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Mahakumbh 2025 : हठयोगी बाबाओं की अनोखी तपस्या : अजीबो-गरीब साधनाएं और तप के किस्से

Jaivardhan News January 22, 2025 1 minute read

Mahakumbh 2025 : योग, विशेषकर हठयोग, भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें शरीर और मन पर गहरी साधना और तपस्या की आवश्यकता होती है। हठयोग के माध्यम से साधक अपने शरीर को कठोर साधनाओं के लिए तैयार करता है और अपने भीतर की शक्तियों को जाग्रत करता है। इस योग में साधक अपने शरीर, मन और इंद्रियों को नियंत्रण में लाता है, और जब यह सब हो जाता है, तब वे अपनी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए अजीबो-गरीब तपस्याएं करते हैं। ऐसे ही हठयोगी बाबाओं के कुछ बेहद चौंकाने वाले और दिलचस्प किस्से हमारे सामने आते हैं, जो न सिर्फ उनकी अनुशासन शक्ति को दर्शाते हैं, बल्कि मानव जीवन के असीमित संभावनाओं को भी उजागर करते हैं।

Gangapuri Baba Story : 1. गंगापुरी महाराज : 32 साल से स्नान नहीं किया

Gangapuri Baba Story : गंगापुरी महाराज एक अत्यंत अद्वितीय साधु हैं, जिनकी उम्र 57 वर्ष है और उनकी हाइट महज 3 फीट 8 इंच है, जिस कारण उन्हें “लिलिपुट बाबा” के नाम से जाना जाता है। वे खुद को जूना अखाड़े का साधु बताते हैं और 32 साल से स्नान नहीं करने का दावा करते हैं। गंगापुरी महाराज का यह हठयोग एक चुनौती है उनके शरीर और मन के लिए। उनका मानना है कि जब उनका यह तप पूर्ण होगा, तब वे शिप्रा नदी में स्नान करेंगे और कामाख्या की यात्रा पर जाएंगे।

गंगापुरी के जीवन की कहानी अत्यंत प्रेरणादायक है। उनका जन्म असम के एक छोटे से गांव में हुआ था, और बचपन में ही उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके माता-पिता ने सात संतानों को खोने के बाद उनका पालन-पोषण एक दोस्त की मदद से हुआ। उनके जीवन में इस कष्ट के बावजूद उनका तप और साधना बहुत ही प्रेरणादायक है। वे मानते हैं कि शरीर के भीतर का संतुलन और ऊर्जा ही असली साधना है।

Mahakumbh 2025 : 144 साल बाद लगे महाकुंभ का क्या रहस्य है ? देखिए

Mahakal Giri Baba Story : 2. महाकाल गिरि : 9 साल से हाथ ऊपर रखे हुए

Mahakal Giri Baba Story : महाकाल गिरि, एक नागा साधु हैं, जो पिछले 9 वर्षों से अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाए हुए हैं। उनका दावा है कि उनके हाथ में शिवलिंग बना हुआ है, और वे इसे अपने हठयोग के माध्यम से शुद्ध करना चाहते हैं। उनकी उंगलियों के नाखून कई इंच लंबे हो गए हैं, और वे केवल एक हाथ से ही सभी कार्य करते हैं। महाकाल गिरि ने यह तपस्या एक विशेष उद्देश्य के तहत शुरू की थी—धर्म की स्थापना और गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए। उनका कहना है कि हर तपस्या का एक उद्देश्य होना चाहिए और यह तप उन्हें इस उद्देश्य की ओर ले जाता है।

Kante wale Baba : 3. रमेश कुमार कांटे वाले बाबा : 35 साल से कांटों पर सोते हैं

Kante wale Baba : रमेश कुमार, जिन्हें “कांटे वाले बाबा” के नाम से जाना जाता है, ने पिछले 35 सालों से कांटों पर ही सोने और बैठने का संकल्प लिया है। वे इस कठोर साधना में अडिग हैं और उनका कहना है कि यह उनका अडिग संकल्प है जो उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान लिया था। 1990 में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन के समय, जब पुलिस राम भक्तों को पीट रही थी, तब उन्होंने संकल्प लिया कि वे तब तक कांटों पर ही बैठेंगे जब तक रामलला टेंट से हटकर मंदिर में नहीं विराजमान होते।

prayagraj mahakumbh 2025 : अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के बाद, कांटे वाले बाबा ने दर्शन किए, लेकिन उनका संकल्प अब भी नहीं टूटा। वे यह मानते हैं कि जब मथुरा और काशी में भी भव्य मंदिर बनेगा, तब वे अपनी तपस्या छोड़ेंगे। उनका यह संकल्प और तप विशेष रूप से प्रेरणादायक है, क्योंकि यह न केवल उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है, बल्कि एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

Gitanand Maharaj Story : 4. गीतानंद महाराज : सिर पर 45 किलो रुद्राक्ष

Gitanand Maharaj Story : गीतानंद महाराज, एक संन्यासी हैं, जो अपने सिर पर सवा लाख रुद्राक्ष धारण किए हुए हैं, जिनका कुल वजन 45 किलो है। वे यह हठयोग भगवान शिव को मनाने के लिए कर रहे हैं। गीतानंद महाराज का जीवन भी बहुत प्रेरणादायक है, क्योंकि उनका जन्म एक छोटे से गांव में हुआ था, जहां उनके माता-पिता को संतान सुख नहीं मिल रहा था। गुरु की कृपा से उनका जन्म हुआ और बचपन में ही वे संन्यासी बन गए। उनके सिर पर रुद्राक्ष का यह भार दर्शाता है कि वे न केवल भगवान शिव से जुड़ने की इच्छा रखते हैं, बल्कि इसके माध्यम से भगवान के प्रति अपने समर्पण और आस्था को व्यक्त कर रहे हैं।

Rajendra Giri Baba : 5. राजेंद्र गिरि : 14 साल से एक पैर पर खड़े हैं

Rajendra Giri Baba : योगी राजेंद्र गिरि बाबा पिछले 14 वर्षों से एक पैर पर खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं। वे जूना अखाड़े से जुड़े हैं और अपनी तपस्या में इतने दृढ़ हैं कि अब वे कहते हैं कि जब तक वे जीवित रहेंगे, वे एक पैर पर खड़े रहेंगे। उनका यह हठयोग और तपस्या न केवल उनके शारीरिक बल को दिखाता है, बल्कि उनके मन की अडिग शक्ति को भी प्रदर्शित करता है। राजेंद्र गिरि बाबा की साधना ने उन्हें “खड़ेश्वरी बाबा” के नाम से भी प्रसिद्ध किया है।

Ann Wale Baba : 6. अन्न वाले बाबा: सिर पर उगाई फसल

Ann Wale Baba : अमरजीत बाबा, जो यूपी के सोनभद्र के रहने वाले हैं, अपने सिर पर अन्न उगाते हैं। उन्होंने पिछले 5 सालों से सिर पर फसल उगाने का हठयोग किया है। बाबा का यह प्रयास पर्यावरण को जागरूक करने के लिए है। जब उनकी फसल पक जाती है, तो वे उसे भंडारे के रूप में वितरित करते हैं। हालांकि इस साधना के कारण उनकी सिर की चमड़ी फट जाती है और पौधों की जड़ें अंदर चली जाती हैं, लेकिन बाबा इस तपस्या में अडिग हैं।

Pyhari Baba : 7. पयहारी बाबा : चाय पर जीवन यापन

Pyhari Baba : पयहारी बाबा, जिन्हें दिनेश स्वरूप ब्रह्मचारी के नाम से भी जाना जाता है, 41 वर्षों से मौन धारण किए हुए हैं और सिर्फ चाय पीकर जीवित रहते हैं। वे अन्न का त्याग कर चुके हैं और भक्तों को चाय ही प्रसाद के रूप में देते हैं। पयहारी बाबा का जीवन साधना और तपस्या का अद्वितीय उदाहरण है, क्योंकि वे केवल चाय पीकर ही अपने शरीर को जीवित रखते हैं और समाज की सेवा में लगे रहते हैं।

mahakumbh 2025 prayagraj : हठयोगी बाबाओं की ये साधनाएं और तपस्या न केवल उनके शारीरिक बल को दर्शाती हैं, बल्कि इनकी मानसिक दृढ़ता और साधना के प्रति निष्ठा को भी उजागर करती हैं। इन बाबाओं के अद्वितीय तप के उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि मनुष्य के भीतर गहरी इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो वह किसी भी कठिन कार्य को संभव बना सकता है। यह कहानी न केवल हमें हठयोग के बारे में अधिक जानने का अवसर देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि साधना के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति का धैर्य, समर्पण और दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

Mahakumbh 2025 : महाकुंभ का कितना पुराना है इसका इतिहास? जानें अद्भुत तथ्य और रोमांचक इतिहास

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जयपुर के प्रताप नगर इलाके में हुए नीरज शर्मा हत्याकांड में पुलिस जांच के बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय नीरज शर्मा की हत्या उनकी बेटी आयुषी शर्मा ने प्रॉपर्टी और सरकारी नौकरी पाने के लालच में करवाई। आरोप है कि आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि के साथ मिलकर पूरी साजिश रची। हत्या के लिए 7 लाख रुपए की सुपारी दी गई और कई दिनों तक महिला की रेकी की गई। 3 जुलाई को जब नीरज शर्मा अपने बेटे को कोचिंग छोड़कर घर लौट रही थीं, तभी करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आई स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आयुषी अपने पिता की मृत्यु के बाद उनकी सरकारी नौकरी चाहती थी, लेकिन नीरज शर्मा ने स्वयं अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर ली। इसी के साथ संपत्ति को लेकर भी परिवार में विवाद चल रहा था।#Jaipurneerajsharmacase #JAivardhannewsJaivardhan News : यह चैनल राजस्थान सहित देश-दुनिया की ताजा, विश्वसनीय और निष्पक्ष खबरों के लिए समर्पित है।Owner & Editor: Laxman Singh Rathore (Journalist)🌐 Website: http://www.jaivardhannews.com
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