
India economic crisis warning : देश में इन दिनों महंगाई, युद्ध और वैश्विक तनाव को लेकर लगातार चर्चा तेज हो रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर सोने-चांदी के दाम तक तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले समय में देश किसी बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है?
इस चर्चा को और बल तब मिला जब देश के बड़े उद्योगपति और बैंकर उदय कोटक ने मंगलवार को कहा कि “एक बड़ा झटका आने वाला है, मुश्किल समय के लिए तैयार रहिए।” इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील कर चुके हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सरकार को किस बात की चिंता है? क्या सच में आने वाले समय में आम लोगों पर बड़ा आर्थिक दबाव पड़ सकता है? और अगर हालात बिगड़ते हैं तो सरकार और आम जनता को क्या करना होगा? आज के इस एक्सप्लेनर में इन्हीं सवालों के जवाब समझते हैं।
संकट की आशंका क्यों बढ़ रही है?
1. प्रधानमंत्री की 7 बड़ी अपीलों ने बढ़ाई चिंता
PM Modi latest warning : 10 मई को तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी इस सदी का सबसे बड़ा संकट थी, लेकिन अमेरिका-ईरान युद्ध जैसे हालात इस दशक के सबसे गंभीर संकटों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने देशवासियों से सात महत्वपूर्ण अपीलें कीं, जिनमें ईंधन की बचत, गैरजरूरी खर्च कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने जैसी बातें शामिल थीं। प्रधानमंत्री के संबोधन के कुछ ही समय बाद बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्टर जारी किया, जिसमें “राष्ट्र प्रथम, कर्तव्य सर्वोपरि” का संदेश दिया गया। राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार जनता को संभावित आर्थिक दबाव के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध 27 फरवरी से जारी है। शुरुआत में सरकार लगातार हालात सामान्य बताती रही, लेकिन अब प्रधानमंत्री खुद सार्वजनिक रूप से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं।
2. वित्त मंत्रालय ने भी जताई चिंता
India fuel price hike news : 29 अप्रैल को जारी वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में साफ कहा गया कि भारत इस समय मजबूत घरेलू मांग और वैश्विक उथल-पुथल के बीच खड़ा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कई देशों ने महंगे तेल का बोझ जनता पर डालना शुरू कर दिया है और भारत भी लंबे समय तक इससे बच नहीं सकता। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी संकेत दिए कि सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। पिछली तिमाही में उन्हें लगभग एक लाख करोड़ रुपए का घाटा झेलना पड़ा। पुरी ने कहा कि यह स्थिति ज्यादा समय तक जारी रही तो तेल कंपनियों के लिए संकट और गहरा हो सकता है।

3. सोने-चांदी पर अचानक बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी
13 मई को केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दी। खास बात यह है कि 2024 के बजट में इसी ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत किया गया था।
सरकार के इस फैसले का असर तुरंत बाजार में दिखाई दिया। एक ही दिन में सोना करीब 9 हजार रुपए और चांदी 22 हजार रुपए महंगी हो गई। फिलहाल 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1.60 लाख रुपए और 1 किलो चांदी का भाव 2.87 लाख रुपए तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और गोल्ड इंपोर्ट कम करने की कोशिश कर रही है।
आखिर आने वाला संकट क्या हो सकता है?
1. पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी बढ़ोतरी संभव
Petrol diesel price increase : पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। 27 फरवरी को जहां क्रूड ऑयल 67 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसकी कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। यानी करीब 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बावजूद भारत में अभी तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसका सबसे बड़ा बोझ सरकारी तेल कंपनियां उठा रही हैं। इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों को अप्रैल से जून तिमाही में करीब 1.2 लाख करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान है। यदि यही स्थिति बनी रही तो अगले छह महीनों में इन कंपनियों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल करीब 16 रुपए और डीजल 17 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में पिछले दो महीनों में तेल की कीमतें बढ़ चुकी हैं। पाकिस्तान में 44%, अमेरिका में 42% और चीन में 31% तक ईंधन महंगा हुआ है।
2. महंगाई बढ़ने से मिडिल क्लास पर बड़ा असर
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि ईंधन की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो थोक महंगाई दर में लगभग 1 प्रतिशत का उछाल आ सकता है।
यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
यदि कोई परिवार हर महीने 50 लीटर पेट्रोल खर्च करता है और पेट्रोल 15 रुपए महंगा हो जाता है, तो उसे हर महीने 750 रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
इसके अलावा:
- स्कूल बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का किराया बढ़ सकता है।
- फल, सब्जियां और अनाज महंगे हो सकते हैं।
- ऑनलाइन डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ सकता है।
- छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के सदस्य शैलेंद्र गुप्ता के मुताबिक पहले से ही 10 प्रतिशत ट्रक खड़े हैं। यदि डीजल और महंगा हुआ तो 30 प्रतिशत गाड़ियां बंद हो सकती हैं।
3. खाद संकट से खेती पर असर की आशंका
India inflation crisis update : भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। यूरिया, DAP और पोटाश जैसी खादों की सप्लाई युद्ध और ट्रांसपोर्ट संकट के कारण प्रभावित हो रही है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग:
- 25-30% यूरिया,
- 90% DAP,
- और 100% पोटाश विदेशों से खरीदता है।
यूरिया उत्पादन के लिए नेचुरल गैस जरूरी होती है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, जहां फिलहाल तनावपूर्ण हालात हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में यूरिया उत्पादन में करीब 27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस समय भारत के पास करीब 19.02 मिलियन टन खाद का स्टॉक है, जबकि खरीफ सीजन में लगभग 39.05 मिलियन टन की जरूरत होगी। यदि सप्लाई बाधित हुई तो किसानों को खाद संकट का सामना करना पड़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई राज्यों में खाद की भारी कमी देखने को मिली थी।
सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है?
60 दिन का कच्चे तेल का स्टॉक तैयार
सरकार का दावा है कि देश के पास लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल रिजर्व मौजूद है। विशाखापट्टनम, मंगलुरु और पादुर के स्टोरेज प्लांट में बड़ी मात्रा में तेल संग्रहित किया गया है।
LPG उत्पादन में बढ़ोतरी
सरकार ने जामनगर, पानीपत, मथुरा और गुवाहाटी समेत कई रिफाइनरियों में LPG उत्पादन बढ़ा दिया है। पहले जहां रोजाना 35-36 हजार मीट्रिक टन LPG बनती थी, अब इसे बढ़ाकर 50-54 हजार मीट्रिक टन तक पहुंचा दिया गया है।
खाद का अतिरिक्त स्टॉक तैयार
सरकार का कहना है कि इस समय खाद का स्टॉक सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा है। साथ ही किसानों पर बोझ कम करने के लिए खाद सब्सिडी के लिए बजट में 1.70 लाख करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है।
क्या भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी घरेलू मांग है। देश की GDP का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खपत से आता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में बनी हुई है। हालांकि युद्ध और महंगाई के कारण GDP ग्रोथ 7.7 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत तक आ सकती है, लेकिन फिर भी यह दुनिया के कई बड़े देशों से बेहतर मानी जा रही है।

आम लोग खुद को कैसे तैयार रखें?
इमरजेंसी फंड बढ़ाएं
फाइनेंशियल प्लानर स्वाती कुमारी के अनुसार हर परिवार के पास कम से कम 6 महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड होना चाहिए। यदि किसी परिवार का मासिक खर्च 50 हजार रुपए है, तो उसके पास कम से कम 3 से 5 लाख रुपए का इमरजेंसी फंड होना जरूरी है।
गैरजरूरी खर्च टालें
नई कार खरीदने, विदेश यात्रा करने या बड़े खर्च करने की योजना है तो फिलहाल कुछ समय के लिए उसे टालना बेहतर होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस कवर बढ़ाएं
महंगाई और आर्थिक संकट के दौरान मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ सकते हैं। इसलिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस रखना बेहद जरूरी है।
सही सेक्टर में निवेश करें
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रेलवे और फार्मा सेक्टर में निवेश बेहतर रिटर्न दे सकता है। कुल मिलाकर, हालात फिलहाल नियंत्रण में जरूर हैं, लेकिन वैश्विक तनाव और महंगाई के संकेत आने वाले समय में आर्थिक दबाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे में सरकार भी तैयारी कर रही है और आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।



