
Terapanth Mera Panth workshop : राजसमंद। निकटवर्ती सापोल ग्राम में संस्था शिरोमणि तेरापंथी महासभा के निर्देशानुसार आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘तेरापंथ मेरा पंथ’ कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लेकर तेरापंथ दर्शन, जैन धर्म और आचार्य भिक्षु के सिद्धांतों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता देवेंद्र कुमार सिंघवी ने बताया कि आचार्य भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी श्रृंखला में सापोल ग्राम में भी यह विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। कार्यक्रम की शुरुआत तेरापंथ महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण के साथ हुई। आध्यात्मिक वातावरण के बीच उपस्थित लोगों ने आयोजन का लाभ लिया। कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में उपासक प्रवक्ता हस्तीमल डांगी उपस्थित रहे। उन्होंने जैन धर्म, तेरापंथ दर्शन, आचार्य भिक्षु द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों, लौकिक एवं लोकोत्तर जीवन मूल्यों तथा तेरापंथ के मौलिक आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सरल और प्रभावशाली शैली में श्रावक समाज को तेरापंथ धर्म संघ की विचारधारा से अवगत कराया।
कार्यशाला के उद्देश्य पर डाला प्रकाश
Terapanth event Rajsamand : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तेरापंथी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष फूलचंद चतरावत ने कार्यशाला के उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में वैचारिक जागरूकता बढ़ाने और धर्म के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। वहीं महासभा के क्षेत्रीय प्रभारी एवं कार्यसमिति सदस्य कांतिलाल धाकड़ ने कार्यशाला के महत्व और आयोजन की रूपरेखा पर विस्तार से जानकारी दी।
जिज्ञासाओं का किया समाधान
Acharya Bhikshu birth tercentenary program : कार्यशाला के दौरान उपस्थित श्रावक समाज ने धर्म, दर्शन और तेरापंथ पर आधारित अनेक जिज्ञासाएं रखीं, जिनका समाधान प्रशिक्षक हस्तीमल डांगी ने संतोषजनक ढंग से किया। वक्ताओं ने तेरापंथ धर्म संघ के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन परम पूज्य आचार्य भिक्षु ने नव्य-भव्य दीक्षा स्वीकार की थी। इसी के साथ तेरापंथ धर्म संघ के रूप में जैन धर्म का एक नवीन स्वरूप अस्तित्व में आया।

आचार्य भिक्षु को बताया जैन धर्म का पुनरुद्धारक
Terapanthi Mahasabha workshop : वक्ताओं ने कहा कि आचार्य भिक्षु को जैन धर्म के पुनरुद्धारक आचार्य के रूप में देखा जाता है। उनके द्वारा स्थापित तेरापंथ धर्म संघ ने 265 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी की है। इस लंबे कालखंड में धर्म संघ को कई गरिमाशाली, पुण्यशाली और महिमाशाली आचार्यों का कुशल नेतृत्व प्राप्त हुआ है। सभी ने मंगलकामना व्यक्त की कि भविष्य में भी तेरापंथ धर्म संघ को इसी प्रकार महान आचार्यों का मार्गदर्शन मिलता रहे।
‘तेरापंथ मेरा पंथ’ की अवधारणा पर जोर

Jain Terapanth event Rajsamand news : कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि आचार्य महाप्रज्ञ जब वर्ष 2002 में अहमदाबाद चातुर्मास के लिए पधारे थे, तब तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि “तेरापंथ मेरा पंथ बन जाए।” बाद में प्रधानमंत्री बनने के पश्चात भी उन्होंने आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी के अवसर पर अपने वर्चुअल संबोधन में इसी भावना को दोहराया था। वक्ताओं ने कहा कि तेरापंथ की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सभी को प्रयासरत रहना चाहिए।
विभिन्न इकाइयों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम को सफल बनाने में तेरापंथी सभा, तेरापंथ महिला मंडल और युवक परिषद की विशेष भूमिका रही। आयोजन के दौरान समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर शांतिलाल नानालाल सिंघवी, सुंदरलाल सिंघवी, विमल सिंघवी, रमेश गणेशलाल सिंघवी, मांगीलाल सिंघवी, हसमुख सिंघवी, रमेश राजमल सिंघवी, महेंद्र सिंघवी, प्रकाश पगारिया, अंजना सिंघवी, संगीता सिंघवी, प्रेमलता सिंघवी, पिस्ता सिंघवी, सुशीला सिंघवी, बसंती देवी सिंघवी सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत में तेरापंथ सभा सापोल के अध्यक्ष प्रकाश वर्दीचंद सिंघवी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन देवेंद्र कुमार सिंघवी ने किया, जबकि अंत में शांतिलाल प्रेमचंद सिंघवी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान जैन विश्व भारती, लाडनूं द्वारा प्रकाशित साहित्य की भी विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे उपस्थित समाजजन लाभान्वित हुए।



