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jaisalmer fort history in hindi : भारत का इकलौता ऐसा किला जहां आज भी रहते हैं हजारों लोग, जानिए इसका रहस्य

Parmeshwar Singh Chundwat May 30, 2026 1 minute read

jaisalmer fort history in hindi : राजस्थान के थार रेगिस्तान के बीच सुनहरी आभा बिखेरता जैसलमेर किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि सदियों पुरानी जीवित विरासत का प्रतीक है। यही वजह है कि इसे दुनिया के चुनिंदा “लिविंग फोर्ट्स” यानी जीवंत किलों में गिना जाता है। जहां अधिकांश किले केवल इतिहास की यादें समेटे खड़े हैं, वहीं जैसलमेर किले के भीतर आज भी हजारों लोग रहते हैं, बाजार सजते हैं, मंदिरों में पूजा होती है और जीवन अपनी पूरी रफ्तार से चलता है।

जैसलमेर किले का निर्माण वर्ष 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल ने करवाया था। उनके नाम पर ही इस शहर का नाम जैसलमेर पड़ा। त्रिकुटा पहाड़ी पर स्थित यह किला समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर बना हुआ है और दूर-दूर तक फैले थार रेगिस्तान पर नजर रखता है। इतिहासकारों के अनुसार यह किला प्राचीन व्यापार मार्गों और सिल्क रूट Jaisalmer Fort area के महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल था। उस समय भारत, मध्य एशिया और पश्चिमी देशों के बीच होने वाले व्यापार में जैसलमेर की अहम भूमिका थी। जैसलमेर किले की सबसे बड़ी पहचान इसकी सुनहरी चमक है। पूरा किला पीले बलुआ पत्थर से निर्मित है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूर्य की किरणें इसकी दीवारों पर पड़ती हैं तो पूरा किला सोने की तरह चमकने लगता है। इसी अद्भुत दृश्य के कारण इसे सोनार किला, सोनारगढ़, स्वर्ण दुर्ग और गोल्डन फोर्ट जैसे नामों से जाना जाता है। शाम के समय इसकी सुनहरी चमक पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

भारत का सबसे प्रसिद्ध ‘लिविंग फोर्ट’

Jaisalmer fort kisne banaya : जैसलमेर किले को भारत का जीवंत किला इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां आज भी लोग स्थायी रूप से निवास करते हैं। अनुमानित तौर पर करीब 3,000 से 4,000 लोग आज भी किले के भीतर रहते हैं। ये परिवार कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं और अपनी संस्कृति, परंपराओं तथा जीवनशैली को जीवित रखे हुए हैं। Jaisalmer Fort area

किले के भीतर आपको—

  • घर
  • दुकानें
  • कैफे
  • होटल
  • गेस्ट हाउस
  • मंदिर
  • हस्तशिल्प बाजार

सब कुछ देखने को मिल जाएगा। यही वजह है कि यहां आने वाले पर्यटकों को ऐसा महसूस नहीं होता कि वे किसी खंडहर या संग्रहालय में घूम रहे हैं, बल्कि एक जीवंत शहर का अनुभव करते हैं।

ये भी पढ़ें : बीकानेर का वो मंदिर जहां हजारों चूहे हैं ‘देवी के दूत’, जानकर रह जाएंगे हैरान

इतिहास में कई बार हुआ घेराव

Why Jaisalmer Fort is famous : जैसलमेर किले ने अपने लंबे इतिहास में कई युद्ध और आक्रमण देखे हैं। साल 1299 में दिल्ली सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने इस किले को घेर लिया था। कई महीनों तक चले संघर्ष के बाद राजपूत महिलाओं ने जौहर किया और योद्धाओं ने अंतिम सांस तक युद्ध लड़ा। इसके अलावा मुगल काल, अफगान आक्रमणों और अन्य संघर्षों का भी यह किला साक्षी रहा है। बावजूद इसके, इसकी भव्यता और अस्तित्व आज भी बरकरार है।

यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल

जैसलमेर किले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 2013 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। इसे राजस्थान के छह प्रसिद्ध पहाड़ी किलों के समूह में शामिल किया गया, जिनमें—

  • आमेर किला
  • चित्तौड़गढ़ किला
  • कुंभलगढ़ किला
  • गागरोन किला
  • रणथंभौर किला
  • जैसलमेर किला

शामिल हैं।

अद्भुत वास्तुकला का अनमोल उदाहरण

राजपूत स्थापत्य कला का यह किला अपनी शानदार डिजाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

किले की प्रमुख विशेषताएं:

  • लंबाई लगभग 1500 फीट
  • चौड़ाई लगभग 750 फीट
  • 99 विशाल बुर्ज
  • चार मुख्य प्रवेश द्वार
  • मजबूत त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
  • ऊंची परकोटा दीवारें

ऊपर से देखने पर पूरा किला किसी सुनहरे मुकुट जैसा दिखाई देता है।

किले के अंदर क्या-क्या देखें?

राजमहल

यह जैसलमेर के महारावलों का शाही निवास रहा है। यहां राजसी जीवन की झलक देखने को मिलती है।

जैन मंदिर

किले के भीतर 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बने सात जैन मंदिर स्थित हैं। इन मंदिरों की नक्काशी और वास्तुकला पर्यटकों को हैरान कर देती है।

लक्ष्मीनाथ मंदिर

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर किले के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक है।

प्राचीन हवेलियां

किले के भीतर कई ऐतिहासिक हवेलियां मौजूद हैं, जिनमें—

  • नथमल हवेली
  • व्यास हवेली
  • अन्य व्यापारी हवेलियां

विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

इन हवेलियों की दीवारों, झरोखों और खिड़कियों पर की गई पत्थर की बारीक नक्काशी आज भी लोगों को आकर्षित करती है।

नथमल हवेली की अनोखी कहानी

नथमल हवेली जैसलमेर की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में गिनी जाती है। कहा जाता है कि इसका निर्माण दो भाई वास्तुकारों ने एक साथ अलग-अलग दिशाओं से किया था। यही कारण है कि हवेली के दोनों हिस्सों में हल्का अंतर दिखाई देता है। इसके बावजूद यह इमारत स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल मानी जाती है।

किले के अंदर का बाजार

किले की संकरी गलियां रंग-बिरंगे बाजारों से भरी रहती हैं।

यहां पर्यटक खरीद सकते हैं—

  • राजस्थानी हस्तशिल्प
  • ऊंट की चमड़े की वस्तुएं
  • पारंपरिक आभूषण
  • कठपुतलियां
  • कपड़े और सजावटी सामान

स्थानीय कलाकार आज भी पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।

सूर्यास्त का दृश्य क्यों है खास?

जैसलमेर किले का सूर्यास्त विश्व प्रसिद्ध है। जैसे ही सूरज ढलता है, पूरा किला सुनहरे रंग में रंग जाता है और थार रेगिस्तान के साथ मिलकर अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। फोटोग्राफर और पर्यटक विशेष रूप से इस दृश्य को कैमरे में कैद करने के लिए यहां पहुंचते हैं।

जैसलमेर किला घूमने का समय और शुल्क

Jaisalmer Fort timings : प्रवेश शुल्क

  • भारतीय पर्यटक: लगभग ₹50
  • विदेशी पर्यटक: लगभग ₹250
  • कैमरा शुल्क: अतिरिक्त

समय

  • सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक

हालांकि किले के भीतर रहने वाले लोगों और दुकानों की गतिविधियां देर शाम तक जारी रहती हैं।

Chittorgarh fort history in hindi : भारत का सबसे वीर किला! चित्तौड़गढ़ का इतिहास सुनकर कांप उठेंगे दुश्मन

संरक्षण की चुनौती

इतनी बड़ी आबादी और हर साल लाखों पर्यटकों के आने से किले पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार किले को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनमें—

  • जल रिसाव
  • अवैध निर्माण
  • कमजोर होती नींव
  • बढ़ता पर्यटन दबाव

प्रमुख हैं।

इसी कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), INTACH और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसके संरक्षण पर लगातार काम कर रही हैं।

जैसलमेर किला क्यों है खास?

Jaisalmer Fort information : जैसलमेर किला केवल पत्थरों से बना एक स्मारक नहीं, बल्कि सदियों से जीवित संस्कृति, परंपरा और इतिहास का प्रतीक है। यहां आज भी लोग रहते हैं, पूजा करते हैं, व्यापार करते हैं और अपनी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के पर्यटक इसे केवल एक किला नहीं, बल्कि इतिहास और वर्तमान के अद्भुत संगम के रूप में देखते हैं। शायद इसी कारण जैसलमेर का स्वर्ण किला आज भी गर्व से “भारत का जीवंत किला” कहलाता है।

About the Author

Parmeshwar Singh Chundwat

Editor

Parmeshwar Singh Chundwat ने डिजिटल मीडिया में कॅरियर की शुरुआत Jaivardhan News के कुशल कंटेंट राइटर के रूप में की है। फोटोग्राफी और वीडियो एडिटिंग में उनकी गहरी रुचि और विशेषज्ञता है। चाहे वह घटना, दुर्घटना, राजनीतिक, सामाजिक या अपराध से जुड़ी खबरें हों, वे SEO आधारित प्रभावी न्यूज लिखने में माहिर हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, थ्रेड्स और यूट्यूब के लिए छोटे व बड़े वीडियो कंटेंट तैयार करने में निपुण हैं।

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