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Eklingji Temple history : महाराणा प्रताप के आराध्य देव, जानिए एकलिंगजी मंदिर का रहस्य

Parmeshwar Singh Chundwat May 13, 2026 1 minute read
Eklingji Temple history
Eklingji Temple history

Eklingji Temple history : राजस्थान की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल Eklingji Temple केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मेवाड़ की आस्था, परंपरा और शौर्य का प्रतीक माना जाता है। उदयपुर से करीब 22 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर सदियों से मेवाड़ राजघराने की श्रद्धा का केंद्र रहा है। भगवान शिव के इस दिव्य स्वरूप को यहां “श्री एकलिंगजी महाराज” के नाम से पूजा जाता है और मेवाड़ के महाराणा स्वयं को उनका प्रतिनिधि मानकर शासन करते थे।

मेवाड़ की परंपरा के अनुसार, एकलिंग महादेव के दर्शन किए बिना कोई भी व्यक्ति “महाराणा” की उपाधि ग्रहण नहीं करता। यही कारण है कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मेवाड़ की सांस्कृतिक पहचान भी है। इतिहासकारों के अनुसार एकलिंगजी मंदिर का मूल निर्माण 8वीं शताब्दी में मेवाड़ के संस्थापक Bappa Rawal ने करवाया था। माना जाता है कि उन्होंने ही यहां भगवान एकलिंगजी की मूर्ति की स्थापना करवाई थी। मंदिर का उल्लेख “एकलिंग महात्म्य” नामक ऐतिहासिक ग्रंथ में मिलता है, जिसे 15वीं शताब्दी में लिखा गया था। इस ग्रंथ में मंदिर की महिमा, धार्मिक महत्व और मेवाड़ शासकों की भक्ति का विस्तार से वर्णन किया गया है। हालांकि समय-समय पर मंदिर पर कई आक्रमण हुए। दिल्ली सल्तनत और मालवा सल्तनत के दौर में मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बावजूद मेवाड़ के राजाओं ने हर बार इसका पुनर्निर्माण करवाकर इसकी प्रतिष्ठा को बनाए रखा। Eklingji temple location

महाराणा रायमल ने करवाया वर्तमान मंदिर का निर्माण

Eklingji temple location : वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में Rana Raimal द्वारा करवाया गया था। बाद में Rana Kumbha ने भी मंदिर परिसर का विस्तार करवाया और यहां विष्णु मंदिर का निर्माण कराया। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि मालवा सल्तनत के शासक गियाथ शाह ने मंदिर पर हमला किया था। इसके बाद राणा रायमल ने युद्ध में उसे पराजित किया और मंदिर की प्रतिष्ठा दोबारा स्थापित करवाई।

क्यों खास है एकलिंगजी मंदिर?

Eklingji Temple Udaipur : एकलिंगजी मंदिर भगवान शिव के चतुर्मुखी स्वरूप के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित काले पत्थर की चार मुखों वाली शिव प्रतिमा इसकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।

इन चार मुखों का विशेष धार्मिक महत्व बताया जाता है—

  • पूर्व दिशा का मुख सूर्य देव का प्रतीक माना जाता है।
  • पश्चिम दिशा का मुख भगवान ब्रह्मा को दर्शाता है।
  • उत्तर दिशा का मुख भगवान विष्णु का प्रतीक है।
  • दक्षिण दिशा का मुख रुद्र स्वरूप यानी स्वयं भगवान शिव को दर्शाता है।

प्रतिमा के चारों ओर माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की मूर्तियां भी स्थापित हैं।

मेवाड़ राजघराने के आराध्य देव

Kailashpuri Eklingji Mandir : एकलिंगजी मंदिर का मेवाड़ राजघराने से बेहद गहरा संबंध रहा है। कहा जाता है कि मेवाड़ के महाराणा स्वयं को राजा नहीं, बल्कि भगवान एकलिंगजी का सेवक और प्रतिनिधि मानते थे। राजपूत योद्धा युद्ध पर जाने से पहले यहां आकर आशीर्वाद लेते थे। Maharana Pratap और Maharana Sanga जैसे वीर शासकों की आस्था भी एकलिंगजी महादेव में गहरी थी। इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि कठिन परिस्थितियों में महाराणा प्रताप ने भगवान एकलिंगजी को साक्षी मानकर मेवाड़ की आन-बान की रक्षा की प्रतिज्ञा ली थी।

वास्तुकला भी करती है आकर्षित

Eklingji Temple photos : एकलिंगजी मंदिर की वास्तुकला अद्भुत और प्राचीन शिल्पकला का शानदार उदाहरण मानी जाती है। दो मंजिला इस मंदिर की विशाल पिरामिडनुमा छत, सुंदर मीनारें और नक्काशीदार स्तंभ श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही चांदी से बनी नंदी की प्रतिमा दिखाई देती है। इसके अलावा पीतल और काले पत्थर से निर्मित नंदी की अन्य प्रतिमाएं भी मंदिर परिसर में स्थापित हैं। मुख्य मंदिर मंडप शैली में बना हुआ है, जहां ऊंचे स्तंभों के बीच भगवान एकलिंगजी की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में कुल 108 छोटे-बड़े मंदिर स्थित हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।

मंदिर परिसर के प्रमुख आकर्षण

मंदिर के उत्तरी भाग में “कर्ज कुंड” और “तुलसी कुंड” नामक दो पवित्र जलाशय स्थित हैं। श्रद्धालु यहां दर्शन के साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में स्थित “सास-बहू मंदिर” और “अद्भुतजी जैन मंदिर” भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। सास-बहू मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और प्राचीन स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है।

दर्शन और आरती का समय

Eklingji temple timing today : एकलिंगजी मंदिर प्रतिदिन सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है।

दर्शन का समय

  • सुबह : 4:30 बजे से 6:30 बजे तक
  • दोपहर : 10:30 बजे से 1:30 बजे तक
  • शाम : 5:30 बजे से रात 8 बजे तक

आरती का समय

  • सुबह की आरती : 5:30 बजे, 8:15 बजे, 9:15 बजे और 11:30 बजे
  • दोपहर आरती : 3:30 बजे और 4:30 बजे
  • संध्या आरती : शाम 5 बजे और 6:30 बजे

मंदिर में प्रवेश के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

कैसे पहुंचे एकलिंगजी मंदिर?

एकलिंगजी मंदिर उदयपुर शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर स्थित है। यहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हवाई मार्ग

निकटतम हवाई अड्डा Maharana Pratap Airport है, जो मंदिर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है।

रेल मार्ग

Udaipur City Railway Station देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से टैक्सी और बस आसानी से मिल जाती हैं।

सड़क मार्ग

उदयपुर से मंदिर तक नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं। निजी वाहन से भी 35 से 45 मिनट में यहां पहुंचा जा सकता है।

त्योहारों में उमड़ती है भारी भीड़

नवरात्रि, महाशिवरात्रि और अधिकमास जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। देशभर से लोग भगवान एकलिंगजी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर में विशेष श्रृंगार, झांकियां और धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत अनुभव कराते हैं।

क्यों खास है एकलिंगजी मंदिर?

एकलिंगजी मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि मेवाड़ के इतिहास, वीरता, संस्कृति और सनातन परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु न केवल आध्यात्मिक शांति महसूस करता है, बल्कि मेवाड़ की गौरवशाली विरासत से भी रूबरू होता है।

उदयपुर में एकलिंगजी मंदिर के आसपास घूमने लायक स्थान

एकलिंगजी मंदिर के आसपास कई प्राचीन और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मंदिरों का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ इनकी वास्तुकला और शांत वातावरण भी लोगों को बेहद पसंद आता है। मंदिर परिसर और उसके आसपास स्थित ये स्थान मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करते हैं।

रथासन देवी मंदिर

एकलिंगजी मंदिर के निकट स्थित रथासन देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर का शांत वातावरण और पारंपरिक स्थापत्य शैली लोगों को आध्यात्मिक अनुभव कराती है।

पातालेश्वर महादेव मंदिर

पातालेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगते हैं।

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विंध्यवासिनी देवी मंदिर

विंध्यवासिनी देवी मंदिर भी क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। मंदिर में माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का वातावरण बेहद शांत और भक्तिमय रहता है।

अरबाद माता मंदिर

अरबाद माता मंदिर स्थानीय लोगों की विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है। मंदिर की सुंदर बनावट और धार्मिक माहौल श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। त्योहारों के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।

सास-बहू मंदिर

10वीं शताब्दी में निर्मित सास-बहू मंदिर एकलिंगजी क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां और जटिल नक्काशी देखने को मिलती है, जो प्राचीन शिल्पकला का शानदार उदाहरण हैं।

अद्भुतजी जैन मंदिर

17वीं शताब्दी में बना अद्भुतजी जैन मंदिर भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। इस मंदिर में काले संगमरमर से बनी भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की नक्काशी और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।

कैलाशपुरी का इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य

मंदिरों के दर्शन के साथ-साथ पर्यटक स्थानीय गाइड की मदद से कैलाशपुरी क्षेत्र के इतिहास और मेवाड़ राजवंश की गौरवशाली विरासत के बारे में भी जान सकते हैं। आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य और पहाड़ी वातावरण यात्रा के अनुभव को और खास बना देता है।

About the Author

Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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