
उदयपुर। Maheshwari Chauhan bronze medal एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर देश और राजस्थान का गौरव बढ़ाने वाली निशानेबाज माहेश्वरी चौहान शनिवार को उदयपुर पहुंचीं। उनके शहर पहुंचने पर खेल जगत से जुड़े लोगों, खेल प्रेमियों और परिवारजनों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। जापान में शानदार प्रदर्शन के बाद राजस्थान लौटीं माहेश्वरी के स्वागत में उत्साह और गर्व का माहौल नजर आया।
राजसमंद राइफल एसोसिएशन की ओर से शनिवार शाम फतहसागर स्थित राज बाग में माहेश्वरी चौहान के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया। यहां खेल प्रेमियों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उनकी मेहनत, संघर्ष और सफलता को सलाम किया। माहेश्वरी की अगवानी फूल बरसाकर और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच की गई। इससे पहले शनिवार सुबह दिल्ली और उदयपुर के डबोक एयरपोर्ट पर भी माहेश्वरी का तिलक लगाकर भव्य स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से लेकर सम्मान समारोह तक उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों में खासा उत्साह देखने को मिला। उदयपुर में आयोजित सम्मान समारोह में सबसे पहले माहेश्वरी के परिवारजनों राघवेंद्र सिंह राठौड़, प्रदीप सिंह चौहान, अधिराज सिंह राठौड़, अनंत सिंह राठौड़ और जितेंद्र सिंह राठौड़ ने उनका स्वागत किया और एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई दी।
गांव की मिट्टी से निकलकर जापान में लहराया तिरंगा
Maheshwari Chauhan Asian Games 2026 : सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा ऊंचा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। माहेश्वरी चौहान की इस सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास, अनुशासन, त्याग और परिवार का मजबूत विश्वास रहा है। माहेश्वरी की उपलब्धि पर उदयपुर, राजसमंद, बांसवाड़ा और जालौर से जुड़े प्रमुख लोगों ने भी खुशी जताई और उनका सम्मान किया। एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद माहेश्वरी चौहान की सफलता ने राजस्थान के खेल जगत में भी नई उम्मीद और उत्साह पैदा किया है।
पिता ने बेटी के सपने को उड़ान देने के लिए गांव में बनवा दी शूटिंग रेंज
Maheshwari Chauhan Jalore : माहेश्वरी चौहान की सफलता की कहानी में उनके परिवार के योगदान की अहम भूमिका रही है। उन्हें निशानेबाजी की शुरुआती सीख अपने दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह चौहान से मिली। पिता प्रदीप सिंह चौहान ने बेटी की प्रतिभा को बहुत पहले ही पहचान लिया था। उन्होंने माहेश्वरी के सपने को आगे बढ़ाने के लिए जालोर जिले के सियाणा गांव में ही शूटिंग रेंज तैयार करवाई। गांव में अभ्यास की सुविधा मिलने से माहेश्वरी को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला और उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
पेरिस ओलंपिक की निराशा को बनाया नई मेहनत की वजह
Maheshwari Chauhan husband Adhiraj Singh माहेश्वरी चौहान के सफर में सफलता के साथ चुनौतियां भी रहीं। पेरिस ओलंपिक में वह पदक से बेहद मामूली अंतर से चूक गई थीं। यह उनके लिए निराशाजनक पल था, लेकिन उन्होंने इस असफलता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। राजसमंद राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष, उदयपुर के उद्यमी और माहेश्वरी के ससुर राघवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पेरिस ओलंपिक में पदक चूकने के बाद भी माहेश्वरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने राजसमंद के केलवा स्थित शूटिंग रेंज पर लगातार अभ्यास जारी रखा और अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखा। माहेश्वरी की मेहनत आखिरकार रंग लाई और जापान में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
पिता बोले- बेटी के लंबे संघर्ष का परिणाम है यह पदक
सम्मान समारोह में माहेश्वरी के पिता और जालोर राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने कहा कि केवल सुविधाएं उपलब्ध होने से कोई खिलाड़ी सफल नहीं बनता। सफलता के लिए मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास जरूरी है। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी को अवसर और सुविधाएं जरूर मिलीं, लेकिन उन्होंने उन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से सफलता में बदला। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल करने के बाद एशियन गेम्स में मिला कांस्य पदक उनके वर्षों के संघर्ष और समर्पण का परिणाम है।
ससुराल ने भी बढ़ाया बहू का हौसला
माहेश्वरी चौहान की सफलता में उनके ससुराल पक्ष के सहयोग को भी समारोह में विशेष रूप से याद किया गया। उदयपुर राइफल एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरमदेव सिंह कृष्णावत ने कहा कि माहेश्वरी ने सिर्फ एक पदक नहीं जीता, बल्कि अपने परिवार, गांव और पूरे राजस्थान का मान बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि जालोर की बेटी शादी के बाद उदयपुर आई, लेकिन ससुराल में भी उन्हें राइफल शूटिंग को आगे बढ़ाने के लिए पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला। परिवार के इस समर्थन ने माहेश्वरी के खेल सफर को मजबूती दी। Maheshwari Chauhan latest news
खेल संघों ने भी किया माहेश्वरी का सम्मान
सम्मान समारोह में विभिन्न खेल संघों से जुड़े पदाधिकारियों और खेल जगत की हस्तियों ने माहेश्वरी चौहान को बधाई दी। इस दौरान बांसवाड़ा राइफल संघ के अध्यक्ष दिव्य राज सिंह, राजसमंद राइफल संघ के उपाध्यक्ष देवेन्द्र सिंह राठौड़, कायाकिंग केनोइंग के पूर्व चेयरमैन पीयूष कच्छावा, उदयपुर बेडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल भंडारी, उदयपुर जिम्नास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हिम्मत सिंह चौहान और पूर्व जिला खेल अधिकारी शकील हुसैन सहित अन्य लोगों ने भी माहेश्वरी का स्वागत किया।

एशियन गेम्स में महिला स्कीट टीम ने जीता कांस्य
माहेश्वरी चौहान ने एशियन गेम्स 2026 में महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। जापान के आइची-नागोया में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। भारतीय टीम में माहेश्वरी चौहान, राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल शामिल थीं। तीनों खिलाड़ियों ने मिलकर 331 अंकों का संयुक्त स्कोर हासिल किया और कांस्य पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा में चीन ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान ने रजत पदक हासिल किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दे चुके हैं बधाई
महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी माहेश्वरी चौहान, परिनाज धालीवाल और राइजा ढिल्लों को बधाई दी थी। प्रधानमंत्री ने 23 सितंबर को खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा था कि उनकी एकाग्रता, सटीकता और टीमवर्क ने भारतीय खेलों के लिए गर्व का एक और अवसर दिया है। उन्होंने तीनों खिलाड़ियों को उनके आगामी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
जालोर में जन्मीं माहेश्वरी केलवा घराने की बहू
माहेश्वरी चौहान का जन्म 4 जुलाई 1996 को जालोर जिले के सियाणा गांव में हुआ था। उन्होंने निशानेबाजी की शुरुआती बारीकियां अपने दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह चौहान से सीखीं। पिता ने बेटी की प्रतिभा को पहचानते हुए सियाणा गांव में ही शूटिंग रेंज तैयार करवाई, जहां से माहेश्वरी ने अपने खेल सफर को आगे बढ़ाया। बाद में शादी के बाद उन्होंने केलवा स्थित राजसमंद राइफल शूटिंग संघ की शूटिंग रेंज पर अभ्यास जारी रखा और अपनी प्रतिभा को और निखारा। माहेश्वरी ने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ाई की। वर्तमान में वह केलवा स्थित जिला राइफल संघ की शूटिंग रेंज में अभ्यास करती हैं। उनके पति अधिराज सिंह हैं और वह राजसमंद के पूर्व सांसद हरिओम सिंह के परिवार से हैं।
गांव की गलियों से शुरू हुआ माहेश्वरी का निशानेबाजी का सफर अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है। जापान में तिरंगा लहराकर एशियन गेम्स का कांस्य पदक जीतने वाली माहेश्वरी चौहान की कहानी मेहनत, अनुशासन, परिवार के विश्वास और कभी हार न मानने के जज्बे की मिसाल बन गई है।



