
Rajasthan Urea DAP online system : आने वाले दिनों में किसानों को खाद बीज के लिए लाइन में लगने की समस्या से राहत मिल सकेगी। इसके लिए राज्य सरकार ऑनलाइन व्यवस्था बनाने जा रही है। इसके बाद किसानों को यूरिया डीएपी आदि खाद के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म पर आवेदन करना होगा। उसी के अनुसार किसानों को खाद मिल जाएगी। संभावना है कि यह व्यवस्था मानसून सीजन में लागू हो जाएगी। तकनीकी कारणों से अगर देरी हुई तो इसे रबी सीजन में शुरू किया जा सकता है। कृषि विभाग प्रदेश में किसानों को ऑनलाइन आवेदन करने के प्रति जागरूक कर रहा है। साथ ही इसके फायदे बता रहा है।
Urea DAP subsidy direct transfer farmers : उल्लेखनीय है कि हर वर्ष खाद और बीज की समस्या को लेकर किसानों को परेशान होना पड़ता रहा है। लंबी कतारें लगती हैं। पाती तो कई बार खाद होते हुए भी उन्हें नहीं मिलती। पुलिस सुरक्षा मे भी वितरण करना पड़ता है। अब इस तरह की समस्याओं और कालाबाजारी रोकने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की जा रही है। किसान किसी भी ई मित्र या अपने मोबाइल से भी आवेदन कर सकेगा। इसके लिए जनाधार और फार्मर रजिस्ट्री नंबर डालने होंगे। जिस किसान के पास फार्मर रजिस्ट्री नंबर नहीं है, उन्हें जमाबंदी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। फार्मर रजिस्ट्री और जमाबंदी में सिंचित और असिंचित भूमि का विवरण होगा, उसी आधार पर किसान को खरीफ और रबी के लिए यूरिया, डीएपी, एसएसपी खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश में सालभर में लगभग 30 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत रहती है। यूरिया की ज्यादा डिमांड रबी सीजन में होती है, जबकि डीएपी की खपत खरीफ और रबी की बुआई के समय होती है। कृषि विभाग के मानकों के अनुसार गेहूं में प्रति हेक्टेयर औसत 250 किलो यूरिया और 125 किलो डीएपी की मांग रहती है। इसी तरह सरसों में प्रति हेक्टेयर 150 किलो यूरिया और 100 किलो डीएपी या 300 किलो एसएसपी की जरूरत रहती है। हालांकि चना में सबसे कम बुआई के समय 75-100 डीएपी की मांग रहती है। वहीं, खरीफ सीजन में बाजरा राजस्थान की प्रमुख फसल है। इसमें प्रति हेक्टेयर औसतन 100-125 किलो यूरिया और 60 किलो डीएपी की खपत होती है। मक्का में प्रति हेक्टेयर 200 किलो यूरिया और 120 किलो डीएपी, कपास में प्रति हेक्टेयर 250 किलो यूरिया और 125 किलो डीएपी का औसत उपयोग होता है। Digital farming schemes

साढ़े चार लाख से ज्यादा किसानों तक पहुंचा विभाग
Rajasthan Jan Aadhaar fertilizer scheme : प्रदेश में कृषि विभाग ने हाल ही अपना खेत-अपनी खाद अभियान चलाया था। इस दौरान 14 हजार से ज्यादा गांवों में 4.67 लाख से ज्यादा किसानों को खाद के संतुलित इस्तेमाल, गोबर और हरी खाद डालने के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही आने वाले समय में खाद के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं। भविष्य में खाद बीज की सब्सिडी भी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इससे किसान बिचौलियों से बचेंगे। Online fertilizer application system



