
Kumbhalgarh Tiger Reserve News : कुंभलगढ़ में प्रस्तावित टाइगर रिजर्व को लेकर नया मोड़ आ गया है। राजसमंद सांसद महिमाकुमारी मेवाड़ ने केंद्र सरकार से इस योजना को पूरी तरह निरस्त करने की मांग करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र भेजा है।
सांसद ने यह आपत्ति ऐसे समय जताई है, जब नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की टेक्निकल कमेटी 16 जून को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे चुकी है। सांसद महिमा कुमारी का कहना है कि कुंभलगढ़ वन क्षेत्र से टाइगर के शिकार के फोटो उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, अरावली की पहाड़ियों के वन क्षेत्र में घूमता हुआ एक टाइगर आया था, जिसका शिकार किया गया था। सांसद ने पत्र में कहा कि कुंभलगढ़ का यह भूभाग बाघों की स्थायी आबादी को बनाए रखने के लिए उपयुक्त नहीं है। उन्होंने एनटीसीए की एक विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि अलग- थलग पड़ा कुंभलगढ़-टॉडगढ़ दीर्घकाल में बाघों की आबादी को जीवित रखने में सक्षम नहीं माना गया है। उनका कहना है कि यदि यहां कृत्रिम रूप से बाघों को बसाया गया तो वर्तमान पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। सांसद ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्तमान में कुंभलगढ़ वन क्षेत्र में पैंथर, भालू, जरख, भेड़िया, जंगली बिल्ली, सियार, कैराकल और हनी बेजर जैसी प्रजातियां निवास करती हैं। विशेष रूप से यह क्षेत्र भारतीय भेड़ियों की प्रजनन आबादी के लिए राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण संरक्षित आवास माना जाता है।
रायका समुदाय और ऊंट पालकों की चिंता भी प्रमुख
Kumbhalgarh Forest Tiger Hunting Photos : सांसद ने स्थानीय रायका पशुपालक समुदाय और कुंभलगढ़ कैमल डेयरी से जुड़े परिवारों की आजीविका का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बनने के बाद लागू होने वाले प्रतिबंधों से जंगल में प्रवेश सीमित हो सकता है। क्षेत्र के करीब 15 से 20 हजार ऊंट चारे के लिए इसी वन क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे में हजारों पशुपालकों के सामने रोजगार और जीवनयापन की चुनौती खड़ी हो सकती है। सांसद ने अपने पत्र के साथ मार्च 2024 का वह ज्ञापन भी संलग्न किया है, जिसे संरक्षणवादी सरिताकुमारी घाणेराव और हनुवंतसिंह राठौड़ ने तैयार किया था।

पर्यटन को मिल सकता है नया आधार
Kumbhalgarh Tiger Reserve Controversy : पीसीसी सचिव योगेंद्रसिंह परमार ने कहा कि टाइगर प्रोजेक्ट से क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, लेकिन परियोजना से प्रभावित परिवारों को पहले नियमानुसार उचित मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए। अब कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व का मुद्दा केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ पर्यावरण, इतिहास, आजीविका और विकास जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़ गए हैं। Wildlife Conservation in Kumbhalgarh
इतिहास में दर्ज हैं टाइगरों की मौजूदगी के प्रमाण
Rajasthan Tiger Reserve Latest News : सेवानिवृत्त मुख्यवन संरक्षक जसवंतसिंह ने सांसद के इस तर्क पर असहमति जताई कि कुंभलगढ़ का बाघों से कोई ऐतिहासिक जुड़ाव नहीं रहा। उन्होंने कहा कि मेवाड़ क्षेत्र में टाइगरों की मौजूदगी के प्रमाण उपलब्ध है। अंग्रेजिया स्थित ब्रिटिशकालीन विश्राम गृह के रिकॉर्ड और शिकार रजिस्टरों में 1940 से 1953 के बीच 6 टाइगर , 2 तेंदुए और 2 रीछ के शिकार दर्ज हैं। इनमें एक आदमखोर टाइगर का भी उल्लेख भी मिलता है। उन्होंने कहा कि इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।



