
Crude oil stock news today : केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने देश में ईंधन आपूर्ति को लेकर लोगों के बीच फैल रही आशंकाओं पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत के पास वर्तमान समय में करीब 60 दिनों का कच्चा तेल (क्रूड ऑयल), 60 दिनों की एलएनजी (प्राकृतिक गैस) और लगभग 45 दिनों की एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। ऐसे में देश में ईंधन की कमी जैसी कोई स्थिति नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली में आयोजित सीआईआई एनुअल बिजनेस समिट के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने और संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करने की अपील को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जो बातें कहीं, उनका उद्देश्य लोगों में जागरूकता पैदा करना था, न कि किसी प्रकार की घबराहट फैलाना। पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार दो दिनों से लोगों से पेट्रोल-डीजल और अन्य संसाधनों का कम उपयोग करने की अपील कर रहे हैं। उनका मकसद देश में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। प्रधानमंत्री ने लोगों से जहां संभव हो वहां निजी वाहनों की बजाय मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और अन्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने की भी अपील की गई थी। हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री की बातों को तोड़-मरोड़कर पेश करना गलत है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जिम्मेदारी के साथ ऊर्जा उपयोग करने की अपील की।
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा दबाव
Hardeep Singh Puri latest statement : पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। इसके बावजूद भारत सरकार ने कोशिश की है कि इसका बोझ आम जनता पर कम से कम पड़े। उन्होंने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को मौजूदा समय में रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि यही स्थिति जारी रहती है तो यह घाटा करीब 1 लाख 98 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। पहले जहां क्रूड ऑयल की कीमत 64 से 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
देश का तेल आयात अभी भी बड़ा मुद्दा
Petrol diesel price hike India : भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक संकट और युद्ध का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हरदीप पुरी ने बताया कि दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से पहुंचता है। उन्होंने कहा कि घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी गैस का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भी इसी मार्ग से आता था। जब इस मार्ग पर संकट गहराया तो सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।

LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा
India oil reserve latest news : पेट्रोलियम मंत्री ने दावा किया कि सरकार ने संकट के दौरान घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि पहले भारत में प्रतिदिन करीब 35 से 36 हजार मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन होता था, जिसे बढ़ाकर 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया है। पुरी ने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी देश ने ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखा।
देश के पास कितना तेल और गैस भंडार मौजूद?
Petrol diesel latest news : भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रणनीतिक भंडारण प्रणाली विकसित की है। विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर जैसे स्थानों पर भूमिगत भंडारण सुविधाएं बनाई गई हैं। इन रणनीतिक भंडारों में करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल संग्रहित करने की क्षमता है। वर्तमान में इनमें लगभग 64 प्रतिशत यानी 3.37 मिलियन मीट्रिक टन तेल मौजूद है, जो देश की करीब 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। यदि सरकारी तेल कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार को मिलाकर देखा जाए, तो भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार उपलब्ध है। वहीं एलपीजी का स्टॉक करीब 45 दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
क्या यह स्टॉक पर्याप्त है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मानकों के अनुसार किसी भी देश के पास कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर तेल भंडार होना चाहिए। हालांकि भारत अभी इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार 60 से 74 दिनों का बैकअप फिलहाल सुरक्षित स्थिति माना जा सकता है।
फिर ईंधन बचाने की अपील क्यों?
सरकार का कहना है कि ऊर्जा बचत की अपील का मतलब यह नहीं है कि देश में तेल खत्म हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत करना है। भारत हर साल अरबों डॉलर खर्च कर कच्चा तेल आयात करता है। वैश्विक युद्ध और तनाव के कारण तेल महंगा हो गया है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार चाहती है कि लोग ईंधन का सोच-समझकर इस्तेमाल करें ताकि अनावश्यक खर्च कम किया जा सके।
जनता में क्यों फैली घबराहट?
प्रधानमंत्री की ईंधन बचत वाली अपील के बाद कई जगह लोगों ने आशंका जतानी शुरू कर दी थी कि कहीं भविष्य में ईंधन संकट या लॉकडाउन जैसी स्थिति न बन जाए। कुछ स्थानों पर लोगों ने पेट्रोल और डीजल की अतिरिक्त खरीदारी भी शुरू कर दी थी। इसी वजह से सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
भारत रोज कितना तेल खर्च करता है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है। देश में रोजाना करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संकट से पहले भारत प्रतिदिन लगभग 33 करोड़ डॉलर खर्च करता था। लेकिन अब यह खर्च बढ़कर करीब 50 करोड़ डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। भारतीय मुद्रा में देखें तो देश को रोज करीब 1,600 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं।
क्या पेट्रोल-डीजल फिर महंगे होंगे?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों पर लगातार बढ़ते घाटे को देखते हुए आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल के दामों में 4 से 5 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी करीब 50 रुपए तक इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या भारत पहले भी ऐसे संकट देख चुका है?
भारत इससे पहले भी ऊर्जा संकट का सामना कर चुका है। वर्ष 1991 में देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था और उस समय पर्याप्त तेल भंडारण की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान 2021-22 में भी रणनीतिक तेल भंडार काफी घट गए थे। हालांकि बाद में सरकार ने स्थिति को संभालते हुए भंडारण क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया।



