
Rajsamand News : “जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय” की कहावत को चरितार्थ करते हुए गत 8 मई को खमनोर क्षेत्र के बलीचा के समीप झाड़ियों में असुरक्षित अवस्था में परित्यक्त मिला एक नवजात शिशु जीवन और मृत्यु के संघर्ष को पार कर अब स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर हो गया है। चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ तथा बाल संरक्षण तंत्र के संयुक्त प्रयासों से नवजात को नया जीवन मिला और बुधवार को उसे स्नेहपूर्वक “कन्हैया” नाम देकर राजकीय शिशु गृह को सुपुर्द किया गया। बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक एवं राजकीय शिशु गृहअधीक्षक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि 8 मई की सुबह अज्ञात व्यक्ति द्वारा झाड़ियों में छोड़े गए नवजात शिशु को गंभीर स्थिति में उपचार हेतु आर.के. राजकीय चिकित्सालय लाया गया था। यहां शिशु को विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एस.एन.सी.यू.) में भर्ती कर लगातार 25 दिनों तक गहन चिकित्सा एवं निगरानी प्रदान की गई। चिकित्सालय के पीएमओ रमेश रजक के मार्गदर्शन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सारांश संबल तथा सहयोगी चिकित्सक डॉ. भरतराम और डॉ. दिशा ने उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही नर्सिंग अधीक्षक नानालाल कुमावत, प्रकाश वैष्णव, एस.एन.सी.यू. प्रभारी प्रेमशंकर पुर्बिया तथा नर्सिंग ऑफिसर्स नूतन रेगर, प्रेमलता रेगर, रेखा गाडरी, भावना, लीला, नीशा, पुष्पा, मीना, नर्बदा, राधा एवं विमला देवी ने समर्पण भाव से नवजात की देखभाल की।
राजसमंद में मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल बना नवजात ‘कन्हैया’
Rajsamand Hospital : पूर्णतः स्वस्थ होने के पश्चात बुधवार को चिकित्सालय परिवार ने नवजात को स्नेहपूर्वक “कन्हैया” नाम दिया। इसके उपरांत पीएमओ रमेश रजक ने बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कोमल पालीवाल, सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग एवं राजकीय शिशु गृह के अधीक्षक दीपेंद्र सिंह शेखावत तथा प्रकाश चंद्र सालवी, प्रबंधक राजकीय शिशु गृह को शिशु सुपुर्द किया। बाल कल्याण समिति द्वारा विधिवत प्रारूप-18 में आदेश जारी कर बालक को राजकीय शिशु गृह में संरक्षण एवं देखभाल हेतु भेजा गया। बालक के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए दत्तक ग्रहण की आगामी कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए हैं, ताकि उसे एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण एवं पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। Newborn Care

Rajsamand News : आमजन से अपील-फेंके नहीं, हमें दें:
Child Welfare Services : बाल संरक्षण विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी कारणवश नवजात शिशु का पालन-पोषण संभव नहीं हो तो उसे कचरे, झाड़ियों, सड़क किनारे अथवा अन्य असुरक्षित स्थानों पर न छोड़ें। इसके स्थान पर चिकित्सालयों में स्थापित पालना गृह में सुरक्षित रूप से शिशु को छोड़ा जा सकता है, जिससे उसके जीवन की रक्षा सुनिश्चित हो सके। सुरक्षित परित्याग की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जाती है। विभाग ने यह भी बताया कि संतानहीन दम्पत्ति अथवा पात्र एकल अभिभावक महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के मिशन वात्सल्य पोर्टल पर पंजीकरण कर दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं तथा अधिक जानकारी के लिए राजकीय शिशु गृह, राजनगर से संपर्क कर सकते हैं। Child Protection



