
Jagdeep Dhankhar Resignation : 21 जुलाई 2025 की रात को भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके लिए स्वास्थ्य कारणों को जिम्मेदार बताया। 74 वर्षीय धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। कुछ ही दिन पहले, 10 जुलाई को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “ईश्वर की कृपा रही तो मैं अगस्त 2027 में रिटायर हो जाऊंगा।”
धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंपा। अपने पत्र में उन्होंने लिखा, “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए मैं तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं।” उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। हालांकि, उनका इस्तीफा राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा। धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था, जिसमें उन्हें 725 में से 528 वोट प्राप्त हुए थे, जबकि अल्वा को 182 वोट मिले थे।
vice president jagdeep dhankhar : वर्तमान में संसद का मानसून सत्र चल रहा है, और उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ राज्यसभा के सभापति की भूमिका निभा रहे थे। सत्र के बीच में इस्तीफा देने वाले वह पहले उपराष्ट्रपति हैं। साथ ही, वह कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा देने वाले तीसरे उपराष्ट्रपति भी हैं।
अगले उपराष्ट्रपति की दौड़ में JDU सांसद हरिवंश
Vice President India : धनखड़ के इस्तीफे के बाद नए उपराष्ट्रपति की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बिहार से जदयू सांसद और वर्तमान राज्यसभा उपसभापति हरिवंश संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। वह 2020 से उपसभापति की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनका कार्यकाल भी इस महीने समाप्त हो रहा है। यदि धनखड़ का इस्तीफा स्वीकार होता है, तो नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक राज्यसभा के उपसभापति ही सभापति की जिम्मेदारी संभालेंगे (अनुच्छेद 91 के तहत)। हालांकि, संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का कोई प्रावधान नहीं है।
यदि उपराष्ट्रपति का पद खाली है और राष्ट्रपति भी अनुपस्थित हैं, तो राष्ट्रपति का पदभार भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को सौंपा जाता है। नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की कोई निश्चित समय-सीमा संविधान में नहीं है।
धनखड़ की तबीयत पहले भी बिगड़ी थी
Monsoon Session Parliament : पिछले महीने, 25 जून 2025 को उत्तराखंड के कुमाऊं यूनिवर्सिटी के गोल्डन जुबली समारोह में शामिल होने के बाद धनखड़ की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें नैनीताल राजभवन ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। कार्यक्रम के बाद वह पूर्व सांसद महेंद्र सिंह पाल के साथ बाहर निकले थे, लेकिन अचानक सीने में दर्द होने पर उन्हें सहारा देकर ले जाना पड़ा। इसके अलावा, 9 मार्च 2025 को भी सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के AIIMS में भर्ती किया गया था, जहां से 12 मार्च को उन्हें छुट्टी मिली थी।

विपक्ष ने उठाए सवाल
धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा, “इस अप्रत्याशित इस्तीफे के पीछे कुछ और भी है। पीएम मोदी को धनखड़ से मन बदलने के लिए कहना चाहिए। यह राष्ट्रीय हित में होगा, खासकर किसान समुदाय के लिए।” शिवसेना (UBT) नेता आनंद दुबे ने कहा, “स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा चिंताजनक है। हम उनके स्वास्थ्य की कामना करते हैं। लेकिन सत्र के पहले दिन इस्तीफा देना हैरान करने वाला है। अगर स्वास्थ्य कारण था, तो इस्तीफा सत्र से पहले या बाद में भी दिया जा सकता था।”
इस तरह राष्ट्रपति के नाम लिखा इस्तीफा
माननीय राष्ट्रपति जी .. सेहत को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह को मानने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(a) के अनुसार अपने पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत के राष्ट्रपति में गहरी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आपका समर्थन अडिग रहा, जिनके साथ मेरा कार्यकाल शांतिपूर्ण और बेहतरीन रहा। मैं माननीय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है। माननीय सांसदों से मुझे जो स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला है, वह मेरी स्मृति में हमेशा रहेगा। मैं इस बात के लिए आभारी हूं कि मुझे इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में जो अनुभव और ज्ञान मिला, वह अत्यंत मूल्यवान रहा। यह मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात रही है कि मैंने भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और इस परिवर्तनकारी युग में उसके तेज विकास को देखा और उसमें भागीदारी की। हमारे राष्ट्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण दौर में सेवा करना मेरे लिए सच्चे सम्मान की बात रही। आज जब मैं इस सम्माननीय पद को छोड़ रहा हूं, मेरे दिल में भारत की उपलब्धियों और शानदार भविष्य के लिए गर्व और अटूट विश्वास है। गहरी श्रद्धा और आभार के साथ, जगदीप धनखड़

जगदीप धनखड़ की बायोग्राफी
Jagdeep Dhankhar Biography : जगदीप धनखड़ एक भारतीय राजनेता और वकील हैं, जिन्होंने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। उनका जन्म राजस्थान के एक छोटे से गाँव में हुआ था, और उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से कानून और राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। नीचे उनकी बायोग्राफी को एक टेबल के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उनके नाम, पिता का नाम, जन्म, शिक्षा, पत्नी, परिवार, करियर और उपलब्धियों का विवरण शामिल है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नाम | जगदीप धनखड़ (Chaudhary Jagdeep Dhankhar) |
| पिता का नाम | गोपाल चंद (Gokal Chand) |
| माता का नाम | केसरी देवी (Kesari Devi) |
| जन्म | 18 मई 1951, किठाना गाँव, झुंझुनू जिला, राजस्थान |
| शिक्षा | – प्रारंभिक शिक्षा: किठाना गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल और घारधना गवर्नमेंट मिडिल स्कूल – हाई स्कूल: सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ (इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा मान्यता प्राप्त) – स्नातक: बी.एससी. (फिजिक्स ऑनर्स), महाराजा कॉलेज, जयपुर (राजस्थान विश्वविद्यालय) – कानून: एलएलबी, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर |
| पत्नी | डॉ. सुदेश धनखड़ (Ph.D. in Economics, बनस्थली विद्यापीठ) |
| परिवार | – बेटी: कामना धनखड़ (शादीशुदा, कार्तिकेय वाजपेयी से) – भाई: रणदीप धनखड़, कुलदीप धनखड़ (राजनेता) – बहन: इंद्रा धनखड़ |
| करियर | – 1979: राजस्थान बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत – 1987: राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सबसे युवा अध्यक्ष – 1989-1991: झुंझुनू (राजस्थान) से 9वीं लोकसभा में सांसद (जनता दल) – 1990: चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री – 1993-1998: किशनगढ़ (राजस्थान) से विधायक (10वीं राजस्थान विधानसभा, कांग्रेस) – 1990-2019: सुप्रीम कोर्ट में सीनियर अधिवक्ता (संवैधानिक कानून, स्टील, कोल, खनन, और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता में विशेषज्ञता) – 2016: सुप्रीम कोर्ट में सतलुज नदी जल विवाद में हरियाणा का प्रतिनिधित्व – 2019-2022: पश्चिम बंगाल के 28वें राज्यपाल – 2022-2025: भारत के 14वें उपराष्ट्रपति (6 अगस्त 2022 को निर्वाचित, 11 अगस्त 2022 को शपथ) |
| उपलब्धियां | – 1990: राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा सीनियर अधिवक्ता के रूप में नामित, सबसे वरिष्ठ सीनियर अधिवक्ता बने – 2015: राजस्थान में जाट समुदाय को ओबीसी दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका – 2022: उपराष्ट्रपति चुनाव में 528 वोटों (74.37%) के साथ ऐतिहासिक जीत, 1992 के बाद सबसे बड़ा अंतर – 2023: राज्यसभा में उपसभापति पैनल का पुनर्गठन, 17 महिला सदस्यों को शामिल कर लैंगिक समानता को बढ़ावा – अंतरराष्ट्रीय अनुभव: पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कोर्ट के सदस्य (3 वर्ष) – राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक मूल्यों, आर्थिक सुधारों, और संसदीय मर्यादा के लिए वकालत |
अतिरिक्त जानकारी
- राजनीतिक दल: जगदीप धनखड़ ने अपने करियर में जनता दल (1988), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1991), और भारतीय जनता पार्टी (2003) से जुड़े रहे।
- विवाद: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कई बार सार्वजनिक विवाद हुए, विशेष रूप से 2021 के चुनाव के बाद हिंसा को लेकर।

- इस्तीफा: 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया, जो संसद के मानसून सत्र के बीच में हुआ, जिससे वह सत्र के दौरान इस्तीफा देने वाले पहले उपराष्ट्रपति बने।
- यात्रा: जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी ने अमेरिका, कनाडा, यूके, इटली, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन, हांगकांग, और सिंगापुर जैसे देशों की यात्रा की है।
- रुचियाँ: वह कॉफी के शौकीन हैं और किसानों के अधिकारों के लिए वकालत करते रहे हैं, खासकर अपने ग्रामीण मूल को रेखांकित करते हुए।
जगदीप धनखड़ का सफर एक ग्रामीण गाँव से देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद तक की प्रेरणादायक कहानी है, जो शिक्षा, कानूनी विशेषज्ञता, और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
