
राजसमंद। Rajsamand Nagar Parishad : जिले की पांचों नगरीय निकायों में नई शहरी सरकार के गठन के बाद अब परिषद और पालिका बोर्ड के कामकाज को अलग-अलग विषयों के अनुसार समितियों में बांटने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 55 के तहत कार्यकारिणी समिति के साथ वित्त, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, भवन अनुज्ञा एवं संकर्म, गंदी बस्ती सुधार, महिला एवं बाल विकास-गरीबी उन्मूलन, नियम एवं उपविधि तथा अपराध शमन एवं समझौता समितियों के गठन का प्रावधान है।
नियमों के अनुसार इन समितियों का गठन संबंधित निकाय के गठन के 90 दिनों के भीतर किया जाना आवश्यक है। निर्धारित अवधि में समितियों का गठन नहीं होने की स्थिति में राज्य सरकार को इनके गठन का अधिकार होगा। राजसमंद नगर परिषद में कुल 45 वार्ड हैं। नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 50 वार्ड तक की निकायों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता तथा प्रकाश व्यवस्था के लिए एक-एक समिति बनाई जा सकती है। वहीं 51 से 75 वार्ड होने पर इन दोनों विषयों के लिए दो-दो समितियां और 75 से अधिक वार्ड होने पर तीन-तीन समितियों का प्रावधान है। वित्त समिति बजट, आय-व्यय और अन्य वित्तीय मामलों की निगरानी करेगी। स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति सफाई व्यवस्था, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े कार्यों की समीक्षा करेगी। इसी तरह प्रकाश व्यवस्था समिति सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और भवनों में रोशनी से संबंधित व्यवस्थाओं को देखेगी। भवन अनुज्ञा एवं संकर्म समिति भवन निर्माण की अनुमति तथा निकाय की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा करेगी।

अलग-अलग समितियों को मिलेगी अलग जिम्मेदारी
Rajasthan Municipality : गंदी बस्ती सुधार समिति मलिन बस्तियों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों से जुड़े मामलों पर काम करेगी। वहीं महिला एवं बाल विकास-गरीबी उन्मूलन समिति के दायरे में महिला एवं बाल विकास, गरीबी उन्मूलन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने जैसे विषय शामिल होंगे। नियम एवं उपविधि समिति निकाय से संबंधित नियमों और उपविधियों की समीक्षा करेगी। जबकि अपराध शमन एवं समझौता समिति नगरपालिका अधिनियम के तहत अपराधों के शमन और समझौते से जुड़े मामलों को देखेगी। राजसमंद नगर परिषद में 45 वार्ड होने के कारण समितियों में सदस्यों का निर्धारण अधिनियम में निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। सभी नगरीय निकायों के पास समितियों के गठन के लिए 90 दिन की समय सीमा रहेगी। नगर परिषद राजसमंद के आयुक्त विजेश मंत्री ने बताया कि नगरपालिका अधिनियम की धारा 55 में समितियों की व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि निकाय के अलग-अलग विषयों से जुड़े कार्यों में पार्षदों की जिम्मेदारी तय हो सके और परिषद का कामकाज व्यवस्थित एवं विषयवार संचालित किया जा सके। समितियों में अधिकतम 10 सदस्य हो सकते हैं। Local News Rajsamand
पिछले बोर्ड में भी गठन को लेकर अटकी रही थी प्रक्रिया
Nagar Parishad Committee : राजसमंद नगर परिषद के पिछले तीन बोर्ड के कार्यकाल में भी समितियों का गठन निर्धारित समय पर नहीं हो सका था। विपक्षी पार्षदों की आपत्तियों और स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) में मामले लंबित रहने के चलते समिति गठन की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही। राजनीतिक खींचतान के बीच पिछले बोर्ड के अंतिम कार्यकाल में समितियां सक्रिय हो पाईं। समितियों के गठन में हुई देरी का असर सफाई, कचरा प्रबंधन और अन्य विकास कार्यों से जुड़े निर्णयों पर भी पड़ा और कई मामलों में फैसले लेने में विलंब की स्थिति बनी रही। अब नई शहरी सरकारों के गठन के बाद समितियों में सदस्यों के चयन और उन्हें जिम्मेदारियां सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। इससे नगरीय निकायों के अलग-अलग विभागीय एवं विषयगत कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित करने का रास्ता साफ होगा। Rajsamand Municipal Council



