
राजसमंद। Rajsamand Municipal Election : नगर निकाय चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद नगर परिषद में नई बोर्ड की सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। सोमवार को घोषित चुनाव परिणामों में भाजपा ने 45 वार्डों में से 27 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। वहीं कांग्रेस को 14 वार्डों में सफलता मिली, जबकि 4 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
परिणाम सामने आने के साथ ही अब राजनीतिक दलों का पूरा फोकस नगर परिषद के सभापति पद पर आ गया है। भाजपा के पास बहुमत होने के कारण बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन सभापति की कुर्सी पर किसे बैठाया जाएगा, इसे लेकर पार्टी के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। अलग-अलग समाजों और राजनीतिक गुटों से जुड़े दावेदार अपने पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए लॉबिंग में जुटे हैं। सभापति पद के लिए मंगलवार को नामांकन दाखिल किया जाना है। ऐसे में नामांकन से ठीक पहले राजसमंद की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। नगर परिषद में इस बार सभापति पद सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित है। इसी वजह से भाजपा के भीतर कई प्रमुख चेहरे इस पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा में मुख्य रूप से पालीवाल और जैन समाज से जुड़े दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं। पार्टी के स्तर पर भी संभावित नामों को लेकर विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला पार्षदों के समीकरण, पार्टी नेतृत्व की पसंद और स्थानीय राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
पालीवाल समाज से तीन प्रमुख नाम
Rajsamand Nagar Parishad Election 2026 : भाजपा ने इस चुनाव में पालीवाल समाज से 8 प्रत्याशियों को टिकट दिया था। इनमें से 3 प्रत्याशी जीत दर्ज करने में सफल रहे। सभापति पद के लिए पालीवाल समाज से अनीता पालीवाल, धीरज पुरोहित और विकास पालीवाल के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। इन दावेदारों की ओर से अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। पार्टी के भीतर पार्षदों के समीकरण को देखते हुए हर दावेदार अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा हुआ है।

जैन समाज से भी मजबूत दावेदारी
Rajsamand Chairman Election : दूसरी ओर जैन समाज से भी सभापति पद के लिए दो प्रमुख नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व चेयरमैन अशोक रांका और पूर्व पार्षद विजय बहादुर जैन अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। दोनों ही नामों को राजनीतिक अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में सभापति पद को लेकर भाजपा के भीतर पालीवाल और जैन समाज के दावेदारों के बीच मुकाबला दिलचस्प होता नजर आ रहा है। पार्टी नेतृत्व के सामने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी रहेगी।
कुमावत समाज के सबसे ज्यादा पार्षद जीते
Rajasthan Politics : भाजपा के टिकट पर इस चुनाव में कुमावत समाज के 9 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। वहीं पालीवाल समाज से 3 प्रत्याशी चुनाव जीतकर नगर परिषद पहुंचे हैं। इन सामाजिक समीकरणों का असर सभापति पद के चयन में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व को करना है, लेकिन चुनाव परिणाम के बाद से ही पार्षदों के बीच संभावित सभापति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पार्षदों की बाड़ेबंदी, होटल बदला
Rajsamand Nagar Parishad : भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद पार्टी अपने पार्षदों को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई है और उन्हें एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, ताकि किसी तरह की सेंधमारी या राजनीतिक खींचतान की स्थिति पैदा न हो। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के विजयी पार्षदों को भीलवाड़ा शहर के एक निजी होटल में ठहराया गया था। अब सुरक्षा और रणनीतिक कारणों के चलते पार्षदों को वहां से दूसरे सुरक्षित होटल में शिफ्ट कर दिया गया है। नामांकन से पहले सभी पार्षदों को एकजुट रखते हुए पार्टी स्तर पर आगे की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि सभापति पद के नाम को लेकर भी इसी दौरान अंतिम सहमति बनाने की कोशिश होगी।
बहुमत के कारण भाजपा का बोर्ड बनना तय
नगर परिषद के 45 वार्डों में भाजपा के पास 27 पार्षद हैं। यानी पार्टी के पास बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक बहुमत से काफी अधिक संख्या में पार्षद मौजूद हैं। कांग्रेस के खाते में 14 सीटें आई हैं, जबकि 4 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। नगर परिषद में जनता सीधे पार्षदों का चुनाव करती है। इसके बाद निर्वाचित पार्षद अपने वोट के जरिए सभापति का चुनाव करते हैं। सामान्य तौर पर जिस राजनीतिक दल के पास सदन में 50 प्रतिशत से अधिक यानी बहुमत का आंकड़ा होता है, उसके सभापति बनने की संभावना सबसे मजबूत रहती है। राजसमंद में भाजपा के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका फिलहाल निर्णायक नहीं है। अब पूरा राजनीतिक रोमांच इस बात को लेकर है कि भाजपा सभापति की कुर्सी के लिए किस चेहरे पर भरोसा जताती है। मंगलवार को नामांकन के साथ ही तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। इसके बाद सभापति पद को लेकर चल रही तमाम अटकलों और दावेदारों की लॉबिंग पर भी विराम लग सकता है।




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