
नाथद्वारा। Rajsamand News : जन्मदिन पर आमतौर पर लोग अपने प्रियजनों के लिए उपहार खरीदते हैं और खुशियां मनाते हैं, लेकिन राजसमंद जिले के धिधागढ़ गांव से मानवता और संवेदना की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने जन्मदिन को सेवा और परोपकार से जोड़ दिया।
शिशोदा ग्राम पंचायत के धिधागढ़ गांव में लंबे समय से जर्जर मकान में रहने को मजबूर दो विधवा बहनों के जीवन में अब सुरक्षित छत की उम्मीद जगी है। मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई ने दोनों बहनों के लिए दो पक्के मकान बनाने की जिम्मेदारी उठाई है। ट्रस्ट के अध्यक्ष मेघराज धाकड़ ने अपनी माताजी कंकुबाई के 75वें जन्मदिन के अवसर पर दोनों जरूरतमंद बहनों को दो पक्के मकानों का अनोखा उपहार देने की घोषणा की है। ट्रस्ट की ओर से आगामी छह माह के भीतर दोनों बहनों के लिए अलग-अलग मकान बनाकर दिए जाएंगे। खास बात यह है कि यह पहल केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि दो जरूरतमंद महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। धिधागढ़ गांव की रहने वाली भंवरी बाई चौहान और जमना बाई चौहान दोनों विधवा बहनें लंबे समय से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही थीं। उनका मकान इतना जर्जर हो चुका था कि बरसात के दिनों में वहां रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। क्षतिग्रस्त छत से पानी टपकता था और कई बार बारिश के दौरान दोनों बहनों को घर के भीतर ही छतरी के सहारे रात गुजारनी पड़ती थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण दोनों बहनें अपने स्तर पर मकान की मरम्मत या नया घर बनाने में सक्षम नहीं थीं। ऐसे में उनकी जिंदगी असुरक्षा और अभाव के बीच गुजर रही थी। बरसात के मौसम में स्थिति और भी मुश्किल हो जाती थी। जर्जर दीवारों और कमजोर छत के बीच हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती थी।
दोनों बहनों की इस परेशानी की जानकारी एक निजी चैनल के माध्यम से सामने आई। खबर सामने आने के बाद यह मामला मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई के अध्यक्ष मेघराज धाकड़ तक पहुंचा। उन्होंने इस घटना को केवल एक समाचार के तौर पर नहीं देखा, बल्कि इसे अपनी जन्मभूमि के जरूरतमंद लोगों के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर देखा।
खबर सुनकर खुद धिधागढ़ पहुंचे मेघराज धाकड़
Rajsamand widow sisters house construction : दोनों बहनों की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद मेघराज धाकड़ ने स्वयं धिधागढ़ पहुंचकर हालात देखने का निर्णय लिया। 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर वे अपनी टीम के साथ मुंबई से धिधागढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने भंवरी बाई और जमना बाई से मुलाकात की तथा उनके घर की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। जब उन्होंने दोनों बहनों के जर्जर मकान को करीब से देखा तो वहां की स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आई। मकान की कमजोर दीवारें, क्षतिग्रस्त छत और बारिश के दौरान घर में गिरने वाला पानी उनकी परेशानी को साफ बयां कर रहा था। वर्षों से इसी तरह की परिस्थितियों में जीवन गुजार रही दोनों बहनों की स्थिति देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। मेघराज धाकड़ ने दोनों बहनों से बातचीत कर उनकी परेशानियों को समझा। इसके बाद उन्होंने तत्काल निर्णय लेते हुए दोनों के लिए अलग-अलग पक्के मकान बनवाने की घोषणा कर दी। इस घोषणा ने वहां मौजूद ग्रामीणों और दोनों बहनों के चेहरों पर लंबे समय बाद उम्मीद की चमक ला दी।
छह महीने में तैयार होंगे दोनों मकान
Meghraj Dhakad Mangala Charitable Trust : मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से दोनों बहनों के लिए दो अलग-अलग पक्के मकान बनाए जाएंगे। ट्रस्ट ने करीब छह महीने की अवधि में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। मेघराज धाकड़ ने कहा कि जरूरतमंद व्यक्ति को सुरक्षित छत उपलब्ध कराना केवल आर्थिक सहायता नहीं है। यह उसके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि दोनों बहनों की परिस्थितियों के बारे में जानकारी मिलने के बाद उनके मन में यह विचार आया कि यदि जन्मभूमि की दो बहनें इतनी कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रही हैं तो उनकी सहायता करना केवल सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।
मां के 75वें जन्मदिन को बनाया यादगार
Dhidagarh Nathdwara widow sisters help : मेघराज धाकड़ ने अपनी माताजी कंकुबाई के 75वें जन्मदिन को इस सेवा कार्य से जोड़कर इसे और भी खास बना दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को उनकी माताजी का 75वां जन्मदिन है। इस विशेष अवसर पर दोनों विधवा बहनों के लिए बनने वाले मकान उनकी माताजी की ओर से दिया जाने वाला अनोखा उपहार हैं। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर जन्मदिन पर अपने परिवार और प्रियजनों को उपहार दिए जाते हैं, लेकिन उनकी इच्छा थी कि माताजी के इस विशेष जन्मदिन को किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियां और सुरक्षा लाने के अवसर के रूप में मनाया जाए। मेघराज धाकड़ ने कहा कि किसी जरूरतमंद को सुरक्षित आशियाना मिलना उनके लिए किसी भी महंगे उपहार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। दो विधवा बहनों को सुरक्षित छत मिलना उनकी माताजी के 75वें जन्मदिन की सबसे बड़ी खुशी होगी।
जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
Kankubai 75th birthday charity gift : मेघराज धाकड़ ने प्रवासी समाज से भी अपनी जन्मभूमि के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग शहरों और महानगरों में रहने वाले प्रवासियों का अपनी जन्मभूमि से भावनात्मक रिश्ता हमेशा जुड़ा रहता है। रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए भले ही लोग अपने गांव और शहर से दूर चले जाएं, लेकिन अपनी मिट्टी और समाज के प्रति जिम्मेदारी कभी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रवासी समाज यदि अपनी जन्मभूमि के विकास और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आए तो ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोगों की जिंदगी बदली जा सकती है। किसी जरूरतमंद परिवार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार या सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना समाज के प्रति सबसे सार्थक योगदानों में से एक है।
मकान की घोषणा सुनकर भावुक हुईं दोनों बहनें
दोनों बहनों के लिए मकान बनाने की घोषणा सुनते ही उनके चेहरे पर खुशी और भावुकता साफ दिखाई दी। लंबे समय से जर्जर मकान में रहने के कारण दोनों को हर मौसम में परेशानियों का सामना करना पड़ता था। खासकर बारिश के दिनों में उन्हें सबसे ज्यादा चिंता रहती थी कि कहीं कमजोर छत या दीवारों के कारण कोई हादसा न हो जाए। अब पक्के मकान की घोषणा के बाद दोनों बहनों को अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीद मिली है। उन्होंने मेघराज धाकड़, उनकी माताजी कंकुबाई और मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया। दोनों बहनों के लिए यह मदद उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
इस अवसर पर कपिल जैन, भगवती धाकड़, विष्णु बागोरा सहित मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। ट्रस्ट की इस पहल की ग्रामीणों ने सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया।



