग गुलाल- अबीर से सराबोर नजर आए। श्री द्वारकाधीश मंदिर में भी हर दर्शनों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। चारभुजा मेले से लौटने वाले हर शख्स के कदम प्रभु श्री की ओर ही दिखे। राजसमंद शहर में अल सुबह से चारभुजा मेले में जाने वाले श्रद्धालुओं का आगमन शाम चार बजे शुरू हुआ। इस कारण द्वारकाधीश मंदिर में शाम पांच बजे खुले दर्शनों लोगों की काफी भीड़ रही, जिनमें ज्यादातर श्रद्धालु गुलाल, अबीर से सराबोर थे। प्राचीन गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ के चलते मेले सा माहौल बन गया। विभिन्न वाहनों के माध्यम से शहर में पहुंचने वाले दर्शनार्थियों ने प्रभु श्री के दर्शन करने के बाद ही गंतव्य की यात्रा तय की। प्रभु श्री के उत्थान से लेकर शयन तक के दर्शनों में काफी भीड़ रही। शहर की सडक़ों पर गुलाल के रंग में रंगे श्रद्धालुओं की रेलमपेल बनी रही। खास तौर से मुखर्जी चौराहा से सूरजपोल दरवाजा एवं मदिर मार्ग तो शाम 8 बजे तक व्यस्त रहा। इस दौरान चारभुजा से आने वाले सभी श्रद्धालु गुलाल और अबीर से इतने सराबोर थे कि पास खड़े घनिष्ठ मित्र भी एक दूसरे को पहचानने में संकोच कर रहे थे।
निकली रामरेवाडिय़ा, कराया ठाकुरजी को स्नान
Charbhuja Nath Temple Rajsamand : जलझूलनी एकादशी पर बुधवार को चारभुजा मंदिरों से श्रद्धा, परंपरा एवं राजसी ठाठ बाट से ठाकुरजी की रामरेवाडिय़ा निकाली गई। मंदिर में वैदिक पूजा अनुष्ठान के बाद ठाकुरजी के प्रतिरुप को परंपरानुसार तालाब, तलाई एवं बावड़ी पर ले जाकर स्नान की रस्म निभाई गई। जिला मुख्यालय पर सदर बाजार राजनगर, मालीवाड़ा के चारभुजा मंदिरों से ठाकुरजी की रामरेवाडिय़ां गाजे बाजे रवाना हुई, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर नौचोकी पाल पहुंची। रामरेवाड़ी में गुलाल अबीर की बौछार के चलते श्रद्धालु गुलालमय हो गए और मुख्य मार्ग भी लाल रंग में रंग गए। किशोरनगर स्थित चारभुजानाथ मंदिर से भी ठाकुरजी की कलालवाटी होते हुए नौचोकी पाल पहुंची, जहां जयकारों के साथ स्नान कराया गया। जावद के चारभुजा मंदिर से ठाकुरजी की रामरेवाड़ी ढोल ढमाकों के साथ रवाना हुई, जो प्रमुख मार्गों से होकर जावद तालाब की पाल पहुंची, जहां स्नान की रस्म निभाई। इसी तरह धोइंदा के विभिन्न चार चारभुजा मंदिरों की अलग अलग रामरेवाडिय़ा तलाई पर पहुंची। रामरेवाड़ी में श्रद्धालु गुलाल अबीर उड़ाते हुए व पुष्पवर्षा करते हुए नाचते- गाते चल रहे थे। तलाई पर ठाकुरजी के विग्रह को विधि विधान से स्नान कराया। इसके अलावा नाथद्वारा, रेलमगरा, कुंभलगढ़, देवगढ़ के साथ जिलेभर में जलझूलनी एकादशी का पर्व श्रद्धा एवं परम्परा के तहत मनाया गया।




