
Rana Punja Mela Rajsamand : राजसमंद जिले के मचींद गांव स्थित राणा पूंजा पर्यटन स्थल पर महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय पारंपरिक मेले का मंगलवार को उत्साहपूर्ण माहौल में समापन हुआ। मेले का समापन रोमांचक पहाड़ चढ़ाई प्रतियोगिता के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस आयोजन में भील आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और वीरता की अनूठी झलक देखने को मिली।
दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने मेले में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विभिन्न प्रतियोगिताओं व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। दिनभर मेले में लोगों की चहल-पहल बनी रही, वहीं शाम के समय पूरा मेला स्थल रंग-बिरंगी रोशनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार हो उठा। बच्चों के लिए मनोरंजन की विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, जबकि विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों और घरेलू उपयोग की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ दिखाई दी। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का केंद्र रहा, बल्कि आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास और वीर योद्धा राणा पूंजा के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम बना।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने दिखाया दम
Machind Village Rajsamand : मेले के दौरान तीरंदाजी, पहाड़ चढ़ाई, रस्साकशी, कबड्डी, वॉलीबॉल, कुर्सी रेस, गोला फेंक और मटकी दौड़ जैसी कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
Rana Punja Memorial Fair : शाम ढलते ही मेला स्थल सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो गया। आयोजित भजन संध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण शामिल हुए। वहीं चाट-पकौड़ी, आइसक्रीम, जूस, चूड़ी-कंगन और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ती रही। बच्चों के लिए चकरी, डॉलर और जंपिंग जैसी मनोरंजन सुविधाएं आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।


राणा पूंजा के शौर्य और योगदान को किया याद
Haldighati War Rana Punja : राणा पूंजा पर्यटन स्थल मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि हल्दीघाटी युद्ध के दौरान भील योद्धा राणा पूंजा और उनकी सेना ने महाराणा प्रताप का साथ देते हुए मुगल सेना के खिलाफ अहम भूमिका निभाई थी। पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों की गहरी जानकारी रखने वाले भील योद्धाओं की गुरिल्ला युद्ध नीति ने मेवाड़ के संघर्ष को मजबूती प्रदान की थी।

आने वाली पीढ़ियों को विरासत से जोड़ने का प्रयास
Maharana Pratap Jayanti : मेले के माध्यम से आदिवासी समाज ने वीर योद्धा राणा पूंजा के बलिदान और योगदान को याद करते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया। यही कारण है कि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर हर वर्ष इस मेले का आयोजन विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जाता है।



