
राजसमंद : Rajsamand Elections 2026 : निकाय चुनाव के लिए जारी हुई आरक्षण लॉटरी के बाद जिले की नगरीय सत्ता का नया सियासी समीकरण सामने आ गया है। 74 साल के लंबे इतिहास में राजसमंद नगर परिषद की कमान 17 प्रशासकों और निर्वाचित अध्यक्षों / सभापतियों ने संभाली है, जिनमें महिला प्रतिनिधित्व केवल एक बार ही देखने को मिला है।
इस बार राजसमंद नगर परिषद, नाथद्वारा और आमेट नगरपालिका में अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए तय हुआ है। वहीं, देवगढ़ नगर पालिका में अध्यक्ष पद ओबीसी महिला और पहली बार गठित हुई भीम नगर पालिका में सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार राजसमंद में सामान्य और ओबीसी वर्ग की आबादी अधिक होने के कारण आरक्षण व्यवस्था में इसका प्रभाव देखने को मिला है। राजनीतिक इतिहास की बात करें तो राजसमंद में अब तक 9 बार कांग्रेस और 8 बार भाजपा को सत्ता संभालने का मौका मिला है।
2011 में आशा बनी पालिका अध्यक्ष, 2013 में बन गई परिषद
Rajsamand Nagar Parishad Election 2026 : राजसमंद निकाय के इतिहास में महिला प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड बेहद सीमित रहा है। वर्ष 2011 से 2016 के दौरान आशा पालीवाल ही एकमात्र ऐसी महिला जनप्रतिनिधि रहीं, जिन्होंने इस सर्वोच्च पद की कमान संभाली। वे 2011 से 2016 तक नगरपालिका अध्यक्ष रहीं और 2013 में पालिका के नगर परिषद बनने के बाद 2016 तक पहली महिला सभापति के रूप में कार्यरत रहीं। वे सीधे चुनाव के जरिए इस पद तक पहुंची थी।
नगर परिषद राजसमंद में 17 में से 14 बार सामान्य, 2 बार ओबीसी की सीट
Rajsamand Election Reservation Lottery 2026 : नगर परिषद राजसमंद के इतिहास में अब तक कुल 17 सभापति और अध्यक्ष रहे हैं। इनमें वर्गवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 14 बार सामान्य वर्ग और 2 बार ओबीसी वर्ग के जनप्रतिनिधियों को शीर्ष पद पर बैठने का अवसर मिला। वर्ष 2013 में राजसमंद नगर पालिका को अपग्रेड करके नगर परिषद का दर्जा दिया था। पिछली बार राजसमंद नगर परिषद की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित रही थी। इस बार सीट सामान्य होने से मुकाबला सभी वर्गों के दावेदारों के लिए खुल गया है।
भीम में पहली बार चुनाव, देवगढ़ में ओबीसी महिला को मौका
Rajsamand Political News : जिले की अन्य नगर पालिकाओं के समीकरण भी इस बार बदले हुए नजर आ रहे हैं। देवगढ़ नगरपालिका में इस बार ओबीसी महिला के लिए सीट आरक्षित की गई है, जिससे स्थानीय महिला नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। दूसरी ओर, हाल ही में नवगठित भीम नगर पालिका में पहली बार चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं, जहां पहली ही बार में अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया है। नाथद्वारा और आमेट में सीट सामान्य रहने से दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदारों की हलचल तेज हो गई है।

देवगढ़ और आमेट में 2-2 बार महिला को मिला मौका
Rajsamand BJP Congress : नगर पालिका देवगढ़ में 1995 से लेकर 2000 तक खीमी रावत और 2015 से 2020 तक अंजना जोशी को पलिका पद पर निर्वाचित किया, वहीं आमेट नगर पालिका में 2004 से 2009 तक प्रेमदेवी सियाल और नर्बादा देगी बागवान को 2014 से 2019 तक मौका मिला था।
राजसमंद नगर परिषद : मतदाता विवरण
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| कुल वार्ड | 45 |
| कुल मतदाता | 43,813 |
| पुरुष मतदाता | 22,465 |
| महिला मतदाता | 21,347 |
| मतदान केंद्र | 49 |
राजसमंद की सभापति की कुर्सी संभालने वाले
| क्रमांक | नाम | दल/स्थिति |
|---|---|---|
| 1 | रतन सिंह राजपूत | कांग्रेस |
| 2 | बिहारीलाल वर्मा | कांग्रेस |
| 3 | भवानीशंकर दाधीच | जनसंघ |
| 4 | नरेंद्र कुमार शर्मा | कांग्रेस |
| 5 | गिरधर गोपाल सिंह | कांग्रेस |
| 6 | भंवरलाल बड़ोला | कार्यवाहक अध्यक्ष, कांग्रेस |
| 7 | महेश पालीवाल | भाजपा |
| 8 | परमानंद पालीवाल | कांग्रेस |
| 9 | नारायणलाल सुथार | कार्यवाहक अध्यक्ष, कांग्रेस |
| 10 | जगदीश पालीवाल | भाजपा |
| 11 | दिनेश पालीवाल | भाजपा |
| 12 | रामचंद्र पूर्बिया | कार्यवाहक अध्यक्ष, भाजपा |
| 13 | महेश पालीवाल | भाजपा |
| 14 | अशोक रांका | भाजपा |
| 15 | आशा पालीवाल | कांग्रेस |
| 16 | सुरेशचंद्र पालीवाल | भाजपा |
| 17 | अशोक टांक | कांग्रेस |
राजसमंद जिले के पांच निकाय
| निकाय | कुल वार्ड |
|---|---|
| राजसमंद नगर परिषद | 45 |
| आमेट नगर पालिका | 25 |
| नाथद्वारा नगर पालिका | 40 |
| देवगढ़ नगर पालिका | 25 |
| भीम नगर पालिका | 20 |
निकायों में नया आरक्षण
| निकाय | सभापति/अध्यक्ष पद का आरक्षण |
|---|---|
| राजसमंद | अनारक्षित |
| आमेट | अनारक्षित |
| भीम | अनारक्षित महिला |
| देवगढ़ | ओबीसी महिला |
| नाथद्वारा | अनारक्षित |
जिला प्रमुख सीट सामान्य होते ही गरमाई राजनीति
महाराणा राजसिंह की नगरी राजसमंद में जिला परिषद और नगर निकाय के आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जयपुर में निकाली गई लॉटरी में राजसमंद जिला परिषद की सीट सामान्य घोषित होने के बाद से राजनीतिक गलियारों और चाय की थड़ियों पर चुनावी गुणा-भाग का दौर शुरू हाे गया। इससे पहले ये सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित थी। सामान्य सीट होने के बाद टिकट के दावेदारों की दौड़भाग शुरू हो गई है। फिलहाल सभी की निगाहें चुनाव विभाग द्वारा 17-18 अगस्त को निकाली जाने वाली वाड़ों की लॉटरी पर टिकी हैं, जो वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों के आरक्षण का फैसला करेगी। पिछले 31 वर्षों के चुनावी विश्लेषण में सामने आया है कि जिले में अधिकांश बार उसी पार्टी का बोर्ड बना है, जिसकी राज्य में सरकार रही है।
जीत का गणित
राजसमंद जिला परिषद के गठन के बाद से अब तक के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो एक बेहद दिलचस्प ट्रेंड सामने आता है। जिले के मतदाताओं ने अक्सर प्रदेश की सत्ता के साथ कदमताल किया है। हालांकि जीत के मार्जिन में दोनों दलों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है। जब भी भाजपा ने जिले में बोर्ड बनाया है, उसकी जीत पूरी तरह से एकतरफा रही है। इसके उलट, कांग्रेस जब भी जीती है, उसे कांटे की टक्कर का सामना करना पड़ा है। परंपरागत रूप से निकाय चुनाव विधानसभा चुनावों के एक साल बाद रहे हैं, हालांकि इस बार प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है।
सत्ता के तालमेल से तय होता रहा जिला प्रमुख का चेहरा
- 1991 में जिला परिषद के गठन के बाद 1995 में पहली बार चुनाव हुए थे। तब से लेकर अब तक का सफर राज्य और जिले की सत्ता के सीधे जुड़ाव को दर्शाता है-
- 1995 (भाजपा): राज्य में भैरूसिंह शेखावत के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी और जिले के पहले जिला प्रमुख के रूप में के हरिओमसिंह राठौड़ ने पद संभाला।
- 2000 (कांग्रेस): प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार आने पर जिले में कांग्रेस का बोर्ड बना और बसंता रावत जिला प्रमुख बनीं।
- 2005 (भाजपा): राज्य में भाजपा सरकार बनने पर नरेंद्रसिंह सोलंकी जिला प्रमुख चुने गए। 2008 में उनके निधन बाद खींचतान के बीच भाजपा समर्थित नारायणसिंह भाटी जिला प्रमुख बने।
- 2010 (कांग्रेस): राज्य में कांग्रेस की वापसी के साथ किशनलाल भील जिला प्रमुख बने।
- 2015 (भाजपा): प्रदेश में भाजपा सरकार के दौरान प्रवेशकुमार सालवी ने जिला प्रमुख का पद संभाला।
- 2020 (भाजपा): इस वर्ष प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के बावजूद भाजपा की रतनीदेवी जाट जिला प्रमुख बनीं और पुराना ट्रेंड टूट गया।
2020 में टूटा 25 साल पुराना परंपरा का चक्र
वर्ष 1995 से लेकर 2015 तक लगातार 25 सालों तक राजसमंद में वही पार्टी जिला परिषद पर काबिज होती थी, जिसकी राज्य में सरकार होती थी। हालांकि, 2020 के पंचायत राज चुनावों में यह परंपरा टूट गई। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद राजसमंद में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाया और रतनीदेवी जाट जिला प्रमुख बनी थीं।
दोनों पार्टियों ने कसी कमर, दांव-पेंच का दौर शुरू
चुनावों को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने तैयारियां जोर-शोर से शुरू कर दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या आगामी चुनावों में भी यह 31 साल पुराना प्रदेश सरकार वाला मिथक कायम रहता है या राजसमंद की जनता इस बार कोई नया इतिहास रचती है।



