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Raising wildlife : तोता, कछुआ पालने पर हो सकती है 7 साल की सजा, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में प्रावधान

Jaivardhan News February 17, 2025 1 minute read

Raising wildlife : घर में तोता, कछुआ, सारस, खरगोश या मैना पालना एक सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत यह गैरकानूनी है। अगर कोई व्यक्ति इन पक्षियों या अन्य संरक्षित वन्यजीवों को घर में रखता है और शिकायत होती है, तो उसे 7 साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा, भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

Wildlife Protection Act : वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत वन्यजीवों का पालन और उनका व्यापार अवैध है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर सजा हो सकती है, लेकिन आम जनता को उचित जानकारी देने और वन्यजीवों को बचाने के लिए भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।कोटा जिले में वन विभाग के उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर के अनुसार, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत भारतीय तोता, मैना, गिलहरी, लंगूर, स्टार कछुआ, सांप, मोर, बंदर, उल्लू, तीतर, बाज, हिरण, सारस, हाथी, और कई अन्य प्रजातियों को पालना प्रतिबंधित है। इनका अवैध रूप से घरों में पालन करने पर 3 से 7 साल की सजा हो सकती है और जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है।

वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त भी अवैध

सिर्फ इन प्रजातियों को पालना ही नहीं, बल्कि उनकी खरीद-फरोख्त करना, उनके अंगों जैसे नाखून, हड्डी, मांस, बाल आदि का रख-रखाव भी गैरकानूनी है। इस पर वन विभाग की नजर है और इस संबंध में उड़नदस्ता टीम बनाई गई है, जो कार्रवाई करती है। इसके तहत वन विभाग कोटा की टीम द्वारा 3-4 महीनों में करीब 80 तोता और 38 कछुए रेस्क्यू किए गए हैं। हालांकि, अधिकांश लोग अज्ञानता के कारण ही इनका पालन कर रहे थे और उन्हें वन्यजीव प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नियमों की जानकारी नहीं थी।

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आम जनता से अपील – अपनी जिम्मेदारी निभाएं

यदि किसी के पास इन संरक्षित पक्षियों या वन्यजीवों को रखा हुआ है, तो उसे नजदीकी चिड़ियाघर में छोड़ने का कार्य करें। शिकायत करने पर वन विभाग इन प्रजातियों का रेस्क्यू करेगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शिकायत करने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पिंजरे में रखे तोतों को उड़ान में दिक्कत

रेस्क्यू किए गए अधिकांश तोते उड़ने में सक्षम नहीं होते क्योंकि वे छोटे पिंजरे में बंद थे। इन तोतों को आज़ादी देने के लिए उन्हें बड़े पिंजरे में रखा जाता है, ताकि वे दोबारा उड़ना सीख सकें। जब वे उड़ान भरने में सक्षम हो जाते हैं, तब उन्हें फिर से जंगल में छोड़ दिया जाता है।

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वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट क्या है | Wildlife Protection Act

Wildlife Protection Act : भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (1972) लागू किया गया। यह कानून वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की प्रजातियों को समाप्त होने से बचाना और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना है। इस एक्ट का उद्देश्य वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा करना है। यह अधिनियम शिकार, व्यापार, और वन्यजीवों के शोषण को रोकने के लिए कठोर सजा और दंड का प्रावधान करता है। इसके माध्यम से भारत में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कई संरक्षित क्षेत्रों, जैसे नेशनल पार्क, वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries), और बायोस्फीयर रिजर्व्स की स्थापना की गई।

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (1972) भारत के वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस एक्ट ने न केवल वन्यजीवों को संरक्षण प्रदान किया, बल्कि उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा भी की है। हालांकि, इसे सफल बनाने के लिए जागरूकता और सख्त निगरानी की आवश्यकता है, ताकि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारे वन्यजीवों और उनके आवासों को बचा सकें।

मुख्य प्रावधान:

  1. संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना: इस अधिनियम के तहत भारत में कई राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) और वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों में शिकार और अन्य मानव गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं ताकि वन्यजीवों को अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रूप से जीवन जीने का अवसर मिले।
  2. वन्यजीवों की सूची: वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में विभिन्न वन्यजीवों की एक सूची बनाई गई है, जिन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है। इन प्रजातियों को Schedule I से Schedule IV तक वर्गीकृत किया गया है। Schedule I में वे प्रजातियाँ आती हैं जो अत्यधिक संकटग्रस्त हैं और इनकी सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
  3. शिकार और व्यापार पर प्रतिबंध: इस अधिनियम में अवैध शिकार और वन्यजीवों के अंगों का व्यापार भी अपराध माना जाता है। इसमें वन्यजीवों को मारने, पकड़ने या उनके अंगों का व्यापार करने पर कठोर दंड का प्रावधान है। इस प्रकार से अवैध शिकार और व्यापार पर रोक लगाई जाती है।
  4. वन्यजीवों की अवैध गिरफ्तारी और व्यापार पर नियंत्रण: यह एक्ट वन्यजीवों की अवैध गिरफ्तारी और उनकी तस्करी को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाता है। इसमें अधिकारियों को वन्यजीवों की तस्करी के मामलों की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।
  5. जमानत और दंड: वन्यजीवों के शिकार और उनके अंगों का व्यापार करने वालों के लिए इस एक्ट में कड़ी सजा का प्रावधान है। आरोपित व्यक्ति को जेल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह सजा अपराध की गंभीरता और प्रकृति पर निर्भर करती है।
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सफलताएँ और चुनौतियाँ:

सफलताएँ:

  • इस अधिनियम की वजह से भारत में कई संकटग्रस्त प्रजातियाँ, जैसे बाघ, हाथी, और गैंगेटिक डॉल्फिन, संरक्षित हो पाई हैं।
  • कई राष्ट्रीय पार्क और अभयारण्यों की स्थापना ने वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान किया है।

चुनौतियाँ:

  • हालांकि यह अधिनियम वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन जंगली जानवरों की अवैध शिकार और तस्करी अब भी एक गंभीर समस्या है।
  • अधिक जनसंख्या और मानव-वन्यजीव संघर्ष भी वन्यजीवों के संरक्षण में बाधक बन रहे हैं।

कार्रवाई और सजा के प्रावधान

वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट (1972) में वन्यजीवों के शिकार, तस्करी, और उनके अंगों के व्यापार पर कठोर दंड और कार्रवाई के प्रावधान हैं। इस एक्ट के तहत वन्यजीवों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए हैं।

  1. अवैध शिकार और गिरफ्तारी: अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से शिकार करता है या वन्यजीवों को पकड़ता है, तो उसे कठोर सजा दी जा सकती है। इसके तहत जेल की सजा या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। शिकार करने पर न्यूनतम तीन साल की जेल और अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  2. वन्यजीवों के अंगों का व्यापार: वन्यजीवों के अंगों का व्यापार करना या उन्हें तस्करी के लिए ले जाना भी अपराध है। इस पर कठोर सजा दी जाती है, जिसमें अधिकतम सात साल तक की जेल और भारी जुर्माना हो सकता है।
  3. अधिकारियों की शक्ति: इस एक्ट के तहत वन्यजीव अधिकारियों को किसी भी अपराध की जांच करने और दोषियों को गिरफ्तार करने का अधिकार प्राप्त है।

FAQs : वन्यजीव पालने पर लोगों के सवाल

1. घर में पक्षी पालने का सपना देख रहे हैं?

उत्तर: घर में पक्षी पालने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, क्योंकि पक्षी सुंदर होते हैं और उनके होने से घर में ताजगी और जीवन का अहसास होता है। हालांकि, पक्षी पालने से पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमें उनके लिए सही वातावरण, पोषण, और देखभाल प्रदान कर सकें।

2. विदेशी प्रजाति के वन्यजीव पालना हुआ आसान, यह प्रक्रिया हुई

उत्तर: विदेशी प्रजातियों के वन्यजीव पालने की प्रक्रिया कुछ मामलों में आसान हो सकती है, लेकिन यह प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक हो सकता है। कई विदेशी प्रजातियों को भारत में लाना और पालना गैरकानूनी भी हो सकता है, क्योंकि इससे स्थानीय जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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3. कबूतर पालने वालों पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

उत्तर: अगर कबूतर पाले जाने के दौरान उन्हें उचित देखभाल नहीं मिलती या यदि यह पक्षी बिना किसी अनुमति के पाले जाते हैं, तो इसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। पक्षियों की सही देखभाल और उनका संरक्षण जरूरी है।

4. वन्यजीव पालन: क्या यह संकटग्रस्त प्रजातियों की मदद करता है?

उत्तर: वन्यजीव पालन कभी-कभी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में मदद कर सकता है, लेकिन यह तब ही संभव है जब उसे वैज्ञानिक तरीके से और प्राकृतिक वातावरण में किया जाए। वन्यजीवों का पालन वंशवृद्धि और संरक्षण के उद्देश्य से किया जाए तो ही यह मददगार हो सकता है।

5. सारस समेत कोई भी वन्य जीव पालना अपराध

उत्तर: हां, सारस और अन्य वन्यजीवों को बिना अनुमति के पालना भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अपराध है। ऐसे जीवों को पकड़ना, रखना या नुकसान पहुंचाना कानूनन अवैध है और इसके लिए सजा हो सकती है।

6. वन्यजीवों से हमें क्या लाभ है?

उत्तर: वन्यजीव हमें पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने, जैव विविधता में योगदान, और पर्यावरण की सफाई में मदद करते हैं। वे कई प्राकृतिक संसाधनों के स्रोत भी होते हैं जो मनुष्यों के लिए उपयोगी हैं।

7. हम वन्यजीवों का संरक्षण कैसे कर सकते हैं?

उत्तर: वन्यजीवों का संरक्षण करने के लिए हमें उनकी प्राकृतिक आवासों की रक्षा करनी चाहिए, अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार को रोकना चाहिए, और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए।

8. वन्यजीवों के लिए प्रमुख खतरे क्या हैं?

उत्तर: वन्यजीवों के लिए प्रमुख खतरे में habitat destruction (आवास विनाश), अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और वन्यजीवों का अवैध व्यापार शामिल हैं।

9. वन्यजीवों को क्यों बचाना चाहिए?

उत्तर: वन्यजीवों को बचाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होते हैं, और उनका संरक्षण मानवता, पर्यावरण और जैव विविधता के लिए जरूरी है।

10. क्या हमें वन्यजीवों को बचाना चाहिए?

उत्तर: हां, वन्यजीवों का बचाव करना आवश्यक है क्योंकि वे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके बिना प्राकृतिक संसाधनों की सटीकता और विविधता प्रभावित हो सकती है।

11. वन्य जीवन का महत्व क्या है? (5 अंक)

उत्तर:

  1. पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखना।
  2. जैव विविधता को बढ़ावा देना।
  3. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
  4. पर्यावरण को शुद्ध करना।
  5. मानव स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में योगदान।

12. वन्य पशुओं से हमें क्या लाभ है?

उत्तर: वन्य पशु पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। वे प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला का हिस्सा होते हैं और जैविक नियंत्रण में योगदान करते हैं।

13. वन्य जीवन मनुष्य के लिए कैसे उपयोगी है?

उत्तर: वन्य जीवन हमें खाद्य, औषधि, और कच्चे माल के रूप में संसाधन प्रदान करता है। इसके अलावा, वन्यजीवों का संरक्षण मनुष्य के पर्यावरणीय लाभ और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करता है।

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14. वन हमारे लिए कैसे लाभदायक है?

उत्तर: वन जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, प्रदूषण को अवशोषित करते हैं, और वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखते हैं। इसके अलावा, वन मनुष्य के लिए कच्चे माल, ईंधन, और औषधियों का स्रोत भी हैं।

15. जंगली जानवर पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण क्यों हैं?

उत्तर: जंगली जानवर पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे खाद्य श्रृंखला में हैं, और उनका अस्तित्व पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य तत्वों के बीच संतुलन बनाए रखता है।

16. वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 की धारा 49एन क्या है?

उत्तर: धारा 49एन के तहत यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी वन्यजीव या उसके उत्पादों का अनधिकृत शिकार करता है या उसे पकड़ता है, तो उसे सजा दी जा सकती है। यह कानून वन्यजीवों के संरक्षण और उनके अवैध शिकार को रोकने के लिए लागू किया गया है।

17. भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?

उत्तर: भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं, जैसे राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों की स्थापना, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972, और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं लागू करना।

18. भारत में इन 10 जानवरों को नहीं पाल सकते

उत्तर: भारत में कुछ जानवरों को पालना अवैध है, जैसे तेंदुआ, हाथी, बाघ, सिंह, और अन्य जंगली जानवर जिन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित किया गया है।

19. शुभ है घर में इन 3 जीवों को पालना, पैसों से भरी रहेगी जेब

उत्तर: घर में कुछ शुभ और भाग्य ला सकने वाले जीवों को पालने की परंपरा है, जैसे मछलियाँ, कछुआ, और पक्षी। इन जीवों को पालने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

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